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Bihar: अपनों के बाद सिस्टम ने भी ठुकराया, दो वक्त की रोटी को तरसे बुजुर्ग, वृद्धाश्रम की कड़वी हकीकत आई सामने

न्यूज डेस्क, अमर उजाला,मोतिहारी Published by: तिरहुत-मुजफ्फरपुर ब्यूरो Updated Thu, 28 May 2026 03:53 PM IST
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सार

मोतिहारी के बरियारपुर स्थित वृद्धा आश्रम की बदहाली ने सिस्टम की संवेदनहीनता को उजागर कर दिया है। कभी सरकारी दावों और सुविधाओं के साथ शुरू हुआ यह आश्रम अब दो महीने से भोजन और दवा जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है।

Elderly people are battling hunger in old age homes, food has been stopped for two months Motihari Bihar News
मोतिहारी वृद्धाश्रम को लेकर उठे सवाल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

मोतिहारी में कभी सरकारी संवेदनशीलता और मानवता की मिसाल माना जाने वाला वृद्धा आश्रम आज लापरवाही और सिस्टम की उदासीनता का प्रतीक बन गया है। बरियारपुर स्थित इस आश्रम में रहने वाले बुजुर्ग अब सुविधा नहीं, बल्कि रोटी और दवा के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यहां रहने वाले वृद्धों की आंखों में उम्मीद की जगह भूख, दर्द और उपेक्षा साफ दिखाई दे रही है।

बड़े दावों के साथ शुरू हुआ था आश्रम

करीब दो साल पहले इस वृद्धा आश्रम की शुरुआत बड़े दावों और सरकारी प्रचार के साथ की गई थी। दावा किया गया था कि जिन बुजुर्गों को उनके परिजन छोड़ देंगे, उन्हें यहां सम्मान, देखभाल और सहारा मिलेगा। उस समय अधिकारियों ने फीता काटकर इसका उद्घाटन किया था और सोशल मीडिया पर इसे संवेदनशील प्रशासन की मिसाल बताया गया था। आश्रम में ग्यारह कमरे, आरओ सिस्टम, वॉशिंग मशीन और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की गई थी। शुरुआती दौर में अधिकारी खुद यहां आकर बुजुर्गों के साथ भोजन करते थे और यह संदेश दिया जाता था कि अब कोई भी बुजुर्ग बेसहारा नहीं रहेगा।

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दो महीने से बंद भोजन और दवा की व्यवस्था

लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। पिछले करीब दो महीनों से आश्रम में भोजन की सरकारी व्यवस्था बंद है। दवा और देखभाल भी लगभग ठप हो चुकी है। जिन बुजुर्गों को उनके परिवार ने छोड़ दिया था, उन्हें अब सिस्टम ने भी उनके हाल पर छोड़ दिया है।

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समाज के सहारे चल रही बुजुर्गों की जिंदगी

स्थिति इतनी खराब हो चुकी है कि आश्रम में रह रहे बुजुर्गों का पेट अब स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों के चंदे से भर रहा है। अगर समाज के लोग मदद नहीं करें तो कई बुजुर्गों को भूखे सोने की नौबत आ जाती है।


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बेतिया भेजने की बात पर बुजुर्गों की अनिच्छा

नगर निगम का कहना है कि बेतिया में नया वृद्धा आश्रम शुरू किया गया है, जहां मोतिहारी के बुजुर्गों को शिफ्ट किया जाएगा। लेकिन यहां रह रहे बुजुर्ग बेतिया जाने को तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि मोतिहारी ही उनका घर है और यहीं उन्हें अपनापन मिला था।

सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

सामाजिक संगठनों ने इस पूरे मामले को प्रशासन की संवेदनहीनता की पराकाष्ठा बताया है। लोगों का कहना है कि योजनाएं सिर्फ कागजों और फोटो तक सीमित रह गई हैं। जैसे ही प्रचार खत्म होता है, वैसे ही बुजुर्गों की समस्याएं भी नजरअंदाज कर दी जाती हैं।

बड़ा सवाल: क्या यही है सम्मानजनक बुढ़ापा?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिन बुजुर्गों ने अपनी पूरी जिंदगी समाज और परिवार के लिए समर्पित कर दी, उनका बुढ़ापा क्या सिर्फ भूख और उपेक्षा के सहारे रह गया है? मोतिहारी का यह वृद्धा आश्रम अब एक योजना नहीं, बल्कि सिस्टम की असफलता और इंसानियत की परीक्षा बन चुका है।

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