Bihar: ‘वेस्ट से वेल्थ’ की मिसाल, खगड़िया में केले के तने से बनेगा रोजगार, महिलाओं के लिए शुरू हुआ प्रशिक्षण
Bihar: खगड़िया में केले के तनों से रेशा निकालकर उत्पाद बनाने के लिए महिलाओं को एक महीने का विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जिला प्रशासन और नाबार्ड की इस पहल का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना और ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की अवधारणा को बढ़ावा देना है।
विस्तार
खगड़िया जिले में अब केले की खेती सिर्फ फल उत्पादन तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह महिलाओं के लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता का नया जरिया भी बनेगी। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन और नाबार्ड ने जिले की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने के उद्देश्य से ‘वेस्ट टू वेल्थ’ पहल के तहत एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की है। जिला पदाधिकारी नवीन कुमार, डीडीसी श्वेता भारती और नाबार्ड की डीडीएम पूजा भारती ने दीप प्रज्वलित कर एक महीने के प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया। इस अवसर पर केले के तने से रेशा निकालकर उत्पाद बनाने वाली महिलाओं को सम्मानित भी किया गया।
केले के तने से बनेंगे कई उपयोगी उत्पाद
खगड़िया में बड़े पैमाने पर केले की खेती होती है। अब आधुनिक तकनीक की मदद से केले के तनों से रेशा निकालकर विभिन्न प्रकार के आकर्षक और उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाएंगे। प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं को हस्तशिल्प से जुड़े कई उत्पाद बनाना सिखाया जाएगा। इनमें फैंसी बैग, चटाई, टोकरियां, फाइल कवर, फोल्डर, सजावटी सामान और मजबूत रस्सियां शामिल हैं।
महिलाओं को मिलेगा स्वरोजगार का अवसर
जिला पदाधिकारी नवीन कुमार ने कहा कि खगड़िया में केले की प्रचुरता है और इसके तने से निकलने वाला रेशा पर्यावरण के अनुकूल होने के साथ-साथ महिलाओं के लिए अतिरिक्त आय का मजबूत माध्यम बन सकता है। उन्होंने कहा कि प्रशासन महिलाओं को मशीन और बाजार उपलब्ध कराने के लिए भी प्रतिबद्ध है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगी मजबूती
डीडीसी श्वेता भारती ने कहा कि महिलाएं घर के कामकाज के साथ-साथ इस उद्योग से जुड़कर आत्मनिर्भर बन सकती हैं। उनका मानना है कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में महिलाओं की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है और इस पहल से उन्हें नया अवसर मिलेगा।
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‘वेस्ट टू वेल्थ’ की दिशा में बड़ा कदम
अब तक किसान केले के तनों को बेकार समझकर खेतों में ही छोड़ देते थे, लेकिन अब इन्हीं तनों से कीमती रेशा निकालकर उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाएंगे। इससे जहां प्रदूषण कम होगा, वहीं महिलाओं को स्वरोजगार के नए अवसर भी मिलेंगे। कार्यक्रम का संचालन नाबार्ड की डीडीएम पूजा भारती ने किया, जबकि इसका संयोजन जे जे बी एफ संस्था द्वारा किया गया। इस पहल से जिले में ‘वेस्ट टू वेल्थ’ की अवधारणा को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ महिलाओं की आर्थिक स्थिति भी मजबूत होने की उम्मीद है।
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