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WPI: थोक महंगाई दर आठ महीने के उच्चतम स्तर पर, दिसंबर में 0.83% हुई; विनिर्माण और खाद्य कीमतों में तेजी का असर

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कुमार विवेक Updated Wed, 14 Jan 2026 01:04 PM IST
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सार

Wholesale Inflation: दिसंबर 2025 में भारत की थोक मुद्रास्फीति आठ महीने के उच्च स्तर 0.83% पर पहुंच गई है। विनिर्माण और खाद्य उत्पादों की कीमतों में आए बदलावों और आरबीआई की मौद्रिक नीति के प्रभाव पर पढ़ें विस्तृत बिजनेस रिपोर्ट।

WPI Wholesale Inflation Wholesale Price in India for the Month of December News in Hindi
एफएमसीजी उत्पादों के महंगे होने की आशंका - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारत की थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित मुद्रास्फीति में दिसंबर 2025 के दौरान उल्लेखनीय उछाल दर्ज किया गया है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, थोक मुद्रास्फीति दिसंबर में बढ़कर 0.83% पर पहुंच गई, जो पिछले आठ महीनों का उच्चतम स्तर है। यह वृद्धि नवंबर में दर्ज किए गए 0.32% के संकुचन (Contraction) के बाद आई है, जो बाजार विशेषज्ञों की 0.30% की उम्मीदों से काफी अधिक है।

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विनिर्माण और खाद्य कीमतों का कीमतों पर क्या असर?
दिसंबर में थोक मुद्रास्फीति के सकारात्मक क्षेत्र में आने का मुख्य कारण विनिर्माण, खनिजों और खाद्य उत्पादों की कीमतों में हुआ बदलाव है। सरकार द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, 
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थोक महंगाई बढ़ने के प्रमुख कारण क्या हैं?
• विनिर्मित उत्पाद: इस श्रेणी में मुद्रास्फीति नवंबर के 1.33% से बढ़कर दिसंबर में 1.82% हो गई। इसमें मशीनरी, उपकरण, कपड़ा और अन्य विनिर्माण क्षेत्रों का प्रमुख योगदान रहा।
• खाद्य मुद्रास्फीति: नवंबर में खाद्य वस्तुओं की कीमतों में 2.60% की गिरावट देखी गई थी, लेकिन दिसंबर में यह शून्य (0.00%) पर स्थिर रही, जिससे समग्र सूचकांक को समर्थन मिला।
• प्राथमिक वस्तुएं: प्राथमिक वस्तुओं की मुद्रास्फीति दर नवंबर के -2.93% से सुधरकर दिसंबर में 0.21% पर पहुंच गई।

रसोई से जुड़े सामानों पर कीमतों पर क्या असर?
खाद्य क्षेत्र में 'डिफ्लेशन' (कीमतों में गिरावट) के कम होने से मुद्रास्फीति पर दबाव बढ़ा है। हालांकि सब्जियों की कीमतों में साल-दर-साल आधार पर 3.5% की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन यह नवंबर में हुई 20.23% की भारी गिरावट की तुलना में काफी कम है। प्याज की कीमतों में गिरावट जारी रही, लेकिन इसकी गति 64.70% (नवंबर) से घटकर 54.40% (दिसंबर) रह गई। आलू की कीमतों में 38.21% और दालों में 13.88% का संकुचन देखा गया। दूसरी ओर, दूध की कीमतों में 3.23% की वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई।

वर्तमान आर्थिक परिदृश्य में आरबीआई की क्या रणनीति?
थोक के साथ-साथ खुदरा मुद्रास्फीति भी दिसंबर में बढ़कर 1.3% के तीन महीने के उच्च स्तर पर पहुंच गई है, जो नवंबर में 0.7% थी। इसके बावजूद, यह लगातार चौथा महीना है जब मुद्रास्फीति भारतीय रिजर्व बैंक के 4% के लक्ष्य से नीचे बनी हुई है। आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) ने हाल ही में नीतिगत रेपो दर में 25 आधार अंकों की कटौती कर इसे 5.25% कर दिया है। केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष के लिए अपने मुद्रास्फीति अनुमान को भी 2.6% से घटाकर 2.0% कर दिया है। आरबीआई ने भारतीय अर्थव्यवस्था को 'गोल्डिलॉक्स पीरियड' (उच्च विकास और कम मुद्रास्फीति की स्थिति) में बताया है, जहां दूसरी तिमाही में जीडीपी विकास दर 8.2% रही है।

अब आगे क्या?
थोक मुद्रास्फीति में आई यह तेजी आर्थिक गतिविधियों में सुधार और विनिर्माण क्षेत्र में मजबूती का संकेत देती है। हालांकि ईंधन और बिजली क्षेत्र अभी भी -2.31% के साथ नकारात्मक दायरे में बना हुआ है। 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट से पहले ये आंकड़े महत्वपूर्ण हैं, क्योंकि सरकार 8% की अनुमानित नॉमिनल जीडीपी वृद्धि के साथ 'विकसित भारत' के रोडमैप पर ध्यान केंद्रित कर रही है।

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