Bihar: ‘हर थाली में बिहार की तरकारी’ से लेकर शुगर कॉम्प्लेक्स तक, सहकारिता मंत्री ने किन योजनाएं पर की बात?
Bihar News: सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि किसानों, युवाओं, महिलाओं और ग्रामीण उद्यमियों को सहकारिता से जोड़कर बिहार की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। हमलोगों का लक्ष्य सहकारिता को केवल कृषि तक सीमित न रखकर रोजगार, कारोबार और ग्रामीण विकास का बड़ा माध्यम बनाना है।
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बिहार में ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और रोजगार के नए अवसर पैदा करने के लिए सहकारिता विभाग ने कई योजनाओं को गति देने का फैसला किया है। सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव ने बुधवार को सूचना भवन में प्रेस वार्ता कर विभाग की योजनाओं और उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सात निश्चय-3 के तहत ‘समृद्ध उद्योग-सशक्त बिहार’ की परिकल्पना को जमीन पर उतारने के लिए बंद चीनी मिलों को फिर से चालू करने की दिशा में काम किया जा रहा है। मंत्री ने बताया कि मधुबनी के सकरी में बंद पड़ी चीनी मिल की जमीन पर नई सहकारी चीनी मिल स्थापित की जाएगी। वहीं दरभंगा के रैयाम में आदर्श शुगर कॉम्प्लेक्स विकसित किया जाएगा। दोनों परियोजनाओं की स्थापना और संचालन इंडिया पोटाश लिमिटेड के माध्यम से किया जाएगा। इन परियोजनाओं में केवल चीनी मिल ही नहीं होगी, बल्कि पावर जनरेशन प्लांट, डिस्टलरी और कंप्रेस्ड बायोगैस संयंत्र भी स्थापित किए जाएंगे।
10 से 15 हजार किसानों ने किया आवेदन
मंत्री रामकृपाल यादव ने कहा कि गन्ना उत्पादक किसानों को जोड़कर सहकारी चीनी मिल समिति का गठन किया जा रहा है। इसके लिए पारदर्शी प्रक्रिया के तहत पोर्टल तैयार कर किसानों से आवेदन मांगे गए हैं। अब तक 10 हजार से 15 हजार किसानों ने आवेदन किया है। उन्होंने कहा कि सहकारिता विभाग का मुख्य लक्ष्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है। इसके लिए कृषि, रोजगार और ग्रामीण कारोबार से जुड़ी योजनाओं पर तेजी से काम किया जा रहा है।
गैर-पारंपरिक क्षेत्रों में भी बनेगी समितियां
मंत्री ने बताया कि बिहार में सहकारिता आंदोलन को आधुनिक और नवाचार आधारित बनाने के लिए बिहार राज्य सहकारिता नीति-2026 लागू की गई है। इसके तहत सहकारी संस्थाओं को आधुनिक तकनीक, डिजिटल नवाचार, पारदर्शी प्रशासन और बेहतर प्रबंधन प्रणाली से मजबूत किया जाएगा। नई नीति के तहत अब गैर-पारंपरिक क्षेत्रों में भी नई सहकारी समितियों के गठन और विस्तार को प्रोत्साहित किया जाएगा। युवाओं, महिलाओं, किसानों, उद्यमियों और वंचित समुदायों को सहकारिता आंदोलन से जोड़कर आत्मनिर्भरता और उद्यमिता को बढ़ावा देने की तैयारी है।
सुधा बूथ की तर्ज पर खुलेंगे ‘तरकारी बूथ’
मंत्री ने बताया कि राज्य में सब्जी उत्पादन और किसानों की उपज को बाजार उपलब्ध कराने के लिए 350 पंचायतों में सब्जी संग्रहण केंद्र विकसित किए जाएंगे। इसके अलावा 50 प्रखंडों में आधारभूत संरचना तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य ‘हर थाली में बिहार की तरकारी’ पहुंचाना है। इसके लिए किसानों को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहित किया जा रहा है। जल्द ही सुधा डेयरी बूथ की तर्ज पर वेजफेड के माध्यम से ‘तरकारी बूथ’ खोले जाएंगे। इससे किसानों को स्थानीय बाजार मिलेगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
