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Jabalpur: गैंगस्टर अब्दुल रज्जाक को हाईकोर्ट से झटका, बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज; तीन बार लगा था NSA

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जबलपुर Published by: जबलपुर ब्यूरो Updated Tue, 19 May 2026 10:25 PM IST
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सार

जबलपुर हाईकोर्ट ने गैंगस्टर हाजी अब्दुल रज्जाक की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि उनकी वर्तमान न्यायिक हिरासत वैधानिक है। कोर्ट ने पुलिस को रज्जाक और परिवार पर दर्ज मामलों की जानकारी देने के निर्देश भी दिए।

Gangster Abdul Razzaq's judicial custody is not illegal
जबलपुर हाईकोर्ट - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

गैंगस्टर हाजी अब्दुल रज्जाक द्वारा दायर बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका को हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है। हाईकोर्ट की युगलपीठ ने अपने फैसले में कहा कि रज्जाक की वर्तमान न्यायिक हिरासत अवैध नहीं है।

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मामले की सुनवाई जस्टिस विवेक अग्रवाल और जस्टिस आरसीएस बिसेन की युगलपीठ ने की। अदालत ने सुरक्षित रखा गया फैसला सुनाते हुए कहा कि रज्जाक इस समय विभिन्न आपराधिक मामलों में वैधानिक रूप से न्यायिक अभिरक्षा में हैं, इसलिए बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।

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जबलपुर निवासी हाजी अब्दुल रज्जाक की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया था कि भाजपा विधायक संजय पाठक के राजनीतिक दबाव में उनके खिलाफ झूठे आपराधिक प्रकरण दर्ज किए गए और उन्हें जेल में रखा गया। याचिका में कहा गया कि वर्ष 2021 में उन्हें आधी रात को घर से गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन पर तीन बार राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) लगाया गया, लेकिन तीनों ही मामलों में राज्य स्तरीय सलाहकार बोर्ड ने एनएसए को मंजूरी नहीं दी।

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सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि रज्जाक फिलहाल अलग-अलग एफआईआर के आधार पर न्यायिक हिरासत में हैं। ऐसे में उनकी हिरासत को अवैध नहीं माना जा सकता।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि रज्जाक पर लगाए गए तीनों एनएसए आदेश अब प्रभाव में नहीं हैं और वर्तमान हिरासत अन्य आपराधिक मामलों के आधार पर है। अदालत ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता के पास नियमित कानूनी उपाय, जैसे जमानत आवेदन, उपलब्ध हैं।

हालांकि, न्यायालय ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि रज्जाक और उनके परिवार के खिलाफ दर्ज सभी लंबित मामलों की जानकारी उपलब्ध कराई जाए। साथ ही भविष्य में दर्ज होने वाले किसी भी नए मामले की सूचना 24 घंटे के भीतर देने के निर्देश भी दिए गए हैं।

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