Bihar News: साइबर ठगी के बड़े गिरोह का भंडाफोड़, किंगपिन समेत 5 गिरफ्तार, कई राज्यों में फैला था जाल
शेखपुरा जिले में देश के कई राज्यों में साइबर ठगी करने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। पटना से आई एसटीएफ और आर्थिक अपराध इकाई की टीम ने साइबर थाना पुलिस के साथ मिलकर बरबीघा के छबीलाठिका गांव में छापेमारी की, जहां से गिरोह के किंगपिन राजु कुमार समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया।
विस्तार
देश के कई राज्यों में साइबर ठगी को अंजाम देने वाले एक बड़े गिरोह का पर्दाफाश शेखपुरा जिले में हुआ है। पटना से आई एसटीएफ और आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की टीम ने शेखपुरा साइबर थाना पुलिस के साथ मिलकर बरबीघा के छबीलाठिका गांव में छापेमारी की। इस कार्रवाई में गिरोह के किंगपिन समेत पांच लोगों को गिरफ्तार किया गया है। इनके पास से छह एंड्रॉयड फोन और कई आपत्तिजनक दस्तावेज भी बरामद हुए हैं। पकड़े गए लोगों में किंगपिन राजु कुमार, पुष्पक कुमार, राजीव कुमार, अवनीश कुमार और मोहित कुमार शामिल हैं। सभी से पूछताछ के बाद बुधवार को उन्हें न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया।
प्रेस कॉन्फ्रेंस में दी गई पूरी जानकारी
साइबर थाना की डीएसपी ज्योति कुमारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पूरे मामले की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पटना से आई टीम और शेखपुरा की स्पेशल टीम ने मिलकर छबीलाठिका गांव में छापेमारी की। इस दौरान एक मंदिर के पास कुछ संदिग्ध लोग दिखे। पुलिस को देखते ही वे भागने लगे, जिसके बाद घेराबंदी कर करीब एक दर्जन लोगों को पकड़ा गया। जांच-पड़ताल और पूछताछ के बाद इनमें से पांच लोगों को साइबर ठग के रूप में चिन्हित किया गया। वहीं दो ठग अंधेरे का फायदा उठाकर भाग निकले। फरार आरोपियों की पहचान गांव के ही सचिन कुमार और अभिषेक उर्फ चुन्नु के रूप में हुई है। सभी के खिलाफ साइबर थाना में मामला दर्ज कर लिया गया है।
कई राज्यों में दर्ज हैं किंगपिन पर केस
पकड़े गए गिरोह का किंगपिन राजु कुमार है, जिस पर कई राज्यों में साइबर ठगी के मामले दर्ज हैं। थानाध्यक्ष ने बताया कि राजु कुमार के खिलाफ मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के कई राज्यों में केस चल रहे हैं। उसका मोबाइल फोन भी साइबर फ्रॉड के मामलों में करीब एक दर्जन बार NCRP पर दर्ज हो चुका है।
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ऐसे करते थे ठगी
पुलिस के मुताबिक यह गिरोह फर्जी विज्ञापन बनाकर लोगों को सस्ता लोन दिलाने और सस्ती सीमेंट डीलरशिप दिलाने का झांसा देता था। पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि ठगी के बाद गिरोह के हर सदस्य को हर महीने 40 से 50 हजार रुपये तक की कमाई हो जाती थी।
एक दशक में पूरे जिले में फैला जाल
करीब एक दशक पहले जिले में साइबर ठगी की शुरुआत शेखोपुरसराय थाना क्षेत्र के मोहब्बतपुर गांव से हुई थी। यह तरीका झारखंड के जामताड़ा मॉडल की तर्ज पर पास के नालंदा जिले के कतरीसराय से यहां पहुंचा था। शुरुआती पांच वर्षों में यह गिरोह शेखोपुरसराय के दूसरे गांवों और बरबीघा के कुछ इलाकों तक फैला। अब हालात यह हैं कि पूरे जिले में साइबर ठगों का जाल फैल चुका है और शहरी इलाके भी इससे अछूते नहीं हैं। सरकार की ओर से अलग से साइबर थाना बनने के बावजूद साइबर ठगी पर पूरी तरह लगाम नहीं लग पा रही है।