फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Trauma center remains incomplete even after a year; injured patients still forced to switch blocks.

Chandigarh News: एक साल बाद भी अधूरा ट्रॉमा सेंटर, घायल मरीजों को अब भी ब्लॉक बदलने की मजबूरी

Sun, 09 Aug 2026 02:36 AM IST
Chandigarh Bureau चंडीगढ़ ब्यूरो
Updated Sun, 09 Aug 2026 02:36 AM IST
विज्ञापन
Trauma center remains incomplete even after a year; injured patients still forced to switch blocks.
चंडीगढ़। हादसे में घायल मरीज के लिए हर मिनट कीमती होता है लेकिन जीएमसीएच-32 का 283 बेड का ट्रॉमा सेंटर शुरू होने के एक साल बाद भी गंभीर मरीजों को इलाज के लिए अस्पताल में इधर-उधर ले जाना पड़ रहा है। जिस सेंटर में गंभीर घायलों को एक ही छत के नीचे जांच से लेकर विशेषज्ञ इलाज तक देने का दावा किया गया था, वहां आंख और ईएनटी के ट्रॉमा मरीजों को अब भी पांचवीं मंजिल पर भेजा जा रहा है। लैब और रेडियोडायग्नोसिस की पूरी सुविधा भी सेंटर में शुरू नहीं हो सकी है।
विज्ञापन

ट्रॉमा सेंटर का उद्घाटन 8 अगस्त 2025 को पंजाब के राज्यपाल एवं चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया ने किया था। 283 बेड की इस सुविधा को गंभीर घायलों के लिए शहर की स्वास्थ्य व्यवस्था में बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश किया गया था। उम्मीद थी कि सड़क हादसे, गंभीर चोट और अन्य आपात मामलों में मरीज को तत्काल उपचार मिलेगा और जरूरी जांच व विशेषज्ञ सेवाएं एक ही परिसर में उपलब्ध होंगी।
विज्ञापन

स्ट्रेचर पर मरीज, साथ-साथ भागते परिजन
हादसे के बाद गंभीर मरीज को लेकर परिजनों की पहली चिंता उसे जल्द इलाज दिलाने की होती है लेकिन आंख या ईएनटी की जरूरत पड़ने पर मरीज को ट्रॉमा सेंटर से संबंधित विभाग तक ले जाना पड़ता है। इसके बाद जांच या अन्य विशेषज्ञ राय के लिए फिर दूसरी जगह जाना पड़ सकता है। परिजनों के अनुसार, गंभीर मरीज को स्ट्रेचर पर एक ब्लॉक से दूसरे ब्लॉक ले जाना सबसे बड़ी परेशानी है। बुजुर्ग, चलने में असमर्थ या सिर, रीढ़ और पैरों में गंभीर चोट वाले मरीजों को बार-बार शिफ्ट करना आसान नहीं होता। इससे समय भी लगता है और मरीज को स्थानांतरित करने में अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रात में पांचवीं मंजिल तक पहुंचाना और मुश्किल
आंख और ईएनटी से जुड़े ट्रॉमा मामलों में सबसे ज्यादा परेशानी तब होती है जब मरीज को रात में संबंधित विभाग तक ले जाना पड़े। परिजनों का कहना है कि कई बार लिफ्ट उपलब्ध नहीं होने की स्थिति में मरीज को पांचवीं मंजिल तक ले जाना पड़ता है। गंभीर हालत वाले मरीज को स्ट्रेचर के साथ ऊपर ले जाना परिजनों और अस्पताल स्टाफ दोनों के लिए चुनौती बन जाता है।

आंखों के ट्रॉमा के लिए कमरा तय, सेवा शुरू होने का इंतजार
ट्रॉमा सेंटर में आंख और ईएनटी से जुड़े गंभीर मामलों के उपचार की योजना बनाई गई थी। फिलहाल आंखों में गंभीर चोट, चेहरे पर चोट, नाक-कान से जुड़ी गंभीर चोट और हादसे के बाद सामने आने वाली ईएनटी समस्याओं वाले मरीजों को संबंधित विभागों में भेजा जा रहा है। जीएमसीएच-32 के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विशाल गुपलानी ने बताया कि आंखों के गंभीर मामलों के लिए ट्रॉमा सेंटर में एक कमरा आवंटित किया जा चुका है। वहां इलाज की सुविधा शुरू करने की तैयारी है। वहीं ईएनटी में फैकल्टी और रेजिडेंट की संख्या कम होने के कारण सेवा शुरू करने में थोड़ा समय लग सकता है।
लैब का सैंपल सेंटर में, पूरी जांच अब भी बाहर
ट्रॉमा सेंटर में लैब की पूरी व्यवस्था भी अभी शुरू नहीं हुई है। मरीजों की परेशानी कम करने के लिए सैंपल कलेक्शन रूम शुरू कर दिया गया है। स्टाफ मरीज का सैंपल लेकर संबंधित लैब तक पहुंचाता है और जांच रिपोर्ट ट्रॉमा सेंटर में ही उपलब्ध कराई जा रही है। इससे मरीज को सैंपल देने के लिए दूसरे स्थान पर जाने की जरूरत नहीं पड़ती, लेकिन जांच की पूरी प्रक्रिया अभी ट्रॉमा सेंटर के भीतर नहीं हो रही है। गंभीर मरीजों के लिए तत्काल जांच की जरूरत को देखते हुए यह सुविधा पूरी तरह शुरू होना अहम है।
एक्स-रे-सीटी के लिए भी दूसरे हिस्से का रुख
ट्रॉमा मरीजों के इलाज में एक्स-रे, सीटी स्कैन और अन्य इमेजिंग जांच बेहद महत्वपूर्ण होती हैं। सिर, रीढ़, हड्डी और अंदरूनी चोटों का पता लगाने के लिए इन जांचों के आधार पर आगे का इलाज तय किया जाता है। रेडियोडायग्नोसिस की पूरी सुविधा ट्रॉमा सेंटर में उपलब्ध नहीं होने के कारण मरीजों को दूसरे हिस्से में ले जाना पड़ता है। परिजनों का कहना है कि जिस मरीज को हादसे के बाद स्थिर रखने की जरूरत होती है, उसे बार-बार स्ट्रेचर पर शिफ्ट करना खुद एक चुनौती है।
इलाज के बीच मोबाइल चोरी की भी शिकायतें
ट्रॉमा सेंटर में इलाज की चिंता के साथ परिजनों को सामान की सुरक्षा की भी परेशानी है। परिजनों के अनुसार यहां मोबाइल चोरी की शिकायतें सामने आ रही हैं। गंभीर मरीज के इलाज के दौरान परिवार का पूरा ध्यान उसकी हालत पर रहता है, ऐसे में मोबाइल और अन्य सामान की निगरानी करना मुश्किल होता है। तीमारदारों ने सेंटर में सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।

प्रशासन बोला- अधूरी सुविधाएं जल्द पूरी करेंगे
डॉ. विशाल गुपलानी ने बताया कि लैब की समस्या को दूर करने के लिए सैंपल कलेक्शन रूम संचालित किया जा रहा है। स्टाफ सैंपल लेकर लैब पहुंचाता है और रिपोर्ट ट्रॉमा सेंटर में उपलब्ध कराई जा रही है। उन्होंने कहा कि आंख और ईएनटी के ट्रॉमा मामलों की सुविधा शुरू करने के प्रयास भी जारी हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed