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NEET Student Case: रिपेयरिंग शॉप नहीं, पान की दुकान से मिला नीट छात्रा के भाई का मोबाइल; अब CBI भी हैरान

न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, पटना / जहानाबाद Published by: कृष्ण बल्लभ नारायण Updated Wed, 18 Feb 2026 05:00 AM IST
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सार

Bihar : नीट छात्रा की मौत के मामले में भले ही बिहार पुलिस कुछ नहीं कर सकी, लेकिन खुलासा के लिए CBI ने अपनी पूरी ताकत जरुर झोंक दी है। CBI मोबाइल में छिपे आंकड़ों को साक्ष्य के रूप में जुटाने में लगी है। इसलिए मोबाइल की यह कहानी आपको भी जानना जरुरी है।

CBI team received Mobile in paan shop not a repairing shop jahanabad bihar police NEET student murder case
इसी दुकान से मिला था मोबाइल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

नीट छात्रा की संदिग्ध मौत के मामले में रोज अलग-अलग बातें सामने आ रही हैं। फिलहाल आज बात मोबाइल की हुई है, जो खुद अपने आप में न सिर्फ हैरान कर रही है, बल्कि कई सवाल भी खड़े कर रही हैं। मामले की जांच के लिए सीबीआई की टीम के जहानाबाद पहुंचते ही सबसे पहले मृतका की मां और भाई के मोबाइल की मांग की गई थी। दोनों ने बताया कि मोबाइल टूट गया है जिसकी मरम्मती करने के लिए मोबाइल रिपेयरिंग दुकान पर भेजी गई है। पहले दिन की पूछताछ के दौरान सीबीआई ने माता-पिता और भाई से अलग-अलग घंटों बात की और फिर मोबाइल को पटना सीबीआई कार्यालय भेज देने का निर्देश देकर टीम वापस पटना लौट गई।

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सोमवार को फिर सीबीआई ने फोन कर के मोबाइल की मांग की। इधर से मृतका का भाई सीबीआई से बात कर रहा था। बताया जाता है कि सीबीआई ने फोन कर मृतका के भाई को मोबाइल पटना के सीबीआई कार्यालय में पहुंचाने की बात कही। इसके जवाब में भाई ने कहा कि मुझे नहीं पता कि आप सीबीआई से बोल रहे हैं या कोई और। इसलिए मैं मोबाइल लेकर पटना नहीं आ सकता। इसके बाद सीबीआई की टीम आज दुबारा जहानाबाद स्थित उसके घर पर पहुंची और भाई से मोबाइल की मांग की। भाई ने आज भी वही बात दुहराई कि मोबाइल रिपेयरिंग होने भेजा गया है।
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मोबाइल पान दुकान से मिलने का क्या लॉजिक है?
आज सीबीआई की टीम ने पूछा कि मोबाइल कहां बनने दिए हो? पहले कुछ देर तक उसने टीम को बरगलाने की कोशिश की, लेकिन वह बिहार पुलिस की तरह सीबीआई को बरगला नहीं सका। उसने कहा कि मकदुमपुर में मोबाइल रिपेयरिंग करने दिया गया हैं, वहां से लाकर दे देंगे। टीम ने कहा- नहीं, गाड़ी में बैठो और चलो। मजबूर होकर भाई को गाड़ी में बैठना पड़ा। सीबीआई की टीम को रास्ता बताते हुए उसने जहां गाड़ी रुकवाई, वहां मोबाइल रिपेयरिंग की कोई दुकान नहीं थी। फिर वह एक पान की दुकान पर गया और पान दुकानदार से मोबाइल लेकर सीबीआई को सौंप दिया। मोबाइल कब्जा में लेते ही सीबीआई ने पान दुकानदार से पूछा कि तुम्हारे पास मोबाइल कैसे आया और तुमको यह किसने दिया? जवाब था कि आपके आने के कुछ देर पहले एक लड़का मोबाइल दे गया। मोबाइल देने वाले ने यह कहकर मुझे मोबाइल दिया कि जल्दी जाकर मोबाइल उस दुकान पर दे दो। यहां दो सवाल रह गए कि जब भाई सीबीआई के कब्जे में था तो मोबाइल रिपेयरिंग दुकान से पान दुकानदार तक भेजने की सूचना किसने और कैसे दी? और दूसरा सवाल यह कि मोबाइल की मरम्मती रिपेयरिंग की दूकान पर होती है न कि पान के दुकान पर, फिर मोबाइल पान दुकान से मिलने का क्या लॉजिक है? हालांकि यह सीबीआई की जांच के दायरे का चीज है।
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एक साथ बैठाकर काफी देर पूछताछ की
मोबाइल लेने के बाद सीबीआई की टीम लड़की के भाई को वापस गांव ले गई, जहां लगभग तीन घंटों तक अलग-अलग और फिर परिवार के सभी सदस्यों को एक साथ बैठाकर काफी देर पूछताछ की। सीबीआई ने आज क्या पूछताछ की, इसका जवाब परिजनों ने नहीं दिया, सिर्फ इतना कहते रहे कि जो सवाल पहले किए गए थे, वही सवाल आज भी दुहरा रहे थे। अब बात चाहे जो भी हो लेकिन एक बात बिलकुल स्पष्ट दिखने लगी है कि सीबीआई जांच और निष्कर्ष के रास्ते में बहुत तेजी से आगे बढ़ती दिख रही है। 

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