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Bihar: प्रदेश में पहली बार न्यायधीश ने साइबर अपराध के मामले में दोषियों को सुनाई सजा, ब्लैकमेल करना पड़ा भारी

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छपरा Published by: सारण ब्यूरो Updated Wed, 25 Feb 2026 10:46 PM IST
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सार

छपरा की अदालत ने सोशल मीडिया पर अश्लील फोटो-वीडियो वायरल कर ब्लैकमेल करने के मामले में दो आरोपियों को आईटी एक्ट और बीएनएस की विभिन्न धाराओं में सजा सुनाई। लोक अभियोजक के अनुसार, बिहार में साइबर अपराध के मामले में यह पहली सजा है।

For the first time in Bihar, a judge has pronounced sentence in a cyber crime case:
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश-13 श्रीकांत सिंह की अदालत ने साइबर थाना कांड संख्या 62/25, सत्र वाद संख्या 1067/25 में सोशल मीडिया पर फोटो और वीडियो वायरल कर ब्लैकमेल करने के मामले में दो आरोपियों को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। लोक अभियोजक के अनुसार, बिहार में साइबर अपराध के मामले में न्यायालय द्वारा सुनाई गई यह पहली सजा है।

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अदालत ने सोनपुर थाना क्षेत्र के दरियापुर गांव निवासी कुणाल गौतम और अकिलपुर थाना क्षेत्र के अकिलपुर गांव निवासी प्रकाश यादव को विभिन्न धाराओं में दंडित किया। आईटी एक्ट की धारा 66E के तहत दोनों को दो वर्ष की सजा और एक लाख रुपये जुर्माना, धारा 67 के तहत दो वर्ष की सजा और एक लाख रुपये जुर्माना तथा धारा 67A के तहत चार वर्ष की सजा और दो लाख रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई गई।

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अदालत ने ये स्पष्ट किया
इसके अलावा भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 77 के तहत तीन वर्ष की सजा और दस हजार रुपये जुर्माना, धारा 256(2) के तहत एक वर्ष की सजा और दस हजार रुपये जुर्माना तथा धारा 251(2) के तहत एक वर्ष की सजा और दस हजार रुपये अर्थदंड लगाया गया है। अर्थदंड नहीं देने पर अतिरिक्त छह माह की सजा भुगतनी होगी। अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी और जेल में बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा।

मामले में पांच गवाहों की गवाही कराई गई
अभियोजन की ओर से लोक अभियोजक सर्वजीत ओझा और सहायक अधिवक्ता सुभाष दास ने सरकार का पक्ष रखा। मामले में पांच गवाहों की गवाही कराई गई। पुलिस द्वारा आरोप पत्र समर्पित किए जाने के बाद 23 जून 2025 को अदालत ने आईटी एक्ट और बीएनएस की धाराओं में संज्ञान लेकर आरोप गठित किया था।


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ब्लैकमेल कर रुपये की मांग की गई
मामला मढ़ौरा थाना क्षेत्र के अवारी गांव निवासी ऋषि प्रताप सिंह द्वारा 9 मार्च 2025 को साइबर थाना में दर्ज प्राथमिकी से जुड़ा है। प्राथमिकी में आरोप लगाया गया था कि इंस्टाग्राम आईडी के माध्यम से उनकी बहन की अश्लील तस्वीर और वीडियो भेजकर उसे वायरल करने की धमकी दी गई तथा ब्लैकमेल कर रुपये की मांग की गई।

लोक अभियोजक सर्वजीत ओझा ने कहा कि साइबर अपराध के मामले में बिहार में न्यायालय द्वारा सुनाई गई यह पहली सजा है। उन्होंने यह भी बताया कि बीएनएस के तहत भी पहली सजा छपरा के प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश पुनीत कुमार गर्ग द्वारा सुनाई गई थी।

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