Bihar: इंदौर की आग ने उजाड़ दिए सपने! पटाखा फैक्ट्री विस्फोट में बिहार के बेटों की मौत, गांवों में मातम
मध्य प्रदेश के इंदौर में पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण विस्फोट और आग ने बिहार के अररिया जिले के कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। नरपतगंज प्रखंड के मानिकपुर पंचायत और गोखलापुर गांव के मजदूर इस हादसे का शिकार हुए, जिसमें अब तक पांच लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है जबकि कई मजदूर गंभीर रूप से झुलसे हुए हैं।
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मध्य प्रदेश के इंदौर में स्थित पटाखा फैक्ट्री में हुए भीषण अग्निकांड ने बिहार के अररिया जिले के नरपतगंज प्रखंड की खुशियां छीन ली हैं। इस दर्दनाक हादसे में अब तक पांच मजदूरों की मौत की पुष्टि हुई है, जबकि एक दर्जन से अधिक मजदूर गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। कई युवक अब भी लापता हैं। घटना के बाद मानिकपुर पंचायत और गोखलापुर गांव में मातम पसरा हुआ है। हर तरफ चीख-पुकार और सन्नाटा देखने को मिल रहा है। परिजनों की हालत ऐसी है कि कैमरे पर बोलते-बोलते कई लोग बेहोश हो जा रहे हैं।
रोजी-रोटी की तलाश में गए थे इंदौर
जानकारी के अनुसार नरपतगंज प्रखंड के मानिकपुर पंचायत के विभिन्न गांवों से करीब 11 मजदूर छह महीने पहले रोजगार की तलाश में इंदौर गए थे। वहां सभी एक पटाखा फैक्ट्री में मजदूरी कर अपने परिवार का पालन-पोषण कर रहे थे। लेकिन 14 मई को फैक्ट्री में अचानक हुए भीषण विस्फोट और आग ने कई परिवारों की जिंदगी बदल दी।
धीरज कुमार और अमन कुमार की मौत
हादसे में मानिकपुर पंचायत के भवानीपुर गांव निवासी 25 वर्षीय धीरज कुमार की दर्दनाक मौत हो गई। वहीं गांव के ही 24 वर्षीय बबलू कुमार अब भी लापता बताए जा रहे हैं। परिवार लगातार उसकी तलाश कर रहा है, लेकिन अब तक कोई जानकारी नहीं मिल पाई है। घर में मां-बाप और बहनों का रो-रोकर बुरा हाल है। भाई को याद करते-करते बहनें कई बार बेसुध हो जा रही हैं। इसी अग्निकांड में गोखलापुर गांव निवासी 18 वर्षीय अमन कुमार, पिता मनोज पासवान, की भी मौत हो गई। शनिवार देर शाम जब अमन का शव गांव पहुंचा तो पूरे इलाके का माहौल गमगीन हो गया। महिलाओं की चीख-पुकार और परिजनों के विलाप से हर आंख नम हो गई।
परिवार का सहारा थे दोनों युवक
बताया जा रहा है कि अमन कुमार तीन भाइयों में सबसे बड़े थे और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारी उन्हीं के कंधों पर थी। उनकी कमाई से ही घर चलता था। वहीं भवानीपुर निवासी धीरज कुमार भी अपने परिवार का सहारा थे। वे दो भाइयों में छोटे थे और मजदूरी कर बूढ़े माता-पिता की जिम्मेदारी उठा रहे थे। दोनों युवक अविवाहित थे और परिवार के सपनों को पूरा करने के लिए घर से दूर कड़ी मेहनत कर रहे थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
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कई मजदूर गंभीर रूप से झुलसे
इस हादसे में भवानीपुर गांव के 26 वर्षीय अभिषेक कुमार, 20 वर्षीय पिंटू कुमार, 25 वर्षीय अजय कुमार, 25 वर्षीय लालटू कुमार और 50 वर्षीय रामवृक्ष पासवान गंभीर रूप से झुलस गए हैं। सभी घायलों का इलाज इंदौर के विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है। कई की हालत अभी भी चिंताजनक बनी हुई है।
सुरक्षित लौटे मजदूर, परिवारों की आंखों में छलके आंसू
वहीं इस दर्दनाक हादसे में सुरक्षित बचे नीरज कुमार, अंजेश कुमार, अमित कुमार, अरविंद पासवान और नेपाल के देवानगंज निवासी दिनेश पासवान किसी तरह अपने गांव लौट आए हैं। उनके घर पहुंचते ही परिजनों की आंखों से आंसू छलक पड़े। कोई मां बेटे को गले लगाकर फूट-फूट कर रोने लगी तो किसी ने भगवान का शुक्रिया अदा किया।
तीन दिनों से कई घरों में नहीं जला चूल्हा
गांव की हालत इतनी दर्दनाक है कि मृतक और लापता मजदूरों के कई घरों में तीन दिनों से चूल्हा तक नहीं जला है। घर के कमाने वाले बेटों के चले जाने के बाद परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। हर घर में बस एक ही सवाल गूंज रहा है — “अब परिवार कैसे चलेगा?”
ग्रामीणों ने मांगा मुआवजा और मदद
मानिकपुर पंचायत के पूर्व पंचायत समिति सदस्य मोहम्मद इब्राहिम ने बताया कि मृतक धीरज कुमार उनके घर के पास रहता था। हाल ही में आंधी में उसका घर क्षतिग्रस्त हो गया था। परिवार को उम्मीद थी कि बेटा बाहर कमाकर नया घर बनाएगा, लेकिन उससे पहले ही यह हादसा हो गया। उन्होंने कहा कि पूरा गांव इस घटना से सदमे में है। घटना के बाद ग्रामीण लगातार पीड़ित परिवारों को ढांढस बंधाने पहुंच रहे हैं। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन और राज्य सरकार से मृतकों के परिजनों को उचित मुआवजा, घायलों के बेहतर इलाज और लापता मजदूरों की जल्द तलाश की मांग की है।
प्रशासन ने शुरू की कार्रवाई
नरपतगंज प्रखंड प्रवर्तन पदाधिकारी ममता कुमारी ने बताया कि मृतक मजदूरों के घर पहुंचकर घटना की जानकारी ली गई है। उन्होंने कहा कि कागजी प्रक्रिया पूरी कर रिपोर्ट वरीय अधिकारियों को भेज दी गई है और प्रशासन आगे की कार्रवाई कर रहा है। फिलहाल मानिकपुर और गोखलापुर गांव में हर आंख नम है। लोग अब भी लापता मजदूरों के सुरक्षित लौटने की दुआ कर रहे हैं, लेकिन गांव की टूटी उम्मीदें और मातम भरा माहौल इस हादसे की भयावह तस्वीर बयां कर रहा है।

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