सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Bihar ›   Saran News ›   senior medical officer private nursing home jachcha bachcha death police investigation saran bihar

Bihar News: प्रसव से पहले नवजात की मौत, रेफर के दौरान प्रसूता ने तोड़ा दम, मचा हड़कंप

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छपरा, Published by: सारण ब्यूरो Updated Sun, 25 Jan 2026 07:44 AM IST
विज्ञापन
सार

सारण जिले के मढ़ौरा में एक निजी नर्सिंग होम में प्रसव के दौरान हुई जच्चा-बच्चा की मौत ने स्थानीय स्वास्थ्य तंत्र की गंभीर खामियों को उजागर कर दिया है। आरोप है कि सरकारी अस्पताल से महिला को निजी क्लीनिक की ओर मोड़ा गया, जहां न तो योग्य चिकित्सक मौजूद थे और न ही जरूरी आपात सुविधाएं।

senior medical officer private nursing home jachcha bachcha death police investigation saran bihar
रोते बिलखते परिजन - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
Follow Us

बिहार में स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली एक बार फिर उजागर हुई है। सारण जिले की अतिप्राचीन औद्योगिक नगरी के रूप में प्रसिद्ध अनुमंडल मुख्यालय मढ़ौरा में एक निजी नर्सिंग होम में जच्चा-बच्चा की मौत ने न केवल स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, बल्कि सरकारी अस्पतालों और निजी नर्सिंग होम के बीच कथित गठजोड़ को भी बेनकाब कर दिया है। यह घटना कोई पहली नहीं है, बल्कि इससे पहले भी मढ़ौरा समेत आसपास के क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से जुड़ी कई घटनाएं सामने आती रही हैं।
Trending Videos


स्थानीय लोगों का आरोप है कि मढ़ौरा स्थित आरपीसी नामक निजी नर्सिंग होम नियमों के विरुद्ध संचालित किया जा रहा था। बताया जा रहा है कि नर्सिंग होम के संचालक डॉ. आर.एन. तिवारी स्वयं क्लीनिक में नियमित रूप से मौजूद नहीं रहते थे और पूरा संचालन कर्मियों के भरोसे छोड़ा गया था। अप्रशिक्षित स्टाफ, आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं का अभाव और योग्य चिकित्सकों की अनुपस्थिति मरीजों के लिए जानलेवा साबित हो रही है। वहीं दूसरी ओर सरकारी अस्पतालों की स्थिति भी चिंताजनक बनी हुई है, जहां संसाधनों की कमी, चिकित्सकों की अनुपलब्धता और मरीजों को निजी अस्पतालों में रेफर करने की प्रवृत्ति आम हो चुकी है।
विज्ञापन
विज्ञापन


जानकारी के अनुसार, सारण जिले के तरैया थाना क्षेत्र अंतर्गत भटौरा गांव निवासी संदीप शर्मा की 30 वर्षीय पत्नी तारामुन्नी देवी को प्रसव पीड़ा होने पर परिजनों ने मढ़ौरा स्थित रेफरल अस्पताल में भर्ती कराया था। परिजनों का आरोप है कि वहां मौजूद आशा कार्यकर्ता ने सरकारी अस्पताल के प्रभारी चिकित्सक से मिलीभगत कर महिला को बहला-फुसलाकर निजी नर्सिंग होम में भर्ती करा दिया।

इसके बाद महिला को मढ़ौरा मुख्यालय के स्टेशन माल गोदाम रोड स्थित आरपीसी निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया। परिजनों के अनुसार, वहां मौजूद कर्मियों ने शुरुआत में सब कुछ सामान्य बताया, लेकिन उस समय न तो कोई चिकित्सक मौजूद था और न ही आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई गईं। इलाज में गंभीर लापरवाही के चलते प्रसव से ठीक पहले नवजात शिशु की मौत हो गई। इसके बाद प्रसूता की हालत तेजी से बिगड़ने लगी, लेकिन इसके बावजूद समय पर समुचित इलाज नहीं किया गया।

पढ़ें- Bihar: घर में जा घुसा बेकाबू ट्रैक्टर, हादसे में तीन लोग घायल; गुस्साए लोगों ने चालक को पेड़ से बांधकर पीटा

मृतका के पति संदीप शर्मा ने आरोप लगाया कि बच्चे की मौत के बाद अस्पताल कर्मियों ने आनन-फानन में एंबुलेंस बुलाकर प्रसूता को उसमें शिफ्ट कर दिया। परिजनों को बताया गया कि महिला की हालत गंभीर है, इसलिए उसे छपरा सदर अस्पताल रेफर किया जा रहा है। हालांकि छपरा ले जाने के दौरान मिर्जापुर बाजार के समीप रास्ते में ही तारामुन्नी देवी की मौत हो गई।

इसके बाद परिजन शव को लेकर निजी नर्सिंग होम पहुंचे, लेकिन परिजनों के पहुंचने से पहले ही नर्सिंग होम के संचालक, चिकित्सक और अन्य कर्मी फरार हो चुके थे। परिजन घंटों तक शव के साथ अस्पताल परिसर में बैठे रहे और चिकित्सक के आने का इंतजार करते रहे, लेकिन कोई भी मौके पर नहीं पहुंचा। घटना की सूचना मिलते ही मृतका के गांव से बड़ी संख्या में परिजन और स्थानीय लोग निजी नर्सिंग होम के पास जुट गए और जमकर हंगामा किया। आक्रोशित लोगों ने नर्सिंग होम संचालक और संबंधित चिकित्सक के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों से निजी क्लीनिकों की ओर मरीजों को मोड़ना अब एक गंभीर समस्या बन चुकी है। इसमें आशा कार्यकर्ताओं से लेकर कुछ चिकित्सकों की मिलीभगत की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रहती हैं, लेकिन इसके बावजूद स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। स्वास्थ्य विभाग की कमजोर निगरानी के कारण निजी नर्सिंग होम बेलगाम हो चुके हैं।

सूचना मिलने पर 112 पुलिस मौके पर जरूर पहुंची, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि पुलिस ने न तो गहन पूछताछ की और न ही कोई ठोस कार्रवाई करते हुए कुछ ही देर में बैरंग लौट गई। लोगों का कहना है कि जब तक दोषी चिकित्सकों और अवैध रूप से संचालित निजी नर्सिंग होम व क्लीनिकों पर सख्त कार्रवाई नहीं की जाएगी, तब तक इस तरह की दर्दनाक घटनाएं रुकने वाली नहीं हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

Election
एप में पढ़ें

Followed