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Census 2027: बिहार में अजूबा आदेश; शिक्षक पढ़ाएं कि 10 किलोमीटर दूर जाकर जनगणना करें?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना Published by: प्रशांत तिवारी Updated Thu, 14 May 2026 12:39 PM IST
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सार

Bihar News: जनगणना 2027 को लेकर बिहार में अजीब ऊहापोह की स्थिति है। कभी महिला शिक्षकों को 10 किलोमीटर दूर भेजा जा रहा, कभी स्कूल टाइम तो अब उसके बाद मकान गणना में लगाने का आदेश आया है।

bizarre order in Bihar Should teachers teach or go 10 kilometers away to conduct Census 2027
सांकेतिक - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

बिहार में जनगणना 2027 को लेकर अजीब ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। कभी महिला शिक्षकों को 10 किलोमीटर दूर ड्यूटी पर भेजा जा रहा है, तो कभी स्कूल समय के बाद मकान गणना कराने का आदेश जारी हो रहा है। जातीय जनगणना 2027 के तहत मकान गणना शुरू होने से पहले ही कई तरह की अव्यवस्थाएं सामने आने लगी हैं। इस कार्य में लगे बिहार सरकार के विभिन्न विभागों के अधिकारी जिस तरह से जनगणना कार्य को संपन्न कराने में जुटे हैं, उससे प्रगणकों के साथ-साथ आम लोगों में भी संशय की स्थिति बनी हुई है। खासकर शिक्षकों को लेकर जारी हो रहे आदेशों ने नई बहस छेड़ दी है। शिक्षक संघ भी शिक्षकों को जनगणना कार्य में लगाने का विरोध कर रहा है। फिलहाल इससे जुड़ी कई गड़बड़ियां सामने आ रही हैं।

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स्कूल में पढ़ाने के बाद 10 किलोमीटर दूर कैसे जाएं शिक्षिकाएं?
जनगणना कार्य में महिला शिक्षिकाओं की भी ड्यूटी लगाई गई है। पटना के फुलवारी शरीफ समेत कई इलाकों में महिला शिक्षिकाओं को उनके आवास या स्कूल से 8 से 10 किलोमीटर दूर क्षेत्रों में तैनात किया गया है, जिन्हें वे ठीक से जानती तक नहीं हैं। इसका असर कार्य की गुणवत्ता पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है। स्थानीय लोगों का अपेक्षित सहयोग नहीं मिलने से शिक्षिकाओं को परेशानी हो रही है। शिक्षकों का कहना है कि गलत नीति के तहत दूर-दराज क्षेत्रों में भेजे जाने से ईंधन की अनावश्यक बर्बादी हो रही है, जबकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर बिहार सरकार के मंत्री सम्राट चौधरी तक डीजल-पेट्रोल की बचत पर जोर देते रहे हैं। ऐसी स्थिति सिर्फ पटना ही नहीं, बल्कि कई अन्य जिलों में भी देखने को मिल रही है।
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श्रम कानून दरकिनार, स्कूल के बाद कैसे करें जनगणना कार्य?
पटना के जिला शिक्षा पदाधिकारी ने 2 मई को जारी पत्र में कहा था कि जिन शिक्षक-शिक्षिकाओं की ड्यूटी जनगणना कार्य में लगाई गई है, वे स्कूल और जनगणना कार्य में समन्वय स्थापित करते हुए दोनों कार्य करें। यानी पहले स्कूल की ड्यूटी पूरी करें और उसके बाद जनगणना कार्य करें। इसके पीछे तर्क दिया गया कि जनगणना कार्य के लिए अलग से मानदेय दिया जा रहा है। पटना के बाद अन्य जिलों में भी इसी तरह के आदेश जारी किए गए। सवाल उठ रहा है कि क्या किसी कर्मचारी से 8 घंटे की जगह 16 घंटे तक काम लेना श्रम कानून का उल्लंघन नहीं है? हालांकि बाद में 4 मई को यह आदेश वापस ले लिया गया, लेकिन 13 मई को शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव डॉ. बी. राजेंद्र की ओर से फिर आदेश जारी किया गया। इसमें कहा गया कि प्रगणक और पर्यवेक्षक के रूप में प्रतिनियुक्त शिक्षक विद्यालय में अध्यापन कार्य संपन्न करने के साथ-साथ विद्यालय अवधि से पहले अथवा बाद में जनगणना संबंधी क्षेत्र कार्य करेंगे। यानी शिक्षकों को पहले पढ़ाने और फिर मकान गणना करने के लिए कहा गया है। इससे उन शिक्षकों को ज्यादा परेशानी हो रही है, जिनकी कक्षाएं अधिक होती हैं या जिनका स्कूल प्रबंधन से तालमेल ठीक नहीं है।

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मॉर्निंग स्कूल के बाद दोपहर में घरों में कौन मिलेगा?
आज के समय में अधिकांश परिवारों के सदस्य नौकरी या अन्य कामकाज में व्यस्त रहते हैं। ऐसे में जब शिक्षक-शिक्षिकाएं स्कूल की ड्यूटी समाप्त होने के बाद दोपहर में जनगणना कार्य के लिए घर-घर जाएंगे, तो उन्हें घरों में लोग मिलना मुश्किल होगा। जनगणना कार्य के लिए सुबह 7 बजे से दोपहर 12 बजे तक का समय सबसे उपयुक्त माना जा रहा है, लेकिन इसी समय शिक्षकों को स्कूल में उपस्थित रहने को कहा गया है। दूसरी ओर, सुबह साढ़े छह बजे से पहले भी जनगणना कार्य व्यावहारिक रूप से संभव नहीं है। ऐसे में शिक्षक इस व्यवस्था को अव्यावहारिक बता रहे हैं।

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