Bihar News: लखपति दीदी बनाने का सपना टूटा! मशरूम प्रोजेक्ट ने बनाया कर्जदार, करोड़ों की ठगी का आरोप
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बिहार के मुजफ्फरपुर में मशरूम उत्पादन के जरिए महिलाओं को आत्मनिर्भर और 'लखपति दीदी' बनाने का सपना दिखाने वाली योजना अब बड़े विवाद में घिर गई है। मुसहरी प्रखंड की सैकड़ों जीविका दीदियों ने जिला प्रशासन से शिकायत करते हुए आरोप लगाया कि उनके समूहों के नाम पर बैंक से लाखों रुपये का ऋण लिया गया, लेकिन न तो मशरूम क्लस्टर शुरू हुआ और न ही उन्हें कोई रोजगार मिला। अब बैंक की ओर से ऋण चुकाने के नोटिस मिलने के बाद महिलाएं खुद को ठगी का शिकार बता रही हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन ने जांच के आदेश दिए हैं।
डीएम कार्यालय पहुंचीं सैकड़ों महिलाएं, लगाया ठगी का आरोप
मुजफ्फरपुर समाहरणालय में मुसहरी प्रखंड की सैकड़ों जीविका दीदियां पहुंचीं और जिला प्रशासन के सामने अपनी शिकायत रखी। महिलाओं का आरोप है कि मशरूम उत्पादन के नाम पर उनके समूहों के जरिए बैंक से ऋण लिया गया, लेकिन योजना धरातल पर कभी शुरू ही नहीं हुई।
महिलाओं ने बताया कि अब बैंक की ओर से ऋण चुकाने के लिए नोटिस भेजे जा रहे हैं, जबकि उन्हें न कोई काम मिला और न ही योजना का लाभ। इस दौरान समाहरणालय परिसर में काफी देर तक अफरातफरी का माहौल रहा और महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन भी किया।
कागजों पर चला 'स्मार्ट मशरूम' प्रोजेक्ट, जमीन पर नहीं दिखा काम
जानकारी के अनुसार, फरवरी 2024 में बड़े स्तर पर 'स्मार्ट हट' के माध्यम से मशरूम उत्पादन की योजना शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ना और उनकी आय बढ़ाना था। लेकिन दो साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी अधिकांश स्थानों पर न तो मशरूम क्लस्टर शुरू हुए और न ही उत्पादन शुरू हो सका। महिलाओं का आरोप है कि उनके समूहों के नाम पर निकाली गई ऋण राशि का दुरुपयोग किया गया और करोड़ों रुपये का गबन हुआ।मामले में ग्रेविटी एग्रो एंड एनर्जी एजेंसी के संचालक आशुतोष मंगलम पर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। महिलाओं का कहना है कि बैंक से लिए गए ऋण की राशि वापस नहीं की गई, जिसके बाद अब बैंक उनके घरों पर नोटिस भेज रहा है।
बिना क्षमता जांचे कैसे मिला प्रोजेक्ट, उठ रहे सवाल
बताया जा रहा है कि समझौते के तहत एजेंसी को बोचहां और मुसहरी प्रखंड में 10-10 जीविका समूहों के लिए स्मार्ट हट स्थापित करने थे। आरोप है कि समझौते के बाद ग्रामीण बैंक से जारी ऋण की राशि एजेंसी ने निकाल ली, लेकिन तय समय पर स्मार्ट हट स्थापित नहीं किए गए। इस मामले में पहले भी बोचहां ग्रामीण बैंक शाखा की प्रबंधक की शिकायत पर गबन का मामला दर्ज किया गया था। मुसहरी में भी इसी तरह की शिकायत सामने आई थी। अब पूरे मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं। यह भी बताया जा रहा है कि इससे पहले प्लास्टिक कचरे से पेट्रोल बनाने की योजना का भी करार हुआ था, लेकिन वह परियोजना भी पूरी नहीं हो सकी।
महिलाओं का आरोप- हमारे नाम पर ऋण लिया, अब हमें बनाया जा रहा कर्जदार
जीविका समूह की महिलाओं का कहना है कि उनके नाम पर बैंक से पैसे निकाले गए, लेकिन न कोई मशरूम क्लस्टर शुरू हुआ और न ही उन्हें रोजगार मिला। महिलाओं के मुताबिक, जब बैंक की ओर से ऋण चुकाने का नोटिस आया, तब उन्हें पूरे मामले की जानकारी मिली। उन्होंने आरोप लगाया कि एजेंसी से कई बार संपर्क किया गया, लेकिन हर बार जल्द समाधान का आश्वासन देकर मामला टाल दिया गया। महिलाओं का कहना है कि बिना किसी गलती के वे अब कर्जदार बन गई हैं, जिससे वे मानसिक तनाव में हैं।
एजेंसी ने बैंक को ठहराया जिम्मेदार
दूसरी ओर, ग्रेविटी एग्रो एंड एनर्जी एजेंसी के संचालक आशुतोष मंगलम ने आरोपों से इनकार करते हुए देरी के लिए बैंक को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि बैंक से समय पर पूरी राशि नहीं मिली। जो राशि मिली, वह भी बहुत कम किस्तों में जारी हुई। इसी कारण परियोजना समय पर शुरू नहीं हो सकी। उनका दावा है कि जल्द ही तीन नए मशरूम क्लस्टर शुरू किए जाएंगे और परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा।
प्रशासन ने बनाई जांच समिति, डीडीसी ने दिया भरोसा
पूरे मामले पर उप विकास आयुक्त (DDC) निशांत सिहारा ने बताया कि जिलाधिकारी के निर्देश पर एक विशेष जांच समिति का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि समिति पूरे मामले की जांच कर रही है। कंपनी ने भी प्रशासन को भरोसा दिया है कि जल्द तीन क्लस्टर शुरू किए जाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जांच में किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। बैंक की ओर से महिलाओं को भेजे गए नोटिस के संबंध में भी अधिकारियों से बात की गई है। प्रशासन का कहना है कि पूरे मामले पर उसकी पैनी नजर है और परियोजना को तीन चरणों में दोबारा शुरू करने की भी योजना बनाई जा रही है।