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Bihar : बिहार में बंगला पॉलिटिक्स, मंत्री का छलका दर्द; कहा- दलित का बेटा हूं, इसलिए खाली नहीं हो रहा आवास

Sun, 31 May 2026 12:37 PM IST
Krishan Ballabh Narayan Krishan Ballabh Narayan
Updated Sun, 31 May 2026 12:37 PM IST
सार

Bihar : बिहार की सियासत में इन दिनों सरकारी बंगले को लेकर घमासान मचा हुआ है। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के आवास को खाली कराने और नए मंत्री नंदकिशोर राम को उसे अलॉट किए जाने पर जमकर बयानबाजी हो रही है।

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Minister Nand Kishore Ram statement at Rabri Awas Bungalow politics I am a Dalit's son patna bihar Bihar News
राबड़ी आवास पर मचा संग्राम। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बिहार की राजनीति में सरकारी आवासों को लेकर शुरू हुआ विवाद अब जाति और विक्टिम कार्ड के इर्द-गिर्द सिमट गया है। नवनियुक्त बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के मंत्री नंदकिशोर राम को पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी का 10 सर्कुलर रोड स्थित आवास आवंटित किया गया है। लेकिन बंगला खाली न होने पर मंत्री जी का दर्द छलक पड़ा है। उन्होंने कहा कि मैं दलित का बेटा हूं, इसलिए आवास खाली नहीं किया जा रहा है, इसका एहसास अब मुझे हो रहा है।
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16 दिनों में बदले दो आदेश 
भवन निर्माण विभाग द्वारा जारी किए गए दो अलग-अलग आदेशों ने इस विवाद को और हवा दे दी है। दरअसल 11 मई को पहला आदेश आया कि भवन निर्माण विभाग ने एक आदेश जारी कर मंत्री नंदकिशोर राम को 21 हार्डिंग रोड का आवास आवंटित किया था। लेकिन फिर 27 मई को दूसरा नोटिस पहले आदेश के करीब 16 दिन बाद भवन निर्माण विभाग ने नया फरमान निकाला। इसमें नंदकिशोर राम का आवास बदलकर उन्हें राबड़ी देवी वाला 10 सर्कुलर रोड का बंगला अलॉट कर दिया गया।
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एक तरफ दलित कार्ड, तो दूसरी तरफ अपमान का आरोप
इस पूरे मामले में दोनों ही पक्ष खुद को पीड़ित बताने में जुटे हैं। जहां एक तरफ मंत्री नंदकिशोर राम खुद के दलित होने के कारण बंगला न मिलने की बात कह रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ राष्ट्रीय जनता दल का खेमा इसे राजनीतिक द्वेष बता रहा है। राजद के कार्यकर्ताओं और नेता इस बात की दलील दे रहे हैं कि 10 सर्कुलर रोड के आवास को खाली कराने के लिए पिछले कई महीनों से जद्दोजहद चल रही है और लगातार नोटिस जारी किए जा रहे हैं। राबड़ी देवी के समर्थकों और पार्टी नेताओं का कहना है कि उन्हें अपमानित करने के लिए जबरन आवास खाली कराया जा रहा है। सोशल मीडिया पर उनके समर्थक आरजेडी के अच्छे दिनों की याद दिलाते हुए लिख रहे हैं कि सब दिन होत न एक समाना।

 

Minister Nand Kishore Ram statement at Rabri Awas Bungalow politics I am a Dalit's son patna bihar Bihar News
वरिष्ठ पत्रकार। - फोटो : अमर उजाला

क्या कहते हैं राजनीतिक जानकार?
इस पूरे मामले पर वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी कहते हैं कि यह बहुत ही शर्मनाक प्रसंग है। उन्होंने कहा कि राजनेता जहां एक तरफ सरकारी आवास को अपना निजी संपत्ति समझते हैं कि वहां रहना उनका जन्मसिद्ध अधिकार है। इससे उनकी मानसिकता पता चलती है। वैसे भी सरकारी आवास कभी स्थायी नहीं हो सकता। जबतक आप उस पद पर हैं तभी तक वह आपका है। वहीं दूसरी तरफ सरकार की तरफ से भी गलती हुई है। जब वह आवास उनको नेता प्रतिपक्ष के पद के अनुसार उन्हें आवंटित हुआ, तो फिर उनका कार्यकाल रहते हुए किस आधार पर सरकार राबड़ी देवी को आवास खाली करवाने का दवाब बना रही है? वरिष्ठ पत्रकार प्रवीण बागी ने कहा कि दोनों पक्ष अपनी-अपनी तरफ से चूक कर रहे हैं। ऐसे में लोकतांत्रिक व्यवस्था हास्यास्पद बन रही हैं।
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मामला ऐसा भी हो सकता है
वहीं इस संबंध में वरिष्ठ पत्रकार अभिरंजन कुमार का कहना है कि आज कौन किस बंगले में रह रहा है यह कोई मुद्दा नहीं है। किसी भी बंगले का निर्माण पद के हिसाब से तो हुआ नहीं है, फिर इस बात का दवाब देना कि आपको खाली करना ही पड़ेगा, आप इसको सिर्फ पावर ऑफ स्ट्रगल कह सकते हैं। इसके पीछे का तर्क यह है कि आवास खाली कराने का आदेश पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के कार्यकाल के समय ही हुआ था लेकिन इसके बाद भी उन्होंने राबड़ी देवी और लालू प्रसाद यादव को लेकर एक सॉफ्ट कॉर्नर बनाकर रखा था। अब उस मामले को लेकर फिर से पत्र जारी करना और राबड़ी देवी का खाली करने से इनकार करना, सिर्फ एक राजनीतिक मुद्दा बनेगा। फ़िलहाल आवास खाली कराने का लेटर जारी होना, राबड़ी देवी का सीएम को चुनौती देना और राबड़ी के इस चुनौती के कुछ ही देर के बाद पुलिस अधिकारियों का राबड़ी आवास पहुंचना और अंत में राजद के द्वारा प्रतिकार करने की बात कहना, यह सब एक राजनीतिक एजेंडा बनेगा और सभी विपक्ष इसी बहाने एक साथ होकर सत्ता पक्ष के खिलाफ गोलबंद होंगे। 
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राबड़ी देवी के नाम पर नहीं हुआ था आवंटित 
इस संबंध में वरिष्ठ पत्रकार लव कुमार मिश्रा कहते हैं कि राबड़ी देवी ने इस मामले को तूल दे दिया है। उनको ऐसा नहीं करना चाहिए। वैसे भी अब तो डीएम ने भी  अल्टीमेटम दे दिया, इसलिए इसको इश्यू न बनाकर उनको आवास खाली कर देना चाहिए। वरिष्ठ पत्रकार लव कुमार मिश्रा का कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी को नेता प्रतिपक्ष के पद के लिए वह आवास आवंटित नहीं किया गया है, बल्कि 10 सर्कुलर रोड आवास पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव को पूर्व मुख्यमंत्री के नाम पर आवंटित हुआ था। सुप्रीम कोर्ट ने वह कोटा समाप्त कर दिया था, जिसके तहत हार्डिंग रोड स्थित पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र और सतीश प्रसाद सिंह आदि के आवास को भी समाप्त कर दिया गया था। इसी मसले में नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव से जब पूर्व मुख्यमंत्री का आवास लिया जा रहा था तो उन्होंने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था, जहां कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया था कि उनकी यह मांग गलत है।

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सरकार के द्वारा जारी किया गया पत्र।  - फोटो : अमर उजाला

अब उठ रहा यह सवाल 
अब राजनीति के गलियारों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि आखिर 11 मई को मिले आवास में मंत्री नंदकिशोर राम क्यों नहीं गए? और महज दो हफ्तों के भीतर सरकार को इतनी जल्दी उनका आवास बदलने की जरूरत क्यों आन पड़ी?

क्या हो सकता है बीच का रास्ता ? 
मामले को करीब से देखने वाले विश्लेषकों का मानना है कि इस विवाद से आसानी से बचा जा सकता था। जब बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग के मंत्री नंदकिशोर राम को पता था कि राबड़ी देवी के आवास को लेकर महीनों से विवाद चल रहा है, तो वे सीधे तौर पर सरकार से यह भी कह सकते थे कि उन्हें किसी विवाद में न घसीटा जाए और पुराना 21 हार्डिंग रोड वाला आवास ही दे दिया जाए, जहां वे आराम से रह सकें। हालांकि भाजपा कह रही है कि यह लोकतंत्र है राजतंत्र नहीं। राबड़ी देवी सरकारी संपत्ति को अपनी निजी जागीर समझने की भूल बिल्कुल न करें। नियम के मुताबिक उन्हें आवंटित आवास में जाना ही पड़ेगा। बहरहाल, दोनों तरफ से बयानबाजी जारी है  दोनों आदेशों की प्रतियां सामने आने के बाद अब गेंद सरकार और विपक्ष दोनों के पाले में है। 

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