Gas Shortage : कागजों पर सिलेंडर, घर में चूल्हा बंद; गैस की किल्लत नहीं अब नई परेशानी करने लगी है परेशान
Bihar : बिहार में सिलिंडर लेकर लंबी-लंबी पक्तियां अब नहीं दिख रही हैं, क्यों कि अब गैस की उपलब्धता आसान होने लगी है। लेकिन साथ ही एक नई समस्या तेजी से बढ़ रही है। उस समस्या का नाम है- फेक डिलीवरी मैसेज। अब इसका भी समाधान होगा।
विस्तार
एलपीजी की किल्लत से बिहार भी परेशान रहा। हालांकि अब गैस की किल्लत पर बहुत हद तक नियंत्रण होने लगा है, जिससे लोग राहत की सांस लेने लगे हैं। लेकिन डिजिटल इंडिया के दौर में गैस आपूर्ति में एक नई परेशानी दिखने लगी है। परेशानी गैस की किल्लत का नहीं बल्कि फेक डिलीवरी मैसेज से होने लगा है। ऐसी शिकायत एक दो नहीं बल्कि महिला समेत कई लोगों ने किया। हालांकि अच्छी बात यह रही कि 'अमर उजाला' के पहल पर कई लोगों की वह परेशानी तत्कालीन दूर भी हो गई।
फेक डिलीवरी मैसेज के संबंध में ग्राहकों का कहना है कि बिना सिलेंडर घर पहुँचे ही उनके मोबाइल पर डिलीवरी सक्सेसफुल का मैसेज आ गया और जब असलियत में गैस खत्म होती है, तो गैस एजेंसी के द्वारा नियम का हवाला देकर नया सिलेंडर देने से मना कर दिया जाता है। इस तरह की कई कहानियां सामने आई।
केस 1: ज्योति कुमारी की आपबीती
गैस एजेंसी आई ज्योति देवी ने बताया कि उन्होंने आखिरी बार दिसंबर के महीने में सिलेंडर लिया था। लेकिन उनके पैरों तले जमीन तब खिसक गई जब 23 फरवरी को उनके मोबाइल पर मैसेज आया कि उनका सिलेंडर डिलीवर हो चुका है। इस संबंध में पूछे जाने पर ज्योति देवी ने बताया कि जब मेरा सिलेंडर खत्म हुआ और मैं दोबारा बुकिंग कराने पहुँची, तो गैस एजेंसी के द्वारा यह बताया गया कि उन्होंने तो अभी पिछले महीने ही सिलेंडर लिया है। नियम के मुताबिक, निर्धारित समय सीमा से पहले मुझे दूसरा सिलेंडर नहीं मिल सकता। अब सवाल यह है कि जब सिलेंडर घर आया ही नहीं, तो मैसेज कैसे आया?
केस 2: मालती देवी का इंतजार
ऐसी ही स्थिति फुलवारी शरीफ की मालती देवी की भी है। उनका कहना है कि उन्होंने 11 जनवरी को अपना सिलेंडर बुक कराया था, लेकिन वह भी इसी गड़बड़झाले का शिकार हो गई। उनका कहना है कि 1 मार्च को उनका गैस उन्हें मिल चुका है। अब आप 25 दिन के बाद गैस लीजियेगा, क्यों कि एजेंसी के रिकॉर्ड में डिलीवरी दिख रहा है, पर हकीकत में उनको गैस मिला ही नहीं है।
केस 3: शिवम् कुमार की कहानी
इस संबंध में शिवम् कुमार का कहना है कि उन्होंने 8 मार्च को अपना गैस बुक किया था। दो दिनों के बाद यानी 10 मार्च को एक मैसेज आया कि उनका गैस उनके घर पर पहुंच गया। साथ ही यह भी लिखा है कि उस गैस का भुगतान भी हो गया, जबकि ग्राहक के घर तक उनका सिलिंडर आया ही नहीं। अब एजेंसी के चक्कर लगा रहे हैं। हालांकि अमर उजाला ने प्रबंधक से शिकायत की, नतीजतन प्रबंधक ने उन ग्राहकों को तत्काल गैस देने की सहमति दी।
गड़बड़ कहां और कैसे?
इस संबंध में लोगों का आरोप है कि अक्सर गैस एजेंसियों के हॉकर या बिचौलिए अपने टारगेट को पूरा करने या ब्लैक मार्केटिंग के चक्कर में उपभोक्ताओं के नाम पर फर्जी डिलीवरी चढ़ा देते हैं। इससे दो नुकसान होते हैं। दरअसल दो सिलेंडरों के बीच 25 दिन का अंतर होना अनिवार्य है। फर्जी मैसेज के कारण उपभोक्ता का वह गैप बढ़ जाता है और वह चाहकर भी वाजिब बुकिंग नहीं कर पाते हैं और दूसरा नुकसान यह है कि कागजों पर डिलीवरी होने से सब्सिडी भी उसी फर्जी ट्रांजैक्शन के खाते में चली जाती है।
उपभोक्ता ऐसे करें इस समस्या का समाधान
इस संबंध में पटना के डीएम का कहना है कि अगर आप भी इस तरह इस समस्या से जूझ रहे हैं, तो तुरंत संबंधित गैस कंपनी के टोल-फ्री नंबर पर फेक डिलीवरी की शिकायत करें। इसके बाद गैस एजेंसी के मैनेजर को लिखित में आवेदन दें और पावती लें। गैस एजेंसी के मैनेजर अगर आपकी शिकायत पर समस्याओं का समाधान न करें तो तुरंत जिला आपूर्ति अधिकारी से संपर्क कर उनसे लिखित शिकायत करें।