Bihar: एक हादसा, उजड़ गए कई घर; सुआ गांव में एक साथ उठीं 6 अर्थियां, मातम में डूबे लोग
Bihar: कटिहार के दादपुर चौक पर हुए भीषण बस हादसे में पूर्णिया के सुआ गाँव के कई लोगों की मौत हो गई, जिससे पूरे गाँव में मातम छा गया। संथाल समुदाय की परंपरा के अनुसार 6 महिलाओं को उनकी ही जमीन में दफनाया गया, जबकि कई परिवार इस हादसे से पूरी तरह उजड़ गए हैं और प्रशासन से मदद की मांग कर रहे हैं।
विस्तार
कटिहार के दादपुर चौक (NH-31) पर शनिवार को हुई मौत की बस दुर्घटना ने पूर्णिया के मुफस्सिल थाना क्षेत्र की गौरा पंचायत (सुआ गांव) को कभी न भूलने वाला जख्म दे दिया है। रविवार को जब मृतकों के पार्थिव शरीर गांव पहुंचे, तो पूरे इलाके में कोहराम मच गया। संथाल समुदाय के इन परिवारों के लिए यह साल की वह तीर्थयात्रा थी, जिसे वे बड़े चाव से जियन मारांग बुरु जय शंकर भगवान के दर्शन के लिए करते थे, लेकिन वापसी में काल ने उनका रास्ता रोक लिया।
संथाल समुदाय की धार्मिक परंपरा से हुआ अंतिम संस्कार
सुआ गांव में रविवार का दृश्य कलेजा चीर देने वाला था। संथाल समुदाय की धार्मिक परंपरा के अनुसार, इस हादसे का शिकार हुई 6 महिलाओं को उनके परिजनों ने अपनी ही जमीन में दफनाने की प्रक्रिया पूरी की। समाज के बड़े-बुजुर्गों ने बताया कि उनके वंशज शवों को जलाते नहीं हैं, बल्कि अपनी ही माटी में अंतिम संस्कार कर उन्हें हमेशा के लिए अपने पास रखते हैं। वहीं, एक अन्य मृतक चिंतामणि महतो का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाज के साथ श्मशान घाट पर किया गया। एक ही गांव से इतनी बड़ी संख्या में उठीं अर्थियों ने हर आंख को नम कर दिया।
गरीबी की मार झेल रहे परिवार बेसहारा
इस हादसे ने गरीबी की मार झेल रहे इन परिवारों को बेसहारा कर दिया है। एक परिवार का अंत: एक ही परिवार के 5 सदस्य हादसे का शिकार हुए। एक की मौत हो गई, जबकि 4 अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। अब उस घर में भरण-पोषण करने वाला कोई सक्षम सदस्य नहीं बचा है। एक बदनसीब परिवार ऐसा भी था, जिसकी मां और बेटी दोनों ने एक साथ दम तोड़ दिया। गांव की गलियों में वे बच्चे बिलख रहे हैं, जिनके सिर से माता-पिता का साया हमेशा के लिए उठ गया है।
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गांव में कैंप कर रहे पुलिस अधिकारी
गांव में उपजे भारी तनाव और मातम को देखते हुए जिला प्रशासन के आला अधिकारी और पुलिस बल गांव में कैंप कर रहे हैं। ग्रामीणों और स्थानीय जनप्रतिनिधियों में गहरा आक्रोश है। उनकी एक ही मांग है कि पीड़ित परिवारों के लिए केवल अनुग्रह राशि ही काफी नहीं है, बल्कि अनाथ हुए बच्चों के भरण-पोषण और शिक्षा की जिम्मेदारी भी सरकार को उठानी चाहिए। हादसे में घायल हुए 7 अन्य लोगों की स्थिति पूर्णिया जीएमसीएच में अब भी नाजुक बनी हुई है। डॉक्टर उन्हें बचाने की हरसंभव कोशिश कर रहे हैं, लेकिन गाँव के लोग अब भी सहमे हुए हैं कि कहीं मौतों का यह आंकड़ा और न बढ़ जाए।
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