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Bihar: 'जहां बच्चों को पढ़ना था, वहां गुरुजी सोते मिले', विद्यालय की तस्वीरों ने उठाए सवाल, शुरू हुई जांच
Tue, 28 Jul 2026 04:49 PM IST
कोसी ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सुपौल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सुपौल
Published by: कोसी ब्यूरो
Updated Tue, 28 Jul 2026 04:49 PM IST
सार
बिहार के सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज स्थित प्राथमिक विद्यालय खोरिया में दो शिक्षकों का क्लासरूम के अंदर बच्चों की बेंच-डेस्क पर पैर रखकर सोने का वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। स्थानीय लोगों का दावा है कि शिक्षकों को सोता देख कई बच्चे स्कूल छोड़कर घर लौट गए।
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क्लास में सोते मिले शिक्षक
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
बिहार में सरकारी स्कूलों की शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में है। सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज प्रखंड स्थित प्राथमिक विद्यालय खोरिया से सामने आई एक तस्वीर ने सभी को हैरान कर दिया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और फोटो में शिक्षक क्लासरूम के अंदर बच्चों की बेंच-डेस्क पर पैर रखकर सोते हुए दिखाई दे रहे हैं। घटना सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के दावों के बीच सामने आई लापरवाही
एक ओर राज्य सरकार सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ शिक्षकों की लापरवाही इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। ताजा मामला सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज प्रखंड के खोरिया स्थित प्राथमिक विद्यालय का है, जहां पढ़ाई के दौरान शिक्षक कथित तौर पर क्लासरूम में आराम करते नजर आए। इसका वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
बेंच-डेस्क पर पैर फैलाकर सोते दिखे शिक्षक
वायरल तस्वीरों में शिक्षक दिनेश कुमार मंडल और देवेंद्र सरदार उसी डेस्क-बेंच पर पैर फैलाकर सोते दिखाई दे रहे हैं, जहां बच्चे बैठकर पढ़ाई करते हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि शिक्षकों को सोता देख कई छात्र-छात्राएं अपना बस्ता लेकर घर लौट गए। देखते ही देखते पूरा क्लासरूम खाली हो गया, लेकिन शिक्षक नींद में ही मशगूल रहे।
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ये भी पढ़ें- Bihar News: तेजस्वी यादव अब भी संतुष्ट नहीं, सरकार से न्यायिक जांच की मांग की; सीएम सम्राट पर भी साधा निशाना
अभिभावकों में भारी नाराजगी
घटना सामने आने के बाद अभिभावकों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि बच्चों को अच्छी शिक्षा देना शिक्षकों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। यदि शिक्षक ही अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाह रहेंगे तो बच्चों का भविष्य कैसे बनेगा? अभिभावकों का कहना है कि ऐसी घटनाएं सरकारी स्कूलों के प्रति लोगों का भरोसा लगातार कमजोर कर रही हैं।
हाल ही में मिड-डे मील विवाद भी आया था सामने
स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ दिन पहले ही इलाके के एक सरकारी विद्यालय में मिड-डे मील खाने के बाद सैकड़ों बच्चों के बीमार होने का मामला सामने आया था। वह मामला अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि अब शिक्षा व्यवस्था की यह नई तस्वीर सामने आ गई। लोगों का कहना है कि लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के कारण अभिभावकों का रुझान सरकारी स्कूलों की बजाय निजी स्कूलों की ओर बढ़ता जा रहा है। जानकारी के अनुसार, प्राथमिक विद्यालय खोरिया में कुल 140 बच्चों का नामांकन है। प्रतिदिन करीब 100 बच्चे स्कूल आते हैं। विद्यालय में प्रधानाध्यापक सहित कुल सात शिक्षक पदस्थापित हैं।
शिक्षा विभाग ने शुरू की जांच
इस मामले पर बीईओ सह बीपीआरओ मनीष कुमार ने कहा कि उन्हें घटना की जानकारी मिली है। पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। यदि जांच में शिक्षक दोषी पाए जाते हैं तो विभागीय नियमों के अनुसार उनके विरुद्ध उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के दावों के बीच सामने आई लापरवाही
एक ओर राज्य सरकार सरकारी स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर कुछ शिक्षकों की लापरवाही इन दावों पर सवाल खड़े कर रही है। ताजा मामला सुपौल जिले के त्रिवेणीगंज प्रखंड के खोरिया स्थित प्राथमिक विद्यालय का है, जहां पढ़ाई के दौरान शिक्षक कथित तौर पर क्लासरूम में आराम करते नजर आए। इसका वीडियो और फोटो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
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बेंच-डेस्क पर पैर फैलाकर सोते दिखे शिक्षक
वायरल तस्वीरों में शिक्षक दिनेश कुमार मंडल और देवेंद्र सरदार उसी डेस्क-बेंच पर पैर फैलाकर सोते दिखाई दे रहे हैं, जहां बच्चे बैठकर पढ़ाई करते हैं। स्थानीय लोगों का दावा है कि शिक्षकों को सोता देख कई छात्र-छात्राएं अपना बस्ता लेकर घर लौट गए। देखते ही देखते पूरा क्लासरूम खाली हो गया, लेकिन शिक्षक नींद में ही मशगूल रहे।
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अभिभावकों में भारी नाराजगी
घटना सामने आने के बाद अभिभावकों में भारी नाराजगी है। उनका कहना है कि बच्चों को अच्छी शिक्षा देना शिक्षकों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है। यदि शिक्षक ही अपने कर्तव्यों के प्रति लापरवाह रहेंगे तो बच्चों का भविष्य कैसे बनेगा? अभिभावकों का कहना है कि ऐसी घटनाएं सरकारी स्कूलों के प्रति लोगों का भरोसा लगातार कमजोर कर रही हैं।
हाल ही में मिड-डे मील विवाद भी आया था सामने
स्थानीय लोगों का कहना है कि कुछ दिन पहले ही इलाके के एक सरकारी विद्यालय में मिड-डे मील खाने के बाद सैकड़ों बच्चों के बीमार होने का मामला सामने आया था। वह मामला अभी पूरी तरह शांत भी नहीं हुआ था कि अब शिक्षा व्यवस्था की यह नई तस्वीर सामने आ गई। लोगों का कहना है कि लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के कारण अभिभावकों का रुझान सरकारी स्कूलों की बजाय निजी स्कूलों की ओर बढ़ता जा रहा है। जानकारी के अनुसार, प्राथमिक विद्यालय खोरिया में कुल 140 बच्चों का नामांकन है। प्रतिदिन करीब 100 बच्चे स्कूल आते हैं। विद्यालय में प्रधानाध्यापक सहित कुल सात शिक्षक पदस्थापित हैं।
शिक्षा विभाग ने शुरू की जांच
इस मामले पर बीईओ सह बीपीआरओ मनीष कुमार ने कहा कि उन्हें घटना की जानकारी मिली है। पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। यदि जांच में शिक्षक दोषी पाए जाते हैं तो विभागीय नियमों के अनुसार उनके विरुद्ध उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।