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Bihar News: सड़ा भोजन व बदहाल व्यवस्था पर मंत्री का कड़ा एक्शन; आवासीय विद्यालय के ये तीन अधिकारी निलंबित
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पूर्णिया
Published by: पूर्णिया ब्यूरो
Updated Sun, 08 Feb 2026 07:27 PM IST
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सार
पूर्णिया के जानकीनगर स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर आवासीय विद्यालय में बच्चों के भोजन और मूलभूत सुविधाओं में भारी लापरवाही सामने आने पर अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग के मंत्री लखेचन्द्र पासवान ने कड़ा कदम उठाया है।
27 जनवरी को निरीक्षण करते मंत्री
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विस्तार
पूर्णिया में विद्यालय में बच्चों के भविष्य और स्वास्थ्य के साथ हो रहे खिलवाड़ के मामले में मंत्री ने बड़ा हंटर चलाया है। अनुसूचित जाति एवं जनजाति कल्याण विभाग के मंत्री लखेचन्द्र पासवान ने जानकीनगर स्थित डॉ. भीमराव आंबेडकर आवासीय विद्यालय में व्याप्त भ्रष्टाचार और कुव्यवस्था पर कड़ा प्रहार किया है।
औचक निरीक्षण के दौरान विद्यालय की जो बदहाल तस्वीर सामने आई, उसने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बच्चों के भोजन में सड़ा हुआ आलू मिलने और बुनियादी सुविधाओं के अभाव पर नाराजगी जताते हुए विभाग ने बनमनखी के प्रखंड कल्याण पदाधिकारी सहित तीन कर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
दरअसल, बीते 27 जनवरी को विभागीय मंत्री लखेचन्द्र पासवान और सत्तारूढ़ दल के सचेतक सह स्थानीय विधायक कृष्ण कुमार ऋषि अचानक विद्यालय पहुँच गए। निरीक्षण के दौरान मंत्री उस वक्त सन्न रह गए जब उन्होंने रसोई घर में बच्चों के लिए सड़े हुए आलू की सब्जी बनते देखी। गंदे और बदबूदार खाने को देख मंत्री का पारा चढ़ गया और उन्होंने इसे मासूम बच्चों के जीवन के साथ क्रूर मजाक करार दिया।
ये भी पढ़ें- Bihar News: 'कल हर हाल दफ्तर पहुंचे राजस्व अधिकारी, नहीं तो होगी कार्रवाई', डिप्टी सीएम ने दे दिया अल्टीमेटल
जिला कल्याण पदाधिकारी अजित कुमार ने बताया कि इस गंभीर लापरवाही के लिए सीधी जवाबदेही तय की गई है। इसके तहत छात्रावास प्रबंधक सह प्रखंड कल्याण पदाधिकारी (बनमनखी) राकेश रौशन, विद्यालय के प्रधानाध्यापक अशोक कुमार और छात्रावास अधीक्षक मेलू इस्लाम को सस्पेंड कर दिया गया है। वहीं, भोजन की सप्लाई करने वाले जीविका समूह पर भी जिलाधिकारी ने शिकंजा कसा है। जिलाधिकारी ने उनसे स्पष्टीकरण मांगा है और जवाब संतोषजनक नहीं होने पर जीविका समूह को ब्लैकलिस्ट करने या उन पर कड़ी कार्रवाई करने की तैयारी है।
निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक कुप्रबंधन का एक और नमूना सामने आया। विद्यालय में 380 छात्र नामांकित हैं और उन्हें पढ़ाने के लिए 23 शिक्षकों की एक बड़ी टीम तैनात है। इसके बावजूद शिक्षा का स्तर पूरी तरह ध्वस्त मिला। मंत्री ने पाया कि बच्चों को सर्दी के मौसम में न तो बेडशीट दी गई थी और न ही मच्छरों से बचाव के लिए मच्छरदानी। यह भी उजागर हुआ कि जिला स्तरीय अधिकारी एसी कमरों से बाहर निकलकर नियमित निरीक्षण की जहमत नहीं उठा रहे थे, जिससे विद्यालय की स्थिति बद से बदतर होती गई।
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औचक निरीक्षण के दौरान विद्यालय की जो बदहाल तस्वीर सामने आई, उसने विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बच्चों के भोजन में सड़ा हुआ आलू मिलने और बुनियादी सुविधाओं के अभाव पर नाराजगी जताते हुए विभाग ने बनमनखी के प्रखंड कल्याण पदाधिकारी सहित तीन कर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
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दरअसल, बीते 27 जनवरी को विभागीय मंत्री लखेचन्द्र पासवान और सत्तारूढ़ दल के सचेतक सह स्थानीय विधायक कृष्ण कुमार ऋषि अचानक विद्यालय पहुँच गए। निरीक्षण के दौरान मंत्री उस वक्त सन्न रह गए जब उन्होंने रसोई घर में बच्चों के लिए सड़े हुए आलू की सब्जी बनते देखी। गंदे और बदबूदार खाने को देख मंत्री का पारा चढ़ गया और उन्होंने इसे मासूम बच्चों के जीवन के साथ क्रूर मजाक करार दिया।
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जिला कल्याण पदाधिकारी अजित कुमार ने बताया कि इस गंभीर लापरवाही के लिए सीधी जवाबदेही तय की गई है। इसके तहत छात्रावास प्रबंधक सह प्रखंड कल्याण पदाधिकारी (बनमनखी) राकेश रौशन, विद्यालय के प्रधानाध्यापक अशोक कुमार और छात्रावास अधीक्षक मेलू इस्लाम को सस्पेंड कर दिया गया है। वहीं, भोजन की सप्लाई करने वाले जीविका समूह पर भी जिलाधिकारी ने शिकंजा कसा है। जिलाधिकारी ने उनसे स्पष्टीकरण मांगा है और जवाब संतोषजनक नहीं होने पर जीविका समूह को ब्लैकलिस्ट करने या उन पर कड़ी कार्रवाई करने की तैयारी है।
निरीक्षण के दौरान प्रशासनिक कुप्रबंधन का एक और नमूना सामने आया। विद्यालय में 380 छात्र नामांकित हैं और उन्हें पढ़ाने के लिए 23 शिक्षकों की एक बड़ी टीम तैनात है। इसके बावजूद शिक्षा का स्तर पूरी तरह ध्वस्त मिला। मंत्री ने पाया कि बच्चों को सर्दी के मौसम में न तो बेडशीट दी गई थी और न ही मच्छरों से बचाव के लिए मच्छरदानी। यह भी उजागर हुआ कि जिला स्तरीय अधिकारी एसी कमरों से बाहर निकलकर नियमित निरीक्षण की जहमत नहीं उठा रहे थे, जिससे विद्यालय की स्थिति बद से बदतर होती गई।