Digital Payment: कैश ऑन डिलीवरी से क्रेडिट कार्ड तक का सफर; ऑनलाइन खरीदारी ने कैसे बदली भुगतान की आदतें?
कैश ऑन डिलीवरी से शुरू हुआ भारत का ऑनलाइन खरीदारी सफर अब डिजिटल पेमेंट और क्रेडिट पर भरोसे तक पहुंच गया है। ई-कॉमर्स ने भुगतान को आसान ही नहीं बनाया, बल्कि शहरी उपभोक्ताओं में वित्तीय आत्मविश्वास और औपचारिक क्रेडिट अपनाने की आदत भी मजबूत की है।
विस्तार
एक दशक पहले तक औसत भारतीय उपभोक्ता डिजिटल पेमेंट को लेकर उत्सुक तो था, लेकिन पूरी तरह आश्वस्त नहीं। ऑनलाइन खरीदारी का सबसे भरोसेमंद जरिया तब भी 'कैश ऑन डिलीवरी' यानी डिलीवरी के समय भुगतान ही था, जो इंटरनेट पर लेनदेन को लेकर बनी आशंकाओं के बीच एक सुरक्षा कवच की तरह काम करता था। लेकिन समय के साथ यह तस्वीर पूरी तरह बदल गई।
जैसे-जैसे ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स ने डिजिटल वॉलेट, यूपीआई, डेबिट कार्ड और 'बाय नाउ, पे लेटर' (BNPL) जैसे विकल्पों का सहज और सुरक्षित इकोसिस्टम तैयार किया, वैसे-वैसे उपभोक्ताओं की सोच भी बदली। डिजिटल पेमेंट अब जोखिम नहीं, बल्कि सुविधा बन गया।
इस बदलाव का असर सिर्फ चेकआउट प्रक्रिया तक सीमित नहीं रहा। ई-कॉमर्स ने औपचारिक वित्तीय प्रणाली तक पहुंच को भी लोकतांत्रिक बनाया। छोटे मोबाइल रिचार्ज के लिए वॉलेट और स्मार्टफोन खरीदने के लिए क्रेडिट विकल्प इनके बीच सहज रूप से स्विच करने की आदत ने लाखों भारतीयों को एक विविध वित्तीय टूलकिट से परिचित कराया।
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डिजिटल भुगतान बना डिफॉल्ट विकल्प
नई इंडस्ट्री रिपोर्ट्स इस बदलाव की पुष्टि करती हैं। वित्त वर्ष 2025 में रिटेल डिजिटल ट्रांजैक्शन वॉल्यूम में 35 प्रतिशत की तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई है। सबसे अहम बात यह है कि अब लगभग 90 प्रतिशत उपभोक्ता ऑनलाइन खरीदारी के लिए डिजिटल भुगतान को ही प्राथमिकता देते हैं।
ये आंकड़े 'हाउ अर्ब इंडिया पेज 2025' रिपोर्ट से सामने आए हैं, जिसे किर्नी और अमेजन पे ने मिलकर तैयार किया है। 120 शहरों में 6,000 से ज्यादा उपभोक्ताओं पर आधारित इस अध्ययन से साफ होता है कि ऑनलाइन बनी आदतें अब ऑफलाइन व्यवहार को भी दिशा दे रही हैं।
क्रेडिट अपनाने का लॉन्चपैड बना ई-कॉमर्स
रिपोर्ट के मुताबिक, ई-कॉमर्स अब भारत में क्रेडिट अपनाने का प्रमुख जरिया बन चुका है, खासकर को-ब्रांडेड क्रेडिट कार्ड्स के जरिए। ये कार्ड अब किसी सीमित वर्ग तक नहीं रहे, बल्कि मास-मार्केट प्रोडक्ट बन चुके हैं। 65 प्रतिशत को-ब्रांडेड कार्ड धारकों के पास ऐसा कार्ड है, जो किसी न किसी ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म से जुड़ा है।
नई पीढ़ी ने बदला भुगतान का तरीका
यह ट्रेंड खास तौर पर जेन जी और मिलेनियल्स के बीच तेजी से बढ़ा है। अध्ययन बताता है कि 65 प्रतिशत युवा प्रोफेशनल्स ने अपनी पहली नौकरी शुरू करने के तुरंत बाद क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन किया। उनके लिए क्रेडिट कोई जाल नहीं, बल्कि एक रणनीतिक वित्तीय टूल है। जहां कुछ लोग इसका इस्तेमाल लाइफस्टाइल अपग्रेड के लिए करते हैं, वहीं 43 प्रतिशत उपभोक्ता इसे फाइनेंशियल फ्लेक्सिबिलिटी और प्लानिंग के लिए अपनाते हैं।
किर्नी इंडिया में पार्टनर और फाइनेंशियल सर्विसेज लीड शाश्वत शर्मा कहते हैं कि जेन जी और मिलेनियल्स भारत में क्रेडिट अपनाने की परिभाषा बदल रहे हैं। करियर की शुरुआत में ही क्रेडिट कार्ड लेना अब सामान्य हो गया है। आगे का बड़ा अवसर भरोसा, वैयक्तिकरण और समावेशी वित्तीय उत्पादों के निर्माण में है।
लाइफस्टाइल इकॉनमी को मिल रहा है ईंधन
जैसे-जैसे उपभोक्ता बेसिक पेमेंट से आगे बढ़कर क्रेडिट-आधारित खर्च की ओर बढ़ रहे हैं, वैसे-वैसे खर्च की प्रकृति भी बदल रही है। रिपोर्ट बताती है कि रोजमर्रा के छोटे खर्चों में अभी भी कैश और यूपीआई का दबदबा है, लेकिन 'लाइफस्टाइल इकॉनमी' के लिए क्रेडिट इंस्ट्रूमेंट्स पहली पसंद बन चुके हैं।
19 प्रतिशत उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स खरीदने के लिए क्रेडिट कार्ड या बीएनपीएल का इस्तेमाल करते हैं, जबकि फैशन और लाइफस्टाइल कैटेगरी में भी इनका चलन बढ़ रहा है। यात्रा और शौक से जुड़े खर्चों में 13 प्रतिशत लोग क्रेडिट का सहारा लेते हैं। बड़ी रकम को आसान किस्तों में बांटने या रिवॉर्ड्स पाने की सुविधा ने डिजिटल कार्ट को शहरी जीवनशैली का अहम हिस्सा बना दिया है।
ऑनलाइन भरोसे का ऑफलाइन असर
ई-कॉमर्स क्रांति का सबसे बड़ा असर ऑफलाइन बाजार में दिख रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, ऑफलाइन खरीदारी में डिजिटल पेमेंट की प्राथमिकता 2024 में 48 प्रतिशत थी, जो 2025 में बढ़कर 56 प्रतिशत हो गई है। मतलब साफ है कि जो उपभोक्ता ऑनलाइन वॉलेट या को-ब्रांडेड कार्ड पर भरोसा करता है, वही भरोसा वह किराना स्टोर या रिटेल शॉप पर भी दिखाता है।
अमेजन पे इंडिया के सीईओ विकास बंसल कहते हैं कि सिर्फ एक साल में ऑफलाइन डिजिटल पेमेंट की प्राथमिकता का 48 से 56 प्रतिशत तक पहुंचना उपभोक्ता व्यवहार में बुनियादी बदलाव को दर्शाता है। को-ब्रांडेड क्रेडिट कार्ड्स की बढ़ती लोकप्रियता और 87 प्रतिशत डिजिटल यूटिलिटी बिल पेमेंट्स यह संकेत देते हैं कि भारत का डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम परिपक्व हो रहा है।