रबी सीजन से फसल बीमा का लाभ
रामकृपाल यादव ने बताया कि राज्य में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को वित्तीय वर्ष 2026-27 के रबी मौसम से लागू करने की स्वीकृति दी गई है। इसके तहत किसानों को कृषि लागत के समतुल्य क्षतिपूर्ति राशि उपलब्ध कराने का प्रावधान होगा। किसानों को कम प्रीमियम देना होगा, जबकि प्रीमियम में केंद्र और राज्य सरकार भी अपना हिस्सा देंगी।
36 समितियों में बन रहे बड़े गोदाम
खरीफ विपणन मौसम 2025-26 में राज्य में 36.85 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य रखा गया था। इसके मुकाबले 6,902 समितियों के माध्यम से 5.40 लाख किसानों से 36.79 लाख मीट्रिक टन धान की अधिप्राप्ति की गई।मंत्री ने कहा कि खरीदे गए धान के बदले राज्य खाद्य निगम को 24.57 लाख मीट्रिक टन यानी 98.47 प्रतिशत चावल की आपूर्ति की जा चुकी है। राज्य की सहकारी समितियों में अब तक 7,452 गोदामों का निर्माण पूरा किया जा चुका है। इनसे करीब 18.827 लाख मीट्रिक टन भंडारण क्षमता तैयार हुई है। इससे किसानों की उपज के सुरक्षित भंडारण में मदद मिलने की उम्मीद है। विश्व की सबसे बड़ी अन्न भंडारण योजना के तहत राज्य की 36 समितियों में 1,000, 2,000 और 2,500 मीट्रिक टन क्षमता वाले गोदाम बनाए जा रहे हैं। इससे ग्रामीण स्तर पर अनाज भंडारण की क्षमता और मजबूत होगी।
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186 दुग्ध समितियां और 618 पैक्स बने बैंक मित्र
ग्रामीण इलाकों में बैंकिंग सुविधाओं के विस्तार के लिए 186 दुग्ध सहकारी समितियों, 618 पैक्स, 19 प्राथमिक सब्जी उत्पादक सहकारी समितियों और सात अन्य सहकारी समितियों को बैंक मित्र के रूप में विकसित किया गया है। इन समितियों के जरिए माइक्रो-एटीएम की मदद से ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। 16 अगस्त 2026 से एक महीने का विशेष अभियान चलाकर दुग्ध समितियों, पैक्स, पीवीसीएस, अन्य सहकारी समितियों और उनके सदस्यों के बैंक खाते खोले जाएंगे। पैक्सों में व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ाने के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में करीब 300 तरह की सेवाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इसके तहत लगभग 6,425 पैक्स में कॉमन सर्विस सेंटर स्थापित किए गए हैं। इनमें 5,807 समितियां सक्रिय हैं और पैक्स के माध्यम से अब तक 8.81 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार किया जा चुका है।
373 पैक्स में जन औषधि केंद्र की मंजूरी
जन औषधि केंद्र योजना के तहत चयनित 461 पैक्स में से 373 में केंद्र स्थापित करने की मंजूरी दी गई है। इनमें 37 पैक्स को औषधि अनुज्ञप्ति और 36 को स्टोर कोड मिल चुका है। वहीं 36 पैक्स में जन औषधि केंद्र का संचालन शुरू हो गया है। राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम के सहयोग से 21 जिलों की 100 चयनित पंचायतों में 100 किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) गठित किए गए हैं। इनका उद्देश्य किसानों को बाजार से जोड़ना, उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाना और कृषि इनपुट उपलब्ध कराना है। इनमें से 50 एफपीओ ने व्यावसायिक गतिविधियां शुरू कर दी हैं।