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Bihar: 'सीमा से 10 किमी के दायरे में अवैध निर्माण होंगे ध्वस्त', अमित शाह बोले- घुसपैठियों को बाहर किया जाएगा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अररिया
Published by: पूर्णिया ब्यूरो
Updated Thu, 26 Feb 2026 10:04 PM IST
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सार
केंद्रीय गृह और सहकारिता मंत्री अमित शाह ने अररिया के सिकटी एसएसबी कैंप में भारत-नेपाल सीमा से सटे सीमांचल इलाके में राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर कड़ा संदेश दिया। उन्होंने सीमा से 10 किलोमीटर के दायरे में सभी अवैध निर्माणों को चिन्हित कर ध्वस्त करने और घुसपैठियों को चुन-चुनकर बाहर निकालने की कार्रवाई तेज करने का ऐलान किया।
केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
भारत-नेपाल सीमा से सटे सीमांचल इलाके में केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर कड़ा संदेश दिया है। अररिया के सिकटी स्थित लेटी एसएसबी कैंप में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने साफ कहा कि सीमा से 10 किलोमीटर के दायरे में मौजूद सभी अवैध निर्माणों को चिन्हित कर ध्वस्त किया जाएगा। साथ ही घुसपैठियों की पहचान कर उन्हें चुन-चुनकर बाहर निकालने की कार्रवाई तेज की जाएगी।
विकास योजनाओं का लोकार्पण
करीब 170 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं के लोकार्पण और भूमि-पूजन के मौके पर शाह ने कहा कि बिना बाड़ वाली खुली भारत-नेपाल सीमा सुरक्षा के लिहाज से बड़ी चुनौती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि केवल कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर कठोर कदम उठाए जाएं। शाह ने कहा कि घुसपैठ देश की सुरक्षा, संसाधनों और स्थानीय नागरिकों के अधिकारों पर सीधा प्रहार है।
जनसांख्यिकीय बदलाव पर हाई-लेवल कमेटी
पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड में जनसांख्यिकीय बदलाव पर चिंता जताते हुए गृह मंत्री ने केंद्र और राज्यों के विभिन्न मंत्रालयों की संयुक्त उच्च स्तरीय समिति गठित करने की घोषणा की। यह समिति घुसपैठ, अवैध निर्माण और सीमा पार गतिविधियों पर समन्वित रणनीति तैयार करेगी।
सीमा अवसंरचना और विकास की रफ्तार
अमित शाह ने सरकार की प्राथमिकताओं का उल्लेख करते हुए बताया कि 532 किमी लंबी इंडो-नेपाल बॉर्डर रोड के 18 में से 14 खंड पूरे हो चुके हैं, जबकि शेष पर काम तेजी से जारी है। सीमावर्ती इलाकों में स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास सुविधाओं का विस्तार भी हो रहा है, ताकि सुरक्षा बलों और स्थानीय आबादी दोनों को लाभ मिल सके।
‘मैराथन’ सुरक्षा समीक्षा
कार्यक्रम के बाद अररिया समाहरणालय में सात सीमावर्ती जिलों के डीएम और एसपी के साथ उच्च स्तरीय बैठक हुई। गृह मंत्रालय, आईबी और एसएसबी के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में अवैध निर्माण, खुफिया तंत्र सुदृढ़ीकरण और नशीली दवाओं की तस्करी पर विशेष कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए गए। अमित शाह ने प्रधानमंत्री के ‘वाइब्रेंट विलेज’ विजन का हवाला देते हुए कहा कि विकास और सुरक्षा साथ-साथ चलेंगे। सीमांत गांवों को सशक्त बनाकर ही घुसपैठ और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों पर स्थायी अंकुश लगाया जा सकता है। सीमांचल से दिया गया यह कड़ा संदेश अब राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बनता दिख रहा है।
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विकास योजनाओं का लोकार्पण
करीब 170 करोड़ रुपये की विकास योजनाओं के लोकार्पण और भूमि-पूजन के मौके पर शाह ने कहा कि बिना बाड़ वाली खुली भारत-नेपाल सीमा सुरक्षा के लिहाज से बड़ी चुनौती है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि केवल कागजी कार्रवाई से काम नहीं चलेगा, बल्कि जमीनी स्तर पर कठोर कदम उठाए जाएं। शाह ने कहा कि घुसपैठ देश की सुरक्षा, संसाधनों और स्थानीय नागरिकों के अधिकारों पर सीधा प्रहार है।
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जनसांख्यिकीय बदलाव पर हाई-लेवल कमेटी
पश्चिम बंगाल, बिहार और झारखंड में जनसांख्यिकीय बदलाव पर चिंता जताते हुए गृह मंत्री ने केंद्र और राज्यों के विभिन्न मंत्रालयों की संयुक्त उच्च स्तरीय समिति गठित करने की घोषणा की। यह समिति घुसपैठ, अवैध निर्माण और सीमा पार गतिविधियों पर समन्वित रणनीति तैयार करेगी।
सीमा अवसंरचना और विकास की रफ्तार
अमित शाह ने सरकार की प्राथमिकताओं का उल्लेख करते हुए बताया कि 532 किमी लंबी इंडो-नेपाल बॉर्डर रोड के 18 में से 14 खंड पूरे हो चुके हैं, जबकि शेष पर काम तेजी से जारी है। सीमावर्ती इलाकों में स्वास्थ्य, शिक्षा और आवास सुविधाओं का विस्तार भी हो रहा है, ताकि सुरक्षा बलों और स्थानीय आबादी दोनों को लाभ मिल सके।
‘मैराथन’ सुरक्षा समीक्षा
कार्यक्रम के बाद अररिया समाहरणालय में सात सीमावर्ती जिलों के डीएम और एसपी के साथ उच्च स्तरीय बैठक हुई। गृह मंत्रालय, आईबी और एसएसबी के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में अवैध निर्माण, खुफिया तंत्र सुदृढ़ीकरण और नशीली दवाओं की तस्करी पर विशेष कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए गए। अमित शाह ने प्रधानमंत्री के ‘वाइब्रेंट विलेज’ विजन का हवाला देते हुए कहा कि विकास और सुरक्षा साथ-साथ चलेंगे। सीमांत गांवों को सशक्त बनाकर ही घुसपैठ और राष्ट्रविरोधी गतिविधियों पर स्थायी अंकुश लगाया जा सकता है। सीमांचल से दिया गया यह कड़ा संदेश अब राष्ट्रीय विमर्श का हिस्सा बनता दिख रहा है।