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Bihar: बिहार में आज ओपीडी सेवा का बहिष्कार, स्वास्थ्य व्यवस्था बनाए रखने के लिए डीएम ने जारी किए सख्त निर्देश
Wed, 22 Jul 2026 07:49 AM IST
सारण ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सारण
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सारण
Published by: सारण ब्यूरो
Updated Wed, 22 Jul 2026 07:49 AM IST
सार
बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के आह्वान पर 22 जुलाई को राज्यभर में ओपीडी सेवाओं के बहिष्कार के बीच सारण जिला प्रशासन अलर्ट मोड में है। जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने स्वास्थ्य सेवाएं सुचारु बनाए रखने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक निर्देश जारी किए हैं।
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सारण के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव
- फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ द्वारा आज यानी 22 जुलाई को सारण जिले सहित पूरे राज्य में ओपीडी सेवाओं के बहिष्कार की घोषणा के बाद सारण जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क हो गया है। सारण के जिलाधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने इस संबंध में पत्र जारी कर स्वास्थ्य विभाग को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए हैं, ताकि आम जनता को किसी प्रकार की परेशानी न हो और जिले में स्वास्थ्य सेवाएं सुचारु रूप से संचालित होती रहें।
डीएम ने आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए
इस संबंध में जिलाधिकारी द्वारा जारी पत्र में अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी-सह-सिविल सर्जन, सारण को निर्देश दिया गया है कि बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के पत्रांक-38/26, दिनांक 21 जुलाई 2026 के आलोक में आवश्यक एवं समुचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। डीएम ने यह भी कहा है कि स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं तथा विधि-व्यवस्था संबंधी किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न न होने पाए। इस पत्र की प्रतिलिपि सारण के वरीय पुलिस अधीक्षक एवं जिले के सभी अनुमंडल पदाधिकारियों को भी आवश्यक कार्रवाई एवं समन्वय के लिए भेजी गई है।
दोषियों पर कार्रवाई न होने से आक्रोश
वहीं, दूसरी ओर बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ ने अरवल सदर अस्पताल में सिविल सर्जन के साथ हुई हिंसक घटना और कथित अभद्र व्यवहार के विरोध में आज यानी 22 जुलाई को राज्यभर के सेवारत चिकित्सकों द्वारा ओपीडी सेवाओं के बहिष्कार की घोषणा की है। संघ का कहना है कि घटना के दोषियों के विरुद्ध अब तक प्रभावी कानूनी एवं प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होने से चिकित्सकों में गहरा आक्रोश और असुरक्षा की भावना है।
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चिकित्सकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए
संघ के अध्यक्ष डॉ. कैप्टन संजीव कुमार झा एवं महासचिव डॉ. रोहित कुमार द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि कई बार चिकित्सकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण आंदोलन का निर्णय लेना पड़ा है। संघ ने स्पष्ट किया है कि 22 जुलाई को ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार किया जाएगा, जबकि आपातकालीन (इमरजेंसी) एवं जीवनरक्षक सेवाएं पूर्ववत संचालित रहेंगी, ताकि गंभीर मरीजों के इलाज में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।
ये भी पढ़ें- राहुल गांधी की डिटेंशन पर पटना में कांग्रेस का हंगामा! लोकभवन के बाहर धरना; सरकार के खिलाफ लगाए गए नारे
जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि घबराने की आवश्यकता नहीं है। आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और अस्पतालों में स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जाएगी। साथ ही सभी संबंधित अधिकारियों को समन्वय बनाकर स्वास्थ्य व्यवस्था को सुचारु रखने का निर्देश दिया गया है।
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डीएम ने आवश्यक कदम उठाने के निर्देश दिए
इस संबंध में जिलाधिकारी द्वारा जारी पत्र में अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी-सह-सिविल सर्जन, सारण को निर्देश दिया गया है कि बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ के पत्रांक-38/26, दिनांक 21 जुलाई 2026 के आलोक में आवश्यक एवं समुचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। डीएम ने यह भी कहा है कि स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जाएं तथा विधि-व्यवस्था संबंधी किसी भी प्रकार की समस्या उत्पन्न न होने पाए। इस पत्र की प्रतिलिपि सारण के वरीय पुलिस अधीक्षक एवं जिले के सभी अनुमंडल पदाधिकारियों को भी आवश्यक कार्रवाई एवं समन्वय के लिए भेजी गई है।
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दोषियों पर कार्रवाई न होने से आक्रोश
वहीं, दूसरी ओर बिहार स्वास्थ्य सेवा संघ ने अरवल सदर अस्पताल में सिविल सर्जन के साथ हुई हिंसक घटना और कथित अभद्र व्यवहार के विरोध में आज यानी 22 जुलाई को राज्यभर के सेवारत चिकित्सकों द्वारा ओपीडी सेवाओं के बहिष्कार की घोषणा की है। संघ का कहना है कि घटना के दोषियों के विरुद्ध अब तक प्रभावी कानूनी एवं प्रशासनिक कार्रवाई नहीं होने से चिकित्सकों में गहरा आक्रोश और असुरक्षा की भावना है।
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चिकित्सकों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए
संघ के अध्यक्ष डॉ. कैप्टन संजीव कुमार झा एवं महासचिव डॉ. रोहित कुमार द्वारा जारी पत्र में कहा गया है कि कई बार चिकित्सकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की गई, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के कारण आंदोलन का निर्णय लेना पड़ा है। संघ ने स्पष्ट किया है कि 22 जुलाई को ओपीडी सेवाओं का बहिष्कार किया जाएगा, जबकि आपातकालीन (इमरजेंसी) एवं जीवनरक्षक सेवाएं पूर्ववत संचालित रहेंगी, ताकि गंभीर मरीजों के इलाज में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो।
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जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि घबराने की आवश्यकता नहीं है। आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और अस्पतालों में स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जाएगी। साथ ही सभी संबंधित अधिकारियों को समन्वय बनाकर स्वास्थ्य व्यवस्था को सुचारु रखने का निर्देश दिया गया है।