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Bihar: बिहार पुलिस सेवा के दो अधिकारी के खिलाफ IG ने क्यों लिखा पत्र? पूर्व थानेदार और आईओ को निलंबित किया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पूर्णिया
Published by: पूर्णिया ब्यूरो
Updated Fri, 27 Mar 2026 02:32 PM IST
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सार
Bihar Police: पूर्णिया आईजी ने विवेकानंद ने दो साल पुराने केस की फाइल खंगाली तो दंग रह गए। इसमें आईओ से लेकर एसडीपीओ तक ने लापरवाही बरतने की बात सामने आई। आईजी ने अपने स्तर पर पूरे केस की गंभीरता से छानबीन की। इसके बाद बड़ी कार्रवाई कर दी।
पूर्व सदर एसडीपीओ 01 पंकज शर्मा और रूपक रंजन
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विस्तार
पूर्णिया प्रक्षेत्र के आईजी विवेकानंद ने पुलिस महकमे में कर्तव्यहीनता, लापरवाही और भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कार्रवाई की है। मरंगा थाना कांड संख्या 141/24 की समीक्षा के दौरान गंभीर अनियमितताएं और जांच में जानबूझकर ढिलाई बरतने के आरोप में आईजी ने तत्कालीन थानाध्यक्ष रूपक रंजन और अनुसंधानकर्ता ज्योति चौरसिया को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। निलंबन अवधि में दोनों का मुख्यालय पुलिस केंद्र, पूर्णिया निर्धारित किया गया। इस कार्रवाई के साथ ही आईजी ने तत्कालीन सदर एसडीपीओ-01 पंकज शर्मा और एक अन्य एसडीपीओ के विरुद्ध भी विभागीय कार्रवाई के लिए पुलिस मुख्यालय को पत्र लिखा है। इस बड़ी कार्रवाई से पुलिस महकमे में हड़कंप व्याप्त है।
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केस दबाने और एक महीने का रहस्यमयी विलंब
बताया जा रहा है कि सोनम नयन की मौत 14 जून 2024 को इलाज के दौरान भागलपुर के मायागंज अस्पताल में हुई थी। मृतका के मरंगा थानाक्षेत्र के नया टोला गंगेली निवासी कृष्णदेव सिंह ने स्पष्ट आरोप लगाया था कि साढ़े चार लाख रुपये तिलक की मांग पूरी न होने पर उनके दामाद गुरू प्रसाद दास, ससुर हीरा लाल मंडल और देवर शािशकांज ने मिलकर सोनम को जिंदा जला दिया था। भागलपुर की बरारी पुलिस द्वारा 15 जून 2024 को भेजा गया फर्दबयान मिलते ही मरंगा पुलिस को तुरंत प्राथमिकी दर्ज कर आरोपियों की धरपकड़ करनी चाहिए थी। लेकिन, तत्कालीन थानाध्यक्ष रूपक रंजन ने इस गंभीर मामले की फाइल को करीब एक महीने तक दबाकर रखा। 12 जुलाई 2024 को तब जाकर केस दर्ज हुआ, जब आरोपियों को साक्ष्य मिटाने और फरार होने का पर्याप्त समय मिल चुका था।
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रूपक रंजन की कार्यशैली पहले भी विवादों के घेरे में रही
आईजी की समीक्षा में यह बात अक्षम्य लापरवाही के रूप में सामने आई। निलंबित थानाध्यक्ष रूपक रंजन की कार्यशैली पहले भी विवादों के घेरे में रही है। विदित हो कि इससे पूर्व कोढ़ा के एक पुराने मामले में गंभीर लापरवाही बरतने के कारण डीआईजी प्रमोद कुमार मंडल ने उन्हें लाइन हाजिर कर पूर्णिया पुलिस लाइन भेज दिया था। बार-बार मिल रही शिकायतों और अब आईजी द्वारा की गई इस सख्त निलंबन की कार्रवाई ने पुलिस अधिकारी की पेशेवर छवि पर गहरा सवाल खड़ा कर दिया है। वर्तमान में वह पूर्णिया पुलिस के टेक्निकल सेल के प्रभारी के रूप में तैनात थे, जहां से उन्हें अब निलंबित कर दिया गया है।
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पुलिसिया सुस्ती ने न्याय को एक महीने तक लटकाए रखा
जांच के क्रम में आईजी ने पाया कि केस की अनुसंधानकर्ता ज्योति चौरसिया ने भी जांच को सही दिशा में ले जाने के बजाय इसमें शिथिलता बरती। इतना ही नहीं, तत्कालीन सदर एसडीपीओ पंकज शर्मा के सुपरविजन (पर्यवेक्षण) पर भी गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। आईजी ने माना कि इतने संवेदनशील मामले में पर्यवेक्षण के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों ने अपनी जिम्मेदारी सही ढंग से नहीं निभाई, जिससे न्याय प्रक्रिया बाधित हुई और अपराधियों को परोक्ष रूप से लाभ पहुंचाने की कोशिश की गई। एसपी स्वीटी सहरावत ने रूपक रंजन के निलंबन की आधिकारिक पुष्टि की है। आईजी विवेकानंद की इस कार्रवाई ने यह साफ कर दिया है कि अपराध के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति न केवल अपराधियों के खिलाफ है, बल्कि उन पुलिसकर्मियों के खिलाफ भी है जो अपने कर्तव्य के प्रति लापरवाह हैं। यह मामला अब पूरे बिहार पुलिस में चर्चा का विषय बना हुआ है कि कैसे एक गंभीर दहेज हत्या के मामले में पुलिसिया सुस्ती ने न्याय को एक महीने तक लटकाए रखा।