Bihar News: वीडियो में 34 बाल्टियां, FIR में 29! सारण पुलिस की जब्ती पर उठे 130 लीटर स्प्रिट के बड़े सवाल
बिहार के सारण जिले में स्प्रिट बरामदगी को लेकर तरैया थाना पुलिस की कार्रवाई सवालों के घेरे में है। कार्रवाई के वीडियो में 34 बाल्टियां दिखाई देने का दावा किया जा रहा है, जबकि एफआईआर में केवल 29 बाल्टियों में 754 लीटर स्प्रिट जब्त होने का उल्लेख है।
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विस्तार
बिहार के सारण जिले में शराबबंदी कानून के तहत हुई स्प्रिट बरामदगी की कार्रवाई अब सवालों के घेरे में आ गई है। तरैया थाना पुलिस की कार्रवाई के दौरान बनाए गए वीडियो और एफआईआर में दर्ज जब्ती के आंकड़ों में कथित अंतर सामने आया है। वीडियो में 34 बाल्टियां दिखाई देने का दावा किया जा रहा है, जबकि एफआईआर में सिर्फ 29 बाल्टियों में 754 लीटर स्प्रिट बरामद होने की बात दर्ज है। ऐसे में करीब 130 लीटर स्प्रिट का हिसाब अब चर्चा का विषय बन गया है। हालांकि, वीडियो में दिखाई देने वाली सभी बाल्टियों में स्प्रिट भरी थी या नहीं, इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है और यही जांच का सबसे अहम बिंदु माना जा रहा है।
वीडियो और एफआईआर में अंतर से उठे सवाल
शराबबंदी कानून के बीच सारण जिले से सामने आए इस मामले ने पुलिस की कार्यप्रणाली और जब्त शराब के रिकॉर्ड पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस के आधिकारिक दस्तावेज और मौके पर बनाए गए वीडियो में कथित अंतर सामने आने के बाद पूरे मामले ने तूल पकड़ लिया है।
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गुप्त सूचना पर हुई थी छापेमारी
जानकारी के अनुसार, 27 जुलाई 2026 को तरैया थाना पुलिस को सूचना मिली कि थाना क्षेत्र के चंचलिया गांव स्थित पुराने बांध के पूर्व श्याम किशोर सिंह के गन्ने के खेत में बड़ी मात्रा में स्प्रिट छिपाकर रखी गई है। सूचना के आधार पर पुलिस ने छापेमारी की।
पुलिस के पहुंचते ही तीन लोग मोटरसाइकिल से भागने लगे। पीछा करने पर पुलिस ने अरबाज खान को गिरफ्तार कर लिया, जबकि उपेंद्र राय और प्रवीण कुमार मौके से फरार हो गए। गिरफ्तार आरोपी की निशानदेही पर पुलिस ने गन्ने के खेत की तलाशी ली।
एफआईआर में 29 बाल्टियां, वीडियो में 34 का दावा
एफआईआर के मुताबिक पुलिस ने 26-26 लीटर क्षमता वाली 29 बाल्टियों में कुल 754 लीटर स्प्रिट बरामद की और इसी आधार पर जब्ती सूची तैयार कर मामला दर्ज किया।
लेकिन कार्रवाई के बाद सामने आए वीडियो में 34 बाल्टियां दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। यदि सभी बाल्टियां 26 लीटर क्षमता की थीं तो कुल मात्रा 884 लीटर होती है। यानी वीडियो और एफआईआर के आंकड़ों में करीब 130 लीटर का अंतर दिखाई देता है।
हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि वीडियो में दिखाई देने वाली सभी बाल्टियों में स्प्रिट भरी थी या नहीं। इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। यही तथ्य जांच का सबसे महत्वपूर्ण विषय माना जा रहा है। जांच के बाद ही स्पष्ट होगा कि रिकॉर्ड में कोई त्रुटि है, वीडियो की अलग व्याख्या है या किसी स्तर पर अनियमितता हुई है।
पांच बाल्टियों को लेकर बढ़ा विवाद
यदि अतिरिक्त पांच बाल्टियां खाली भी थीं, तब भी उन्हें जब्त सामग्री की सूची में दर्ज किया जाना चाहिए था। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर ये पांच बाल्टियां सरकारी रिकॉर्ड में क्यों नहीं दिखाई गईं। इसी कथित विसंगति ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग को और मजबूत कर दिया है।
पहले भी उठते रहे हैं सवाल
बिहार में शराबबंदी लागू होने के बाद जब्त शराब के रखरखाव और रिकॉर्ड को लेकर पहले भी कई विवाद सामने आ चुके हैं। "चूहे शराब पी गए" वाला मामला आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बना रहता है। ऐसे में सारण की यह घटना भी सोशल मीडिया से लेकर प्रशासनिक गलियारों तक चर्चा में है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि यदि पुलिस के वीडियो और एफआईआर में अंतर दिखाई देता है तो वास्तविक जब्ती कितनी हुई और उसका सही रिकॉर्ड क्या है।
डीआईजी बोले- जांच में दोषी मिले तो होगी कार्रवाई
सारण प्रक्षेत्र के डीआईजी नीलेश कुमार ने कहा है कि पूरे मामले की जांच कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि यदि जांच में किसी भी अधिकारी या कर्मी की लापरवाही या अनियमितता सामने आती है तो दोषियों के खिलाफ सख्त विभागीय और कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।