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जब 20 हजार विशालकाय पक्षियों और इस देश के सैनिकों के बीच हुआ था युद्ध, हैरान कर देगी ये रोचक घटना

Fri, 25 Sep 2020 09:55 AM IST
सोनू शर्मा फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
फीचर डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: सोनू शर्मा Updated Fri, 25 Sep 2020 09:55 AM IST
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Strange and true story of Emu War also known as the Great Emu War Australia in 1932
एमू (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay

इंसान और इंसान के बीच की लड़ाई को आपने कई बार देखी या सुनी होगी. लेकिन क्या कभी आपने पक्षियों और इंसानों के बीच युद्ध हुआ हो, ऐसा देखा या सुना है? जी हां, पक्षियों और इंसानों के बीच युद्ध। ये रोचक घटना साल 1932 की है, जिसके बारे में जो भी सुनता है, वो हैरान हुए बिना नहीं रहता। दरअसल, प्रथम विश्वयुद्ध के बाद सेवानिवृत हुए कुछ सैनिकों को ऑस्ट्रेलियाई सरकार द्वारा पुनर्वास के लिए जमीनें दी गई थीं। ये जमीनें ज्यादातर पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया में थीं। अब सैनिक यहां किसान बन गए और अपनी-अपनी जमीनों पर खेती करने लगे, लेकिन कुछ ही समय बाद उनके फसलों पर विशालकाय जंगली पक्षी एमू का हमला हो गया। यहां सबसे हैरान करने वाली बात ये थी कि इन पक्षियों की संख्या 2-4 नहीं बल्कि 20 हजार के करीब थी। 

Strange and true story of Emu War also known as the Great Emu War Australia in 1932
एमू (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay

एमू का झुंड आता और किसानों की फसलों को बर्बाद करके चला जाता। सिर्फ यहीं यहीं, उन्होंने खेतों की रक्षा के लिए जो फेंसिंग लगाई थी, उसे भी उन पक्षियों ने तोड़ दिया था। जब ऐसा अक्सर होने लगा तो किसान बने सैनिकों का एक प्रतिनिधिमंडल सरकार के पास अपनी गुहार लेकर पहुंचा। अब समस्या की गंभीरता को देखते हुए किसानों की मदद के लिए ऑस्ट्रेलिया के तत्कालीन रक्षामंत्री ने मशीन गन से लैस सेना की एक टुकड़ी भेजी। 

Strange and true story of Emu War also known as the Great Emu War Australia in 1932
एमू (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay

वह दो नवंबर, 1932 का दिन था। सरकार द्वारा भेजी गई सेना ने एमूओं को भगाने वाला ऑपरेशन शुरू किया। उन्हें एक जगह पर 50 एमूओं का झुंड दिखा, लेकिन जब तक वो मशीन गन से उनपर निशाना लगाते, तब तक उन पक्षियों का झुंड यह समझ गया कि उनपर हमला होने वाला है और वो वहां तेजी से भाग निकले और मशीन गन की रेंज से दूर हो गए। 

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Strange and true story of Emu War also known as the Great Emu War Australia in 1932
एमू (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay

चार नवंबर, 1932 को भी कुछ ऐसा ही हुआ। सैनिकों ने करीब 1000 एमूओं का एक झुंड देखा और वो उनपर अभी फायर करने ही वाले थे कि मशीन गन जाम हो गई। जब तक मशीन गन ठीक हो पाती, तब तक अधिकतर एमू वहां से भाग गए थे। हालांकि फिर भी सैनिकों ने करीब 12 एमूओं को मार गिराया था, लेकिन इस घटना के बाद से एमू काफी सतर्क हो गए। 

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Strange and true story of Emu War also known as the Great Emu War Australia in 1932
एमू (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay

कहा जाता है कि एमूओं ने अब सैनिकों के हमलों से बचने के लिए खुद को छोटे-छोटे समूहों में बांट लिया था और हर समूह में एक एमू निगरानी के काम में लगा रहता था, ताकि उनपर हमला न हो या हमला होने से पहले ही वो बाकियों को सतर्क कर दे, जिससे सभी वहां से भाग निकलें। इस दौरान वो फसलों को खूब बर्बाद करते रहे, लेकिन जैसे ही उन्हें लगता कि उनपर हमला होने वाला है तो वो वहां से भाग निकलते। 

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