Bihar News: एनडीए में सांसद और पूर्व विधायक के बीच खींचतान की भेंट चढ़े SDM, नीतीश सरकार ने कर दिया ट्रांसफर
बिहार में हाल ही में हुए 51 अधिकारियों के तबादले में एक एसडीएम को मात्र आठ महीने में पद से हटाकर जिला पंचायती राज पदाधिकारी बनाया गया। इस तबादले को लेकर राजनीतिक खींचतान और अंदरूनी सियासी समीकरणों की चर्चाएं तेज हैं।
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बिहार में हाल ही में 51 प्रशासनिक अधिकारियों के तबादले किए गए, जिसमें एक ऐसा नाम भी शामिल रहा जो महज आठ महीने पहले ही अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीएम) बने थे। उन्हें एसडीएम पद से हटाकर जिला पंचायती राज पदाधिकारी के रूप में स्थानांतरित कर दिया गया। इस तबादले को लेकर राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
सूत्रों के अनुसार, यह मामला सांसद और पूर्व विधायक के बीच चली आ रही राजनीतिक खींचतान से जुड़ा बताया जा रहा है। कहानी की शुरुआत बीते वर्ष बिहार विधानसभा चुनाव से ठीक पहले की बताई जाती है, जब तत्कालीन सत्ताधारी विधायक ने अपनी ही पार्टी के एक अन्य विधायक की सिफारिश पर अपने उपजाति के एक अधिकारी को अपने क्षेत्र में एसडीएम के रूप में पदस्थ कराया था।
हालांकि, पदभार संभालने के बाद एसडीएम ने कथित तौर पर स्थानीय विधायक की अपेक्षा सत्ताधारी पार्टी के सांसद और विपक्ष के एक पूर्व विधायक को अधिक महत्व देना शुरू कर दिया। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा रही कि एसडीएम सांसद के इशारों पर विपक्ष के पूर्व विधायक को तरजीह दे रहे थे, जबकि सांसद और तत्कालीन विधायक के बीच राजनीतिक संबंध अच्छे नहीं बताए जाते थे। यह स्थिति तत्कालीन विधायक को नागवार गुजरी।
बताया जाता है कि विधायक ने कई बार एसडीएम को समझाने का प्रयास किया, लेकिन कोई खास असर नहीं हुआ। समय के साथ विधानसभा चुनाव हुए और तत्कालीन विधायक चुनाव हारकर पूर्व विधायक बन गए। वहीं, कुछ लोगों का यह भी कहना है कि इस राजनीतिक समीकरण में सत्ताधारी सांसद ने भी अंदरखाने विपक्ष को मदद पहुंचाई।
उपमुख्यमंत्री सह गृह मंत्री से करीबी बताई जाती है
चुनाव के बाद एसडीएम को यह आभास हुआ कि अब क्षेत्र के वर्तमान विधायक और सांसद दोनों उनके पक्ष में हैं, लेकिन वे यह नहीं समझ पाए कि विपक्ष के जो पूर्व विधायक हैं, राज्य में उनकी ही सरकार बनी है और उनकी सूबे के उपमुख्यमंत्री सह गृह मंत्री से करीबी बताई जाती है।
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हालांकि, चुनाव के बाद कुछ समय तक सब कुछ सामान्य दिखा, लेकिन पूर्व विधायक कथित रूप से एसडीएम की भूमिका से असंतुष्ट थे। इसी पृष्ठभूमि में हालिया तबादला सूची में महज आठ महीने पहले बने एसडीएम का स्थानांतरण कर दिया गया।
तबादले के बाद राजनीतिक समर्थकों के बीच तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। पूर्व विधायक के समर्थक इसे राजनीतिक जीत बता रहे हैं, जबकि कुछ लोग इसे “जैसी करनी, वैसी भरनी” जैसी कहावतों से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, तबादले को लेकर प्रशासनिक स्तर पर इसे नियमित प्रक्रिया बताया जा रहा है।
