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Report On GDP: क्या वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद 7% से ऊपर रहेगी भारत की विकास दर? जानें रिपोर्ट का दावा

बिजनेस डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रिया दुबे Updated Wed, 14 Jan 2026 12:30 PM IST
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सार

ग्रांट थॉर्नटन भारत की रिपोर्ट के अनुसार वित्त वर्ष 2026 में भारतीय अर्थव्यवस्था के 7.3-7.5% की दर से बढ़ने का अनुमान है। वैश्विक चुनौतियों के बीच सेवा और विनिर्माण क्षेत्र ग्रोथ के मुख्य आधार बने रहेंगे।

Will India's growth rate remain above 7% despite global uncertainties? Learn the report's claim
GDP - फोटो : Adobestock
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विस्तार
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भारतीय अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष 2025-26 में 7.3 से 7.5 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है। वहीं वित्त वर्ष 2027 में विकास दर थोड़ी घटकर करीब सात प्रतिशत रहने का अनुमान है। यह आकलन कंसल्टेंसी फर्म ग्रांट थॉर्नटन भारत ने बुधवार को जारी किया।

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सेवा और विनिर्माण क्षेत्र ने दिखाया मजबूत प्रदर्शन

इससे पहले राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ)  की प्रथम अग्रिम अनुमानों में कहा गया था कि भारत की अर्थव्यवस्था 2025-26 में 7.4 प्रतिशत की दर से बढ़ सकती है, जो पिछले वित्त वर्ष 2024-25 के 6.5 प्रतिशत के मुकाबले काफी बेहतर है। सेवा और विनिर्माण क्षेत्रों के मजबूत प्रदर्शन के चलते भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में अपनी स्थिति बनाए रखने में सफल रहा है।

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भारी अमेरिकी टैरिफ के बावजूद भी भारतीय निर्यात है मजबूत 

ग्रांट थॉर्नटन भारत के पार्टनर और आर्थिक सलाहकार सेवा प्रमुख ऋषि शाह ने कहा कि अमेरिका द्वारा भारतीय निर्यात पर लगाए गए टैरिफ और अन्य वैश्विक चुनौतियों के बावजूद निर्यात अपेक्षाकृत मजबूत बना हुआ है। उन्होंने कहा कि मौजूदा वित्त वर्ष में 7.3 से 7.5 प्रतिशत की ग्रोथ का अनुमान उचित है है, जबकि 2026-27 में यह 6.7 से 7 प्रतिशत के आसपास रह सकती है।

बाहरी मोर्चे पर दबाव बढ़ा

शाह ने वैश्विक भू-राजनीतिक हालात को अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा दबाव बिंदु बताया। उनके मुताबिक दक्षिण अमेरिका और पश्चिम एशिया से जुड़े घटनाक्रम सप्लाई चेन के लिए चुनौतियां खड़ी कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी नीति फैसले का वास्तविक असर कई वर्षों बाद सामने आता है, ऐसे में भारत को वैश्विक स्तर पर चल रही नई औद्योगीकरण की लहर में सक्रिय भूमिका निभानी होगी।

बजट से 'ईज ऑफ डूइंग बिजनेस' पर जोर की उम्मीद

आगामी केंद्रीय बजट को लेकर शाह ने कहा कि बजट एक दिशासूचक दस्तावेज होता है, जो सरकार की भविष्य की सोच को दर्शाता है। इस साल का मुख्य फोकस व्यापार करने में आसानी के मोर्चे पर होना चाहिए। 

रुपया और ब्याज दरों पर नजर

रुपये की कमजोरी पर टिप्पणी करते हुए शाह ने कहा कि भारतीय मुद्रा मौजूदा स्तर पर डॉलर के मुकाबले करीब 90 रुपये के आसपास स्थिर हो सकती है।उनके अनुसार, हमें थोड़ी कमजोर मुद्रा के साथ जीना सीखना चाहिए। भारत जैसी अर्थव्यवस्था के लिए यह कई मामलों में उपयोगी साबित होती है।

मौद्रिक नीति पर उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक के पास ब्याज दरों में एक और कटौती की गुंजाइश है। शाह ने कहा कि महंगाई दर RBI के 4 से 6 प्रतिशत के दायरे के निचले स्तर पर बनी हुई है। ऐसे में 25 आधार अंकों की एक और कटौती की संभावना है, लेकिन इससे ज्यादा नहीं।

बता दें है कि आरबीआई ने फरवरी 2025 से दरों में कटौती का सिलसिला शुरू किया था और अब तक ब्याज दरों में कुल 125 आधार अकों की कटौती कर इसे 5.25 प्रतिशत तक ला चुका है। रिजर्व बैंक की अगली बैठक 4 से 6 फरवरी के बीच होने वाली है। 


 

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