The Bonus Market Update: शेयर बाजार में हरियाली; सेंसेक्स 889 अंक चढ़ा, निफ्टी 24250 के पार पहुंचा
29 जुलाई 2026 को भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त तेजी दर्ज की गई। सेंसेक्स 889 अंक और निफ्टी 264 अंक बढ़कर 24250 के पार पहुंचा। आईटी और धातु शेयरों में मजबूत खरीदारी, रुपये की मजबूती और एफआईआई के निवेश ने बाजार को सहारा दिया।
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विस्तार
भारतीय शेयर बाजार में बुधवार, 29 जुलाई 2026 को जोरदार तेजी दर्ज की गई। प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स और निफ्टी में करीब एक फीसदी की बढ़त देखने को मिली। सेंसेक्स 888.68 अंक बढ़कर 77,654.60 पर बंद हुआ। वहीं, निफ्टी 264.86 अंक की बढ़त के साथ 24,250.20 के पार पहुंच गया।
बाजार ने अमेरिकी-ईरान तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेज वृद्धि को नजरअंदाज किया। व्यापक बाजार के सूचकांकों में भी तेजी रही। अस्थिरता में कमी और वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता-प्रेरित बिकवाली के प्रति लचीलेपन ने निवेशक भावना को मजबूत किया। सूचना प्रौद्योगिकी और धातु के शेयरों में मजबूत खरीदारी ने इस तेजी को गति दी। रुपये की मजबूती ने भी बाजार को सहारा दिया। विदेशी संस्थागत निवेशकों का फिर से निवेश भी बाजार के लिए सकारात्मक रहा। निवेशकों को उम्मीद है कि भारत वैश्विक प्रौद्योगिकी क्षेत्र की जारी बिकवाली से अपेक्षाकृत अछूता रह सकता है। अब बाजार अमेरिकी फेडरल रिजर्व के नीतिगत निर्णय का इंतजार कर रहा है। यह निर्णय आगे की दिशा के लिए संकेत देगा।
बाजार में यह तेजी क्यों आई?
बाजार में यह उछाल कई कारकों के कारण आया। सूचना प्रौद्योगिकी और धातु के शेयरों में निवेशकों ने जमकर खरीदारी की। व्यापक बाजार के सूचकांकों ने भी सकारात्मक क्षेत्र में कारोबार किया। रुपये की मजबूती ने भी निवेशक भावना को बल दिया। विदेशी संस्थागत निवेशकों का पूंजी प्रवाह फिर से शुरू होना एक बड़ा कारण रहा। भारत के वैश्विक कृत्रिम बुद्धिमत्ता-प्रेरित प्रौद्योगिकी क्षेत्र की बिकवाली से अप्रभावित रहने की उम्मीद ने भी निवेशकों को आकर्षित किया।
कच्चे तेल और वैश्विक तनाव का क्या असर रहा?
अमेरिकी और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल आया था। आमतौर पर ऐसी स्थिति बाजार पर नकारात्मक असर डालती है। हालांकि, भारतीय इक्विटी बाजार ने इस वृद्धि को नजरअंदाज कर दिया। बाजार ने इन भू-राजनीतिक चिंताओं के बावजूद अपनी बढ़त जारी रखी। यह भारतीय बाजार की आंतरिक मजबूती को दर्शाता है। निवेशकों ने बाहरी दबावों के बजाय घरेलू कारकों पर अधिक ध्यान दिया।
आगे बाजार की चाल क्या होगी?
बाजार अब आगे की दिशा के लिए महत्वपूर्ण संकेतों का इंतजार कर रहा है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व का आगामी नीतिगत निर्णय निवेशकों के लिए अहम होगा। इस निर्णय से वैश्विक ब्याज दरों और आर्थिक नीतियों पर स्पष्टता मिलेगी। बाजार की अस्थिरता में कमी और घरेलू कारकों की मजबूती जारी रहने की उम्मीद है। निवेशक वैश्विक घटनाओं पर नजर रखते हुए सावधानी से निवेश कर सकते हैं। भारत की आर्थिक वृद्धि की उम्मीदें बाजार को आगे बढ़ा सकती हैं।