सब्सक्राइब करें

कमेंट

कमेंट X

😊अति सुंदर 😎बहुत खूब 👌अति उत्तम भाव 👍बहुत बढ़िया.. 🤩लाजवाब 🤩बेहतरीन 🙌क्या खूब कहा 😔बहुत मार्मिक 😀वाह! वाह! क्या बात है! 🤗शानदार 👌गजब 🙏छा गये आप 👏तालियां ✌शाबाश 😍जबरदस्त
Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Jabalpur News ›   Three lakh structures have been built for water conservation with public cooperation in Dindori

MP: जल संचय के लिए बनाए गए तीन लाख स्ट्रक्चर, एमपी में पहले व देश में दूसरे स्थान पर डिंडौरी ने बनाई जगह

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर/डिंडौरी Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Wed, 20 May 2026 10:07 AM IST
विज्ञापन
सार

आदिवासी बाहुल्य डिंडौरी जिले में जल संरक्षण को जन आंदोलन का रूप देते हुए लगभग तीन लाख जल संरचनाएं तैयार की गई हैं। सीमित संसाधनों के बावजूद लोगों ने वाटर हार्वेस्टिंग, ड्रिप इरिगेशन और टपक सिंचाई जैसे नवाचार अपनाकर पानी बचाने की मिसाल पेश की है। 

Three lakh structures have been built for water conservation with public cooperation in Dindori
आदिवासी बाहुल्य डिंडौरी में जन सहयोग से जल संचयन के लिए बनाये गये तीन लाख स्ट्रक्चर
विज्ञापन

विस्तार

जबलपुर के आदिवासी बाहुल्य डिंडौरी जिले में नागरिकों ने पानी की एक-एक बूंद को सुरक्षित करने के लिए ‘जल संचय से जन भागीदारी’ अभियान के तहत लगभग तीन लाख स्ट्रक्चर तैयार किए हैं।

Trending Videos


आदिवासी बाहुल्य जिला होने के बावजूद लोगों ने जल संरक्षण के भविष्यगामी परिणामों को समझते हुए इस अभियान को केवल सरकारी योजना न मानकर जन आंदोलन का स्वरूप दिया। इसका उद्देश्य पानी का संरक्षण कर धरती के जलस्तर में बढ़ोतरी करना है। इस अभियान में डिंडौरी जिला प्रदेश में प्रथम और देश में दूसरे स्थान पर है।

विज्ञापन
विज्ञापन

आदिवासी बाहुल्य डिंडौरी जिले में जिला प्रशासन ने जल संरक्षण के महत्व को समझाने के लिए जल चौपाल, जागरूकता अभियान, कलश रैली और नुक्कड़ नाटक के माध्यम से आम नागरिकों को जागरूक किया। लोगों ने पानी की एक-एक बूंद का महत्व समझते हुए इस अभियान को चुनौती के रूप में स्वीकार किया। सीमित संसाधनों के बावजूद जनसहयोग से जल और पौधों के संरक्षण का प्रभावी मॉडल तैयार किया गया।

विज्ञापन

ड्रिप इरिगेशन व्यवस्था विकसित की गई
जल संरक्षण के लिए शासकीय भवनों में वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित किए गए। परिसरों में सोकपिट निर्माण कर जल संचयन को बढ़ावा दिया गया। विद्यालय और छात्रावास परिसरों में किचन गार्डन गतिविधियां शुरू की गईं। रसोई और स्नानागार से निकलने वाले पानी को नालियों के माध्यम से पौधों तक पहुंचाने की व्यवस्था की गई। जहां पाइपलाइन या जल निकासी संभव नहीं थी, वहां घड़ों और प्लास्टिक की बोतलों के माध्यम से ड्रिप इरिगेशन व्यवस्था विकसित की गई।

‘एक बगिया मां के नाम’ योजना के तहत साढ़े तीन हजार फलदार पौधों का रोपण किया गया। स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने प्रत्येक पौधे तक पानी पहुंचाने के लिए अनुपयोगी प्लास्टिक की बोतलों और घड़ों के माध्यम से टपक सिंचाई मॉडल तैयार किया, जिससे कम पानी में नियमित सिंचाई संभव हो सकी।

ये भी पढ़ें- Bhopal News: नर्मदा में दूध विसर्जन पर सख्त हुआ एनजीटी, प्रदूषण जांच के लिए मांगी वैज्ञानिक रिपोर्ट

'पौधों की सिंचाई के लिए विशेष संरचनाएं बनाई गई'
जिला कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने बताया कि जल संचय अभियान में डिंडौरी जिला प्रदेश स्तर पर प्रथम और देश स्तर पर दूसरे स्थान पर रहा। जल संचय जनभागीदारी अभियान के तहत जिले में 2,98,456 स्ट्रक्चर बनाए गए हैं। इनमें डगवेल रिचार्ज 7,146, हैंडपंप रिचार्ज 2,048, रूफटॉप वाटर हार्वेस्टिंग 14,613, कंटूर ट्रेंच 32,561, गली प्लग 12,777, गेबियन 1,634, परकोलेशन टैंक 1,246, खेत तालाब 9,941, तालाब 890, चेक डैम 6,146, रिचार्ज पिट 41,646, बोरी बंधान 3,441, ड्रिप इरिगेशन 3,150 तथा मटका सिंचाई पद्धति से 35 हजार पौधों की सिंचाई के लिए विशेष संरचनाएं बनाई गई हैं।

उन्होंने बताया कि डिंडौरी जिले की मिट्टी में पानी सोखने की क्षमता बहुत कम है, जिसके कारण यहां किसान सामान्यतः एक ही फसल ले पाते हैं। गेहूं और धान की पैदावार भी कम होती है तथा किसान मुख्य रूप से कोदो-कुटकी की खेती करते हैं।
 

आदिवासी बाहुल्य डिंडौरी में जन सहयोग से जल संचयन के  लिए बनाये गये तीन लाख स्ट्रक्चर

 जन सहयोग से जल संचयन के लिए बनाये गये तीन लाख स्ट्रक्चर

 

आदिवासी बाहुल्य डिंडौरी में जन सहयोग से जल संचयन के  लिए बनाये गये तीन लाख स्ट्रक्चर

 डिंडौरी में जन सहयोग से जल संचयन के लिए बनाये गये तीन लाख स्ट्रक्चर

 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed