Dharavi: 'लोगों को घर और आजीविका मुहैया कराना लक्ष्य', धारावी पुनर्विकास परियोजना पर बोले सीईओ श्रीनिवास
धारावी पुनर्विकास परियोजना के सीईओ ने कहा कि इसका मकसद लोगों को आवास और आजीविका मुहैया करना है। यह भारत को झुग्गी-झोपड़ी मुक्त बनाने की दिशा में उठाया गया एक ठोस कदम है।
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धारावी पुनर्विकास परियोजना (डीआरपी) का लक्ष्य आवास और आजीविका की आपूर्ति करना है। डीआरपी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) एसवीआर श्रीनिवास ने इन बातों पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इसका विजन मुंबई को झुग्गी-झोपड़ी मुक्त बनाना है। साथ ही, आगे चलकर महाराष्ट्र को झुग्गी मुक्त बनाने का लक्ष्य है। यह भारत को झुग्गी-झोपड़ी मुक्त बनाने की दिशा में उठाया गया एक ठोस कदम है।
अधिकारी ने कहा कि इसका मकसद है की सबसे पास आवास हो, कोई भी छूटना नहीं चाहिए। यह भारत में अब तक की सबसे समावेशी झुग्गी पुनर्वास प्राधिकरण (एसआरए) परियोजना है।
धारवी परियोजना को मिली पिछले महीने मंजूरी
धारावी पुनर्विकास परियोजना देश की वित्तीय राजधानी के लिए एक प्रमुख शहरी नवीनीकरण पहल है। इस उद्देश्य एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्ती धारावी को एक आधुनिक, एकीकृत टाउनशिप में बदलना है। डीआरपी सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल पर आधारित है। यह परियोजना अदाणी समूह और महाराष्ट्र सरकार के बीच एक संयुक्त उद्यम है। इस परियोजना को पिछले महीने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणीस से मंजूरी मिली है। धारावी में करीब 10 लाख लोग रहते हैं। अधिकारियों ने इस क्षेत्र को पुनर्विकसित करने के लिए दशकों तक संघर्ष किया है। यह स्लम एरिया 640 एकड़ (260 हेक्टेयर) में फैला हुआ है।