Bihar News: शराब की सूचना दी तो थाने में ही फंस गया युवक! बदसलूकी-धक्का मुक्की का आरोप, पैर में लगी चोट
सारण जिले के मांझी थाना क्षेत्र में शराब सेवन की सूचना पुलिस को देना एक युवक को कथित तौर पर भारी पड़ गया। चैनपुर निवासी प्रितम कुमार का आरोप है कि 16 अगस्त की शाम मांझी प्रखंड कार्यालय परिसर के पास पानी की टंकी के आसपास शराब पीने की सूचना देने वह अपनी पत्नी के साथ थाने पहुंचा था।
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बिहार में पूर्ण शराबबंदी कानून को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सरकार और पुलिस प्रशासन लगातार आम लोगों से सहयोग की अपील करता है। लोगों से शराब तस्करी और शराब सेवन की सूचना पुलिस को देने की अपील की जाती है, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके। लेकिन सारण जिले के मांझी थाना क्षेत्र से सामने आए एक मामले ने पुलिस और आम जनता के बीच समन्वय तथा सूचना देने वालों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि शराब सेवन की सूचना देने थाने पहुंचे एक युवक के साथ पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर बदसलूकी, गाली-गलौज और धक्का-मुक्की की। धक्का-मुक्की के दौरान युवक के गिरने से उसके पैर में चोट लगने की भी बात सामने आई है।
शराब की सूचना लेकर पत्नी के साथ थाने पहुंचा था युवक
मिली जानकारी के अनुसार, घटना 16 अगस्त की शाम की बताई जा रही है। बक्सर जिला मुख्यालय के उमा शंकर राय के पुत्र प्रितम कुमार अपने ससुराल सारण जिले के मांझी थाना क्षेत्र के चैनपुर गांव आए हुए थे। बताया गया कि 16 अगस्त की शाम करीब 7 बजे प्रितम कुमार को जानकारी मिली कि मांझी प्रखंड कार्यालय परिसर के अंदर स्थित पानी की टंकी के आसपास कुछ लोग बैठकर शराब का सेवन कर रहे हैं। एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर प्रितम ने इसकी सूचना पुलिस को देने का फैसला किया। वह अपनी पत्नी के साथ खुद मांझी थाना पहुंचे, ताकि पुलिस मौके पर पहुंचकर शराब पीने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर सके।
सूचना सुनने के बजाय अभद्र व्यवहार का आरोप
प्रितम कुमार का आरोप है कि थाने में मौजूद पुलिसकर्मियों ने उनकी शिकायत को गंभीरता से सुनने के बजाय उनके साथ कथित तौर पर अभद्र भाषा का इस्तेमाल किया। जब उन्होंने इसका विरोध किया और अपनी बात पर अड़े रहे, तो थाने में मौजूद एक पुलिसकर्मी ने उनके साथ कथित तौर पर धक्का-मुक्की शुरू कर दी।
आरोप है कि धक्का लगने से प्रितम कुमार अपना संतुलन खो बैठे और नीचे गिर गए। इस दौरान उनके पैर में गंभीर चोट लग गई। पीड़ित के मुताबिक, थाना परिसर में काफी देर तक हंगामा और विवाद चलता रहा। इसके बाद किसी तरह पुलिस ने उनका आवेदन स्वीकार किया।
शराबबंदी की जमीनी हकीकत और सूचना देने वालों की सुरक्षा पर सवाल
मांझी थाना क्षेत्र की इस घटना के सामने आने के बाद इलाके में पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा तेज हो गई है। सवाल यह उठ रहा है कि जब सरकार और पुलिस प्रशासन आम नागरिकों से शराबबंदी कानून को सफल बनाने में सहयोग की अपील करता है और शराब पीने या शराब तस्करी की गुप्त सूचना देने के लिए प्रोत्साहित करता है, तो सूचना देने थाने पहुंचने वाले व्यक्ति के साथ कथित तौर पर ऐसा व्यवहार क्यों हुआ?
यह मामला सिर्फ एक थाने की कार्यप्रणाली तक सीमित नहीं माना जा रहा है, बल्कि इससे यह सवाल भी उठ रहा है कि पुलिस की मदद करने वाले आम नागरिकों को किस तरह की सुरक्षा और सम्मान मिल रहा है। सारण जिले में हाल के दिनों में सामने आए कुछ अन्य मामलों ने भी पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं।
पहला मामला: मांझी थाना में सूचना देने पहुंचे युवक से बदसलूकी का आरोप
मांझी थाना मामले में शराब सेवन की सूचना देने पहुंचे प्रितम कुमार के साथ थाने के भीतर ही कथित तौर पर बदसलूकी और धक्का-मुक्की किए जाने का आरोप है। इस दौरान उन्हें चोट लगने की बात भी सामने आई है।
दूसरा मामला: जनता बाजार थाना में सूचना देने वाले की पहचान सार्वजनिक करने का आरोप
दूसरा मामला जनता बाजार थाना क्षेत्र से जुड़ा है। यहां शराब पीने वालों की गुप्त सूचना देने वाले एक युवक की पहचान कथित तौर पर सार्वजनिक किए जाने का गंभीर आरोप लगा है। शिकायतकर्ता का नाम और उसका निजी मोबाइल नंबर कथित तौर पर लीक होने की बात कही जा रही है। इससे उसकी सुरक्षा को लेकर भी चिंता जताई गई है। हालांकि, इस मामले में जांच की बात कही जा रही है, लेकिन शिकायतकर्ता की पहचान कथित तौर पर सामने आने से शराबबंदी अभियान में सूचना देने वालों की गोपनीयता को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
तीसरा मामला: तरैया थाना में स्प्रिट की मात्रा को लेकर विवाद
तीसरा मामला तरैया थाना क्षेत्र का है। यहां पुलिस की छापेमारी के दौरान बरामद की गई स्प्रिट की मात्रा को लेकर विवाद सामने आया था। आरोप था कि मौके पर बनाए गए वीडियो और थाने की प्राथमिकी यानी एफआईआर में दर्ज स्प्रिट की मात्रा में काफी अंतर था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए सारण रेंज के डीआईजी नीलेश कुमार ने उच्चस्तरीय जांच के निर्देश दिए थे। हालांकि, घटना को 15 दिन से अधिक समय बीत जाने के बावजूद किसी ठोस कार्रवाई या मामले की स्थिति स्पष्ट नहीं होने से पुलिस विभाग की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।