WEF Report: क्या तकनीक प्रकृति पर भारी? विश्व आर्थिक मंच की रिपोर्ट में दावा- हर साल 60 अरब KG ई-कचरा चिंताजनक
WEF की रिपोर्ट के मुताबिक, टेक सेक्टर की तेज बढ़त से पानी, ऊर्जा और प्राकृतिक संसाधनों पर भारी दबाव पड़ रहा है। समय रहते टिकाऊ कदम नहीं उठाए गए, तो टेक कंपनियों की दीर्घकालिक स्थिरता खतरे में पड़ सकती है।
विस्तार
वैश्विक तकनीकी कंपनियों को प्राकृतिक संसाधनों पर अपने बढ़ते प्रभाव और उन पर निर्भरता को लेकर तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। ऐसा न करने पर न केवल उनकी सामाजिक स्वीकार्यता बल्कि दीर्घकालिक कारोबारी स्थिरता भी खतरे में पड़ सकती है। यह चेतावनी विश्व आर्थिक मंच (WEF) की एक ताजा रिपोर्ट में दी गई है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि आज तकनीक जीवन के लगभग हर पहलू में समा चुकी है। दुनिया भर में हर साल एक ट्रिलियन (1,000 अरब) से अधिक सेमीकंडक्टर बेचे जा रहे हैं, जिनका इस्तेमाल स्मार्टफोन, कारों और आधुनिक मशीनों में होता है। इसके साथ ही, वैश्विक स्तर पर 11,000 से अधिक डेटा सेंटर सक्रिय हैं।
एआई और क्लाउड से तेज होगी ग्रोथ
डब्लूईएफ के अनुसार, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड कंप्यूटिंग, हाई-परफॉर्मेंस इलेक्ट्रॉनिक्स और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी नई तकनीकों के चलते यह सेक्टर आने वाले वर्षों में तेजी से बढ़ेगा। लेकिन रिपोर्ट आगाह करती है कि इस विस्तार की एक भारी पर्यावरणीय कीमत भी चुकानी पड़ रही है।
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पानी, ऊर्जा और खनिजों पर भारी दबाव
रिपोर्ट के मुताबिक, केवल सेमीकंडक्टर निर्माण में ही हर साल 1 ट्रिलियन लीटर से अधिक ताजे पानी की खपत होती है, साथ ही बड़ी मात्रा में धातुओं और महत्वपूर्ण खनिजों का इस्तेमाल किया जाता है। दूसरी ओर, डेटा सेंटर 60 गीगावॉट से अधिक ऊर्जा की मांग करते हैं, जो अमेरिका के कैलिफोर्निया राज्य की पीक पावर जरूरतों के बराबर है।
ई-कचरा बन रहा बड़ी चुनौती
तकनीकी विकास के साथ इलेक्ट्रॉनिक कचरे की समस्या भी गंभीर होती जा रही है। हर साल लगभग 60 अरब किलोग्राम ई-वेस्ट पैदा होता है, जिसमें से 25 प्रतिशत से भी कम का पुनर्चक्रण (रीसाइक्लिंग) हो पाता है।
परियोजनाओं पर लग रहा ब्रेक
WEF ने चेताया कि अगर इन पर्यावरणीय प्रभावों को नहीं संभाला गया, तो टेक सेक्टर का निकट भविष्य और दीर्घकालिक मजबूती दोनों खतरे में पड़ सकते हैं। रिपोर्ट में कहा गया है कि मई 2024 से अब तक अमेरिका में 64 अरब डॉलर की डेटा सेंटर परियोजनाएं स्थानीय विरोध के कारण रोकी गईं या विलंबित हुई हैं। इन विरोधों की मुख्य वजह प्राकृतिक संसाधनों और बिजली की बढ़ती मांग है।
समाधान में भी हैं मौके
रिपोर्ट यह भी रेखांकित करती है कि 'नेचर-पॉजिटिव' रणनीतियां अपनाने से कंपनियों के लिए वित्तीय अवसर भी पैदा हो सकते हैं। इसमें पुराने उपकरणों से धातुओं की रिकवरी, ऊर्जा और पानी की खपत घटाकर लागत में बचत जैसे फायदे शामिल हैं।
कंपनियों के लिए प्राथमिक सुझाव
WEF ने टेक कंपनियों को कई प्राथमिक कदम सुझाए हैं, जिनमें शामिल हैं:
- जल उपयोग को अधिक लचीला और पुनर्स्थापनात्मक बनाना है।
- सर्कुलर इकोनॉमी के जरिए प्रदूषण कम करना है।
- बिजली के अलावा अन्य संचालन से होने वाले और एम्बॉडिड ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को घटाना है।
- भूमि संरक्षण और पुनर्स्थापन को बढ़ावा देना है।
- संचालन को टिकाऊ ऊर्जा स्रोतों से संचालित करना है।
इसके साथ ही, रिपोर्ट में आपूर्ति शृंखला के साथ गहन सहयोग, पारदर्शी रिपोर्टिंग और जिम्मेदार वैल्यू चेन प्रथाओं के जरिए विज्ञान-आधारित नीतियों को समर्थन देने पर भी जोर दिया गया है।