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Chandigarh News: 11 साल पुराने 70 लाख के गृह ऋण धोखाधड़ी केस में आरोपी बरी
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चंडीगढ़। जिला अदालत ने 11 साल पुराने 70 लाख रुपये के गृह ऋण धोखाधड़ी मामले में आरोपी मोहन सिंह को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में विफल रहा। मामला वर्ष 2015 में सेक्टर-34 थाना में दर्ज किया गया था।
शिकायतकर्ता बलजिंद्र सिंह ने अपने सगे भाई मोहन सिंह पर वर्ष 2010 में लिए गए गृह ऋण से जुड़े दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा और धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया था। मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता हिमांशु शर्मा ने दलील दी कि अभियोजन आरोप साबित नहीं कर सका।
बचाव पक्ष ने कहा कि अभियोजन के साक्ष्य आरोपों की पुष्टि के लिए पर्याप्त नहीं थे और मामले में जरूरी कानूनी प्रक्रिया का भी पालन नहीं किया गया। गृह ऋण कंपनी का मैनेजर महत्वपूर्ण गवाह था, लेकिन वह अदालत में गवाही के लिए पेश नहीं हुआ। अभियोजन करीब 10 साल में भी अपनी गवाही पूरी नहीं करा सका।
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अधिवक्ता शर्मा ने यह भी तर्क दिया कि विवाद मूल रूप से परिवार की पैतृक संपत्ति से जुड़ा दीवानी विवाद था जिसे आपराधिक रंग देकर मोहन सिंह के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया। अदालत ने अभियोजन की विफलता और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए आरोपी को बरी कर दिया।
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शिकायतकर्ता बलजिंद्र सिंह ने अपने सगे भाई मोहन सिंह पर वर्ष 2010 में लिए गए गृह ऋण से जुड़े दस्तावेजों में फर्जीवाड़ा और धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया था। मामले की सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता हिमांशु शर्मा ने दलील दी कि अभियोजन आरोप साबित नहीं कर सका।
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बचाव पक्ष ने कहा कि अभियोजन के साक्ष्य आरोपों की पुष्टि के लिए पर्याप्त नहीं थे और मामले में जरूरी कानूनी प्रक्रिया का भी पालन नहीं किया गया। गृह ऋण कंपनी का मैनेजर महत्वपूर्ण गवाह था, लेकिन वह अदालत में गवाही के लिए पेश नहीं हुआ। अभियोजन करीब 10 साल में भी अपनी गवाही पूरी नहीं करा सका।
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अधिवक्ता शर्मा ने यह भी तर्क दिया कि विवाद मूल रूप से परिवार की पैतृक संपत्ति से जुड़ा दीवानी विवाद था जिसे आपराधिक रंग देकर मोहन सिंह के खिलाफ मामला दर्ज कराया गया। अदालत ने अभियोजन की विफलता और उपलब्ध साक्ष्यों को देखते हुए आरोपी को बरी कर दिया।