Bihar: जमुई में किशोर की मौत पर बवाल, अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाकर सड़क कर दिया जाम
जमुई शहर के नारायण अस्पताल में 13 वर्षीय कन्हैया कुमार की मौत के बाद रविवार को जमकर बवाल हुआ। परिजनों ने अस्पताल पर इलाज में लापरवाही, अधिक पैसे वसूलने और मौत की सूचना देर से देने का आरोप लगाते हुए सड़क जाम कर प्रदर्शन किया।
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जमुई शहर के सिकंदरा रोड स्थित नारायण अस्पताल में 13 वर्षीय किशोर की मौत के बाद रविवार को जमकर हंगामा हुआ। मृतक के परिजनों ने इलाज में लापरवाही और अधिक पैसे वसूलने का आरोप लगाते हुए अस्पताल के सामने सड़क जाम कर विरोध प्रदर्शन किया। वहीं अस्पताल प्रबंधन ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि बच्चा गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था और उसे बचाने की हरसंभव कोशिश की गई।
जानकारी के अनुसार, टाउन थाना क्षेत्र के नर्मदा गांव निवासी विजय रजक का 13 वर्षीय पुत्र कन्हैया कुमार शनिवार देर रात जहरीले बिच्छू के डंक का शिकार हो गया। घटना के बाद परिजन उसे इलाज के लिए जमुई शहर के निजी नारायण अस्पताल लेकर पहुंचे।
परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में भर्ती के बाद लगातार पैसे जमा कराने का दबाव बनाया गया और इलाज में लाखों रुपये खर्च होने की बात कही गई। इसके बावजूद बच्चे की हालत बिगड़ती चली गई और आखिरकार उसकी मौत हो गई।
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मृतक के पिता विजय रजक और चाचा अजय रजक ने आरोप लगाया कि अस्पताल प्रबंधन ने बच्चे की वास्तविक स्थिति की जानकारी समय पर नहीं दी। उनका कहना है कि रात में ही बच्चे की मौत हो चुकी थी, लेकिन सुबह तक इसकी सूचना परिवार को नहीं दी गई।
मौत की खबर मिलते ही परिजन और ग्रामीण आक्रोशित हो उठे। उन्होंने अस्पताल के सामने जमुई-सिकंदरा मुख्य मार्ग को बांस-बल्ला लगाकर जाम कर दिया। करीब दो घंटे तक सड़क जाम रहने से वाहनों की लंबी कतार लग गई और यातायात पूरी तरह प्रभावित रहा। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और लोगों को समझा-बुझाकर जाम हटवाया। इसके बाद यातायात सामान्य हो सका। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है।
इधर, अस्पताल की डॉक्टर कविता सिंह ने परिजनों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बच्चे को काफी देर से अस्पताल लाया गया था। उनके अनुसार भर्ती के समय कन्हैया बेहोशी की हालत में था और उसकी स्थिति बेहद गंभीर थी। उन्होंने बताया कि इलाज के दौरान कुछ समय के लिए बच्चे को होश में भी लाया गया, लेकिन उसकी प्रतिरोधक क्षमता लगातार कमजोर होती चली गई। डॉक्टर का कहना है कि परिजनों को बच्चे की गंभीर स्थिति की जानकारी पहले ही दे दी गई थी।
फिलहाल घटना के बाद पूरे इलाके में चर्चा का माहौल है। एक ओर परिवार बेटे को खोने के गम में डूबा है, वहीं दूसरी ओर अस्पताल प्रबंधन खुद को निर्दोष बता रहा है। अब पुलिस जांच के बाद ही पूरे मामले की सच्चाई सामने आ सकेगी।