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Chandigarh News: भरतनाट्यम, ओडिसी और कथक की प्रस्तुतियों ने बांधा समां
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चंडीगढ़। शहर में शास्त्रीय नृत्य की खूबसूरत परंपराओं को मंच देने के उद्देश्य से शनिवार को सेक्टर-23 स्थित नवरंग थिएटर में 11वें राष्ट्रीय शास्त्रीय नृत्य महोत्सव मानसून महोत्सव का आयोजन किया गया। चंडीगढ़ प्रशासन के सांस्कृतिक विभाग की ओर से आयोजित महोत्सव में भारतीय शास्त्रीय नृत्य की अलग-अलग शैलियों की प्रस्तुतियां देखने को मिलीं।
कार्यक्रम की शुरुआत भरतