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Bihar: जांच में दोषी ठहराए जाने के बावजूद कार्रवाई नहीं, सिमराही के पार्षदों ने EO के खिलाफ खोला मोर्चा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सुपौल
Published by: कोसी ब्यूरो
Updated Mon, 22 Jun 2026 08:00 AM IST
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सार
सुपौल के सिमराही नगर पंचायत में कार्यपालक पदाधिकारी के खिलाफ वार्ड पार्षदों और स्थानीय लोगों ने मोर्चा खोल दिया है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में खरीद अनियमितता और विकास कार्यों में लापरवाही के आरोप लगाए गए। जनप्रतिनिधियों ने जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।
प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते पार्षद एवं पार्षद प्रतिनिधि
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
सुपौल के राघोपुर प्रखंड के अंतर्गत नगर पंचायत सिमराही में कार्यपालक पदाधिकारी (ईओ) के खिलाफ जनप्रतिनिधियों और स्थानीय नागरिकों का विरोध तेज हो गया है। रविवार को सिमराही बाजार स्थित एक निजी होटल के सभागार में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में वार्ड पार्षदों, समाजसेवियों और प्रबुद्ध नागरिकों ने नगर पंचायत प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए।
नगर पंचायत में विकास योजनाओं की उपेक्षा हो रही
प्रेस वार्ता के दौरान वक्ताओं ने आरोप लगाया कि नगर पंचायत में विकास योजनाओं की उपेक्षा की जा रही है, जबकि जेम पोर्टल के माध्यम से बड़े पैमाने पर सामग्री की खरीद की जा रही है। उनका दावा है कि खरीद प्रक्रिया में नियमों और निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया तथा कुछ चुनिंदा एजेंसियों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया।
जांच प्रतिवेदन में कार्यपालक पदाधिकारी की भूमिका पर उठे सवाल
वार्ड पार्षद प्रतिनिधि विनय भगत, वार्ड पार्षद सतीश कुमार और सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर प्रणव जायसवाल ने कहा कि नगर पंचायत में वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही की शिकायतों की जांच अनुमंडल पदाधिकारी, उप विकास आयुक्त और जिलाधिकारी स्तर पर की जा चुकी है। उनका आरोप है कि जांच प्रतिवेदन में कार्यपालक पदाधिकारी की भूमिका पर सवाल उठाए गए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
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समन्वय की कमी जैसे मामले भी उठे
वक्ताओं ने यह भी कहा कि जांच रिपोर्ट के बावजूद संबंधित अधिकारी को न केवल पद पर बनाए रखा गया, बल्कि उन्हें एक अन्य नगर पंचायत का अतिरिक्त प्रभार भी सौंप दिया गया। इसे लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों में नाराजगी बढ़ रही है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि जांच रिपोर्ट में डस्टबिन और हाईमास्ट लाइट की खरीद प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, नियमों के उल्लंघन तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं की अनदेखी जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा राजस्व प्रबंधन, विभागीय आदेशों के पालन और जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय की कमी जैसे मामलों को भी उठाया गया।
ये भी पढ़ें- Bihar News : पटना में बड़ा हादसा, गंगा नदी में तीन मासूमों की डूबने से मौत, स्नान करने के दौरान हुआ हादसा
पार्षदों का आरोप है कि जो जनप्रतिनिधि इन मुद्दों को उठा रहे हैं, उनके वार्डों की विकास योजनाओं को प्रभावित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि जांच रिपोर्ट के आधार पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो व्यापक जन आंदोलन शुरू किया जाएगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में बैद्यनाथ यादव, बिंदी गुप्ता, रिंकू भगत, अमित भगत, मो. नूर आलम, मो. बसीर, मो. मन्नान सहित कई स्थानीय नागरिक और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
नगर पंचायत में विकास योजनाओं की उपेक्षा हो रही
प्रेस वार्ता के दौरान वक्ताओं ने आरोप लगाया कि नगर पंचायत में विकास योजनाओं की उपेक्षा की जा रही है, जबकि जेम पोर्टल के माध्यम से बड़े पैमाने पर सामग्री की खरीद की जा रही है। उनका दावा है कि खरीद प्रक्रिया में नियमों और निर्धारित प्रोटोकॉल का पालन नहीं किया गया तथा कुछ चुनिंदा एजेंसियों को लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया।
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जांच प्रतिवेदन में कार्यपालक पदाधिकारी की भूमिका पर उठे सवाल
वार्ड पार्षद प्रतिनिधि विनय भगत, वार्ड पार्षद सतीश कुमार और सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर प्रणव जायसवाल ने कहा कि नगर पंचायत में वित्तीय अनियमितताओं और प्रशासनिक लापरवाही की शिकायतों की जांच अनुमंडल पदाधिकारी, उप विकास आयुक्त और जिलाधिकारी स्तर पर की जा चुकी है। उनका आरोप है कि जांच प्रतिवेदन में कार्यपालक पदाधिकारी की भूमिका पर सवाल उठाए गए, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
समन्वय की कमी जैसे मामले भी उठे
वक्ताओं ने यह भी कहा कि जांच रिपोर्ट के बावजूद संबंधित अधिकारी को न केवल पद पर बनाए रखा गया, बल्कि उन्हें एक अन्य नगर पंचायत का अतिरिक्त प्रभार भी सौंप दिया गया। इसे लेकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और नागरिकों में नाराजगी बढ़ रही है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया गया कि जांच रिपोर्ट में डस्टबिन और हाईमास्ट लाइट की खरीद प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं, नियमों के उल्लंघन तथा प्रशासनिक प्रक्रियाओं की अनदेखी जैसे मुद्दों का उल्लेख किया गया है। इसके अलावा राजस्व प्रबंधन, विभागीय आदेशों के पालन और जनप्रतिनिधियों के साथ समन्वय की कमी जैसे मामलों को भी उठाया गया।
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पार्षदों का आरोप है कि जो जनप्रतिनिधि इन मुद्दों को उठा रहे हैं, उनके वार्डों की विकास योजनाओं को प्रभावित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि जांच रिपोर्ट के आधार पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो व्यापक जन आंदोलन शुरू किया जाएगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस में बैद्यनाथ यादव, बिंदी गुप्ता, रिंकू भगत, अमित भगत, मो. नूर आलम, मो. बसीर, मो. मन्नान सहित कई स्थानीय नागरिक और जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।