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लालू के ट्रैक पर सीएम नीतीश कुमार, बोले- जाति आधारित जनगणना जरूरी, जदयू नेता ने दिया विवादित बयान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पटना
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Wed, 17 Feb 2021 10:35 PM IST
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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार
- फोटो : ANI
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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बुधवार को लालू यादव की मांग को आगे करते हुए कहा कि एक बार राज्य में जाति आधारित जनगणना की जानी चाहिए। इससे इस बात की यह जानकारी मिलेगी कि किस जाति के कितने लोग हैं और उनके लिए क्या करना चाहिए, इसके बारे में निर्णय लेना आसान होगा।
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नीतीश कुमार ने कहा कि अब तो आर्थिक आधार पर भी आरक्षण का प्रावधान कर दिया गया है। मेरे हिसाब से ऐसा कुछ नहीं है कि आरक्षण का प्रावधान है और उसमें कोई बदलाव नहीं होगा। हमारे यहां पिछड़ा वर्ग और अति पिछड़ा वर्ग को जननायक कर्पूरी ठाकुर के समय आरक्षण मिल रहा है। हम चाहते हैं कि केंद्र सरकार से भी ये हो जाए। किसी को वंचित करने की बात नहीं होनी चाहिए।
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उन्होंने कहा कि हम बार-बार विधानसभा से प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेज चुके हैं कि एक बार जाति आधार पर जनगणना की जानी चाहिए। आजादी के पहले ही ये बंद हो गया. ऐसा हो जाने से कम से कम एक-एक चीज की सही जानकारी मिल जाएगी। किस जाति के कितने लोग हैं, उनके लिए क्या करना चाहिए, ये तय करना आसान हो जाएगा।
आरक्षण पर डॉ अजय आलोक ने दिया था विवादित बयान
हालांकि उन्हीं के पार्टी के नेता डॉ अजय आलोक ने इसके उलट एक ट्वीट करते हुए कहा कि संशोधन कर नियम ये बनाना चाहिए की एक बार अगर आरक्षण के लाभ से अगर पढ़ाई आगे नौकरी मिल गई हो तो उस व्यक्ति की अगली पीढ़ी को आरक्षण नहीं मिलना चाहिए तभी इन जातियों के बड़े वर्ग को लाभ मिल सकेगा , कुछ परिवारों की पकड़ से आरक्षण को छुड़ाना ज़रूरी हैं।
कोई नहीं छीन सकता आरक्षण : श्याम रजक
आरजेडी के वरिष्ठ नेता श्याम रजक ने कहा कि आरक्षण किसी ने भीख या दान में नहीं दिया है। यह संवैधानिक व्यवस्था है। इसे कोई छीन नहीं सकता है। नीतीश कुमार को स्पष्ट करना चाहिए कि इस मुद्दे पर उनका क्या विचार है। अगर असहमत हैं, तो अपने बड़बोले नेताओं पर कार्रवाई करें।
लालू यादव भी उठा चुके हैं मांग
आरजेडी नेता लालू प्रसाद ने भी जातिगत जनगणना की मांग उठाते हुए कहा था कि आखिर इसमें क्या दिक्कत है। उन्होंने वर्ष 2019 में ट्वीट करते हुए कहा था कि एनपीआर, एनआरसी और 2021 की भारतीय जनगणना पर लाखों करोड़ खर्च होंगे। सुना है एनपीआर में अनेकों अलग-अलग कॉलम जोड़ रहे हैं, लेकिन इसमें जातिगत जनगणना का एक कॉलम और जोड़ने में क्या दिक्कत है? क्या 5000 से अधिक जातियों वाले 60 प्रतिशत अनगिनत पिछड़े-अतिपिछड़े हिंदू नहीं है, जो आप उनकी गणना नहीं चाहते?"