Bihar: अरवल सीएस से दुर्व्यवहार के विरोध में मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल की ओपीडी बंद, मरीज परेशान
Bihar: अरवल के सिविल सर्जन से कथित दुर्व्यवहार के विरोध में मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल के डॉक्टरों ने बुधवार को एक दिन के लिए ओपीडी का बहिष्कार किया। इमरजेंसी सेवाएं जारी रहीं, लेकिन सैकड़ों मरीज बिना इलाज लौटे।
Bihar: अरवल के सिविल सर्जन से कथित दुर्व्यवहार के विरोध में मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल के डॉक्टरों ने बुधवार को एक दिन के लिए ओपीडी का बहिष्कार किया। इमरजेंसी सेवाएं जारी रहीं, लेकिन सैकड़ों मरीज बिना इलाज लौटे।
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बिहार के अरवल जिले के सिविल सर्जन डॉ. राजकिशोर प्रसाद के साथ कथित दुर्व्यवहार और एक चिकित्सक पर हुए हमले के विरोध में बुधवार को मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल में एक दिवसीय ओपीडी सेवा का बहिष्कार किया गया। बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के आह्वान पर सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार के नेतृत्व में डॉक्टरों ने ओपीडी बंद रखकर विरोध दर्ज कराया।
हालांकि, मरीजों की सुविधा को देखते हुए आपातकालीन सेवाएं, प्रसूति एवं शिशु वार्ड सहित सभी आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं सामान्य रूप से संचालित होती रहीं। लेकिन ओपीडी बंद रहने के कारण दूर-दराज से इलाज के लिए पहुंचे बड़ी संख्या में मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा। सैकड़ों मरीज बिना इलाज कराए वापस लौट गए।
पताही से अपने 10 दिन के बच्चे का इलाज कराने आई साहिदा खातून ने बताया कि बच्चे को मंगलवार रात से बुखार था। वह सुबह अस्पताल पहुंचीं तो पता चला कि डॉक्टर हड़ताल पर हैं। उन्हें पहले से आंदोलन की कोई जानकारी नहीं थी, इसलिए अब निजी अस्पताल का रुख करना पड़ेगा।
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वहीं, अपने पिता का इलाज कराने पहुंचे अरविंद कुमार ने बताया कि डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें बुधवार को दोबारा आने के लिए कहा था। अस्पताल पहुंचने पर ओपीडी बंद मिली। उनका कहना था कि यदि पहले से सूचना मिल जाती तो वे किसी दूसरे अस्पताल में इलाज करा लेते और अनावश्यक परेशानी से बच जाते।
सिविल सर्जन डॉ. सुधीर कुमार ने बताया कि अरवल के सिविल सर्जन के साथ हुई घटना के विरोध में चिकित्सकों ने केवल एक दिन के लिए ओपीडी सेवा का बहिष्कार किया है। उन्होंने कहा कि मरीजों की सुविधा को देखते हुए इमरजेंसी, प्रसूति एवं शिशु वार्ड सहित सभी आवश्यक सेवाएं चालू रखी गई हैं।
उन्होंने चिकित्सकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और दोषियों के खिलाफ त्वरित व कड़ी कार्रवाई की मांग की। डॉक्टरों का कहना है कि यदि चिकित्सकों की सुरक्षा को लेकर ठोस कदम नहीं उठाए गए तो भविष्य में आंदोलन को और व्यापक किया जा सकता है।