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Bihar News: श्रावणी मेले का भव्य आगाज, पहले ही दिन एक लाख से अधिक कांवड़िए बाबा धाम के लिए रवाना
Fri, 31 Jul 2026 06:39 PM IST
भागलपुर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भागलपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भागलपुर
Published by: भागलपुर ब्यूरो
Updated Fri, 31 Jul 2026 06:39 PM IST
सार
विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले की शुरुआत के साथ ही सुल्तानगंज शिवमय हो गया। पहले ही दिन एक लाख से अधिक कांवड़िए उत्तरवाहिनी गंगा से जल भरकर बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा पर निकल पड़े।
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बोल बम' से गूंज उठा सुल्तानगंज
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
विश्व प्रसिद्ध श्रावणी मेले की शुरुआत के साथ ही भागलपुर का सुल्तानगंज पूरी तरह शिवमय हो गया है। देश के विभिन्न राज्यों के साथ-साथ नेपाल और भूटान से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु अजगैबीनाथ धाम पहुंच रहे हैं। पवित्र उत्तरवाहिनी गंगा में स्नान कर कांवड़ में गंगाजल भरने के बाद श्रद्धालु करीब 105 किलोमीटर दूर बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर के लिए पैदल यात्रा पर निकल पड़े हैं। मेले के पहले ही दिन एक लाख से अधिक कांवड़िए बाबा धाम के लिए रवाना हुए। पूरे कांवड़िया पथ पर "बोल बम" और "हर-हर महादेव" के जयघोष से वातावरण भक्तिमय हो गया है।
पहले ही दिन उमड़ा आस्था का जनसैलाब
श्रावणी मेले के पहले दिन सुल्तानगंज में श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ पड़ा। तड़के सुबह से ही नमामि गंगे घाट, अजगैबीनाथ मंदिर और गंगा तट पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। श्रद्धालुओं ने उत्तरवाहिनी गंगा में स्नान कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इसके बाद कांवड़ में गंगाजल भरकर बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर के लिए अपनी पैदल यात्रा शुरू की।
105 किलोमीटर की कठिन यात्रा पर निकले श्रद्धालु
कांवड़िए करीब 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचेंगे, जहां वे भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। कोई परिवार के साथ, कोई दोस्तों के समूह में तो कोई अकेले "बोल बम" का जयघोष करते हुए बाबा धाम की ओर बढ़ता नजर आया। श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का ऐसा संगम देखने को मिला कि पूरा सुल्तानगंज शिवमय हो गया।
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भगवा रंग में रंगा कांवड़िया पथ
कच्ची कांवड़िया पथ पर आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। दूर-दूर तक भगवा वस्त्र पहने श्रद्धालु, हाथों में कांवड़ लिए बाबा धाम की ओर बढ़ते दिखाई दिए। पूरे मार्ग पर "बोल बम", "बम-बम भोले" और "हर-हर महादेव" के जयघोष लगातार गूंजते रहे। श्रद्धालुओं के उत्साह और ऊर्जा ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
सेवा शिविरों में मिल रही हर जरूरी सुविधा
कांवड़िया पथ पर जगह-जगह स्वयंसेवी संस्थाओं की ओर से सेवा शिविर लगाए गए हैं। इन शिविरों में श्रद्धालुओं के लिए शुद्ध पेयजल, शरबत, भोजन, विश्राम और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था की गई है। इससे लंबी यात्रा करने वाले कांवड़ियों को काफी राहत मिल रही है।
प्रशासन की व्यापक तैयारियां
श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को लेकर जिला प्रशासन ने इस बार व्यापक इंतजाम किए हैं। नमामि गंगे घाट से लेकर पूरे कांवड़िया पथ तक पुलिस बल, दंडाधिकारी और स्वयंसेवकों की तैनाती की गई है। इसके अलावा चिकित्सा शिविर, एंबुलेंस, पेयजल, मोबाइल शौचालय, कंट्रोल रूम, हेल्प डेस्क और सीसीटीवी निगरानी की व्यवस्था भी की गई है। प्रशासन लगातार पूरे मार्ग की निगरानी कर रहा है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
श्रद्धालुओं ने व्यवस्थाओं की सराहना की
श्रद्धालुओं का कहना है कि इस वर्ष की व्यवस्थाएं पिछले वर्षों की तुलना में अधिक बेहतर हैं। उन्हें यात्रा के दौरान किसी बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है। देश के विभिन्न राज्यों के अलावा नेपाल और भूटान से आए श्रद्धालुओं ने भी भागलपुर जिला प्रशासन और राज्य सरकार की ओर से की गई व्यवस्थाओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि सुरक्षा, पेयजल, चिकित्सा और अन्य सुविधाओं ने यात्रा को पहले से अधिक सुगम और सुरक्षित बना दिया है।
शिवभक्ति में डूबा सुल्तानगंज
श्रावणी मेले की शुरुआत के साथ ही सुल्तानगंज पूरी तरह शिवभक्ति में सराबोर हो गया है। गंगा घाट से लेकर कांवड़िया पथ तक हर ओर भगवा रंग, कांवड़ और "बोल बम" के जयघोष सुनाई दे रहे हैं। आस्था, विश्वास और भक्ति का यह अद्भुत संगम एक बार फिर साबित कर रहा है कि श्रावणी मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का सबसे बड़ा पर्व है।
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पहले ही दिन उमड़ा आस्था का जनसैलाब
श्रावणी मेले के पहले दिन सुल्तानगंज में श्रद्धालुओं का भारी सैलाब उमड़ पड़ा। तड़के सुबह से ही नमामि गंगे घाट, अजगैबीनाथ मंदिर और गंगा तट पर श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखने को मिलीं। श्रद्धालुओं ने उत्तरवाहिनी गंगा में स्नान कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इसके बाद कांवड़ में गंगाजल भरकर बाबा बैद्यनाथ धाम, देवघर के लिए अपनी पैदल यात्रा शुरू की।
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105 किलोमीटर की कठिन यात्रा पर निकले श्रद्धालु
कांवड़िए करीब 105 किलोमीटर की पैदल यात्रा कर देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम पहुंचेंगे, जहां वे भगवान शिव का जलाभिषेक करेंगे। कोई परिवार के साथ, कोई दोस्तों के समूह में तो कोई अकेले "बोल बम" का जयघोष करते हुए बाबा धाम की ओर बढ़ता नजर आया। श्रद्धा, भक्ति और उत्साह का ऐसा संगम देखने को मिला कि पूरा सुल्तानगंज शिवमय हो गया।
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भगवा रंग में रंगा कांवड़िया पथ
कच्ची कांवड़िया पथ पर आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। दूर-दूर तक भगवा वस्त्र पहने श्रद्धालु, हाथों में कांवड़ लिए बाबा धाम की ओर बढ़ते दिखाई दिए। पूरे मार्ग पर "बोल बम", "बम-बम भोले" और "हर-हर महादेव" के जयघोष लगातार गूंजते रहे। श्रद्धालुओं के उत्साह और ऊर्जा ने पूरे वातावरण को भक्तिमय बना दिया।
सेवा शिविरों में मिल रही हर जरूरी सुविधा
कांवड़िया पथ पर जगह-जगह स्वयंसेवी संस्थाओं की ओर से सेवा शिविर लगाए गए हैं। इन शिविरों में श्रद्धालुओं के लिए शुद्ध पेयजल, शरबत, भोजन, विश्राम और प्राथमिक चिकित्सा की व्यवस्था की गई है। इससे लंबी यात्रा करने वाले कांवड़ियों को काफी राहत मिल रही है।
प्रशासन की व्यापक तैयारियां
श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा को लेकर जिला प्रशासन ने इस बार व्यापक इंतजाम किए हैं। नमामि गंगे घाट से लेकर पूरे कांवड़िया पथ तक पुलिस बल, दंडाधिकारी और स्वयंसेवकों की तैनाती की गई है। इसके अलावा चिकित्सा शिविर, एंबुलेंस, पेयजल, मोबाइल शौचालय, कंट्रोल रूम, हेल्प डेस्क और सीसीटीवी निगरानी की व्यवस्था भी की गई है। प्रशासन लगातार पूरे मार्ग की निगरानी कर रहा है ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
श्रद्धालुओं ने व्यवस्थाओं की सराहना की
श्रद्धालुओं का कहना है कि इस वर्ष की व्यवस्थाएं पिछले वर्षों की तुलना में अधिक बेहतर हैं। उन्हें यात्रा के दौरान किसी बड़ी परेशानी का सामना नहीं करना पड़ रहा है। देश के विभिन्न राज्यों के अलावा नेपाल और भूटान से आए श्रद्धालुओं ने भी भागलपुर जिला प्रशासन और राज्य सरकार की ओर से की गई व्यवस्थाओं की सराहना की। उन्होंने कहा कि सुरक्षा, पेयजल, चिकित्सा और अन्य सुविधाओं ने यात्रा को पहले से अधिक सुगम और सुरक्षित बना दिया है।
शिवभक्ति में डूबा सुल्तानगंज
श्रावणी मेले की शुरुआत के साथ ही सुल्तानगंज पूरी तरह शिवभक्ति में सराबोर हो गया है। गंगा घाट से लेकर कांवड़िया पथ तक हर ओर भगवा रंग, कांवड़ और "बोल बम" के जयघोष सुनाई दे रहे हैं। आस्था, विश्वास और भक्ति का यह अद्भुत संगम एक बार फिर साबित कर रहा है कि श्रावणी मेला केवल धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का सबसे बड़ा पर्व है।