सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bihar ›   How Nyay Rath Turned into Death Rath on NH-31 Revisit to Dark History of Purnia Bus Tragedies

Bihar: एक हादसा, उजड़ गए कई घर; सुआ गांव में एक साथ उठीं 6 अर्थियां, मातम में डूबे लोग

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पूर्णिया Published by: पूर्णिया ब्यूरो Updated Sun, 12 Apr 2026 09:43 PM IST
विज्ञापन
सार

Bihar: कटिहार के दादपुर चौक पर हुए भीषण बस हादसे में पूर्णिया के सुआ गाँव के कई लोगों की मौत हो गई, जिससे पूरे गाँव में मातम छा गया। संथाल समुदाय की परंपरा के अनुसार 6 महिलाओं को उनकी ही जमीन में दफनाया गया, जबकि कई परिवार इस हादसे से पूरी तरह उजड़ गए हैं और प्रशासन से मदद की मांग कर रहे हैं।

How Nyay Rath Turned into Death Rath on NH-31 Revisit to Dark History of Purnia Bus Tragedies
अंतिम संस्कार की तस्वीर
विज्ञापन

विस्तार

कटिहार के दादपुर चौक (NH-31) पर शनिवार को हुई मौत की बस दुर्घटना ने पूर्णिया के मुफस्सिल थाना क्षेत्र की गौरा पंचायत (सुआ गांव) को कभी न भूलने वाला जख्म दे दिया है। रविवार को जब मृतकों के पार्थिव शरीर गांव पहुंचे, तो पूरे इलाके में कोहराम मच गया। संथाल समुदाय के इन परिवारों के लिए यह साल की वह तीर्थयात्रा थी, जिसे वे बड़े चाव से जियन मारांग बुरु जय शंकर भगवान के दर्शन के लिए करते थे, लेकिन वापसी में काल ने उनका रास्ता रोक लिया।

Trending Videos


 संथाल समुदाय की धार्मिक परंपरा से हुआ अंतिम संस्कार
सुआ गांव में रविवार का दृश्य कलेजा चीर देने वाला था। संथाल समुदाय की धार्मिक परंपरा के अनुसार, इस हादसे का शिकार हुई 6 महिलाओं को उनके परिजनों ने अपनी ही जमीन में दफनाने की प्रक्रिया पूरी की। समाज के बड़े-बुजुर्गों ने बताया कि उनके वंशज शवों को जलाते नहीं हैं, बल्कि अपनी ही माटी में अंतिम संस्कार कर उन्हें हमेशा के लिए अपने पास रखते हैं। वहीं, एक अन्य मृतक चिंतामणि महतो का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज के साथ श्मशान घाट पर किया गया। एक ही गांव से इतनी बड़ी संख्या में उठीं अर्थियों ने हर आंख को नम कर दिया।
विज्ञापन
विज्ञापन


गरीबी की मार झेल रहे परिवार बेसहारा
इस हादसे ने गरीबी की मार झेल रहे इन परिवारों को बेसहारा कर दिया है। एक परिवार का अंत: एक ही परिवार के 5 सदस्य हादसे का शिकार हुए। एक की मौत हो गई, जबकि 4 अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। अब उस घर में भरण-पोषण करने वाला कोई सक्षम सदस्य नहीं बचा है। एक बदनसीब परिवार ऐसा भी था, जिसकी मां और बेटी दोनों ने एक साथ दम तोड़ दिया। गांव की गलियों में वे बच्चे बिलख रहे हैं, जिनके सिर से माता-पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया है।

ये भी पढ़ें: मन्नतों से मिला इकलौता बेटा, पुरानी रंजिश में बेरहमी से छीनी गई मासूम की जिंदगी

गांव में कैंप कर रहे पुलिस अधिकारी
गांव में उपजे भारी तनाव और मातम को देखते हुए जिला प्रशासन के आला अधिकारी और पुलिस बल गांव में कैंप कर रहे हैं। ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों में गहरा आक्रोश है। उनकी एक ही मांग है कि पीड़ित परिवारों के लिए केवल अनुग्रह राशि ही काफी नहीं है, बल्कि अनाथ हुए बच्चों के भरण-पोषण और शिक्षा की जिम्मेदारी भी सरकार को उठानी चाहिए। हादसे में घायल हुए 7 अन्य लोगों की स्थिति पूर्णिया जीएमसीएच में अब भी नाजुक बनी हुई है। डॉक्टर उन्हें बचाने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं, लेकिन गाँव के लोग अब भी सहमे हुए हैं कि कहीं मौतों का यह आंकड़ा और न बढ़ जाए।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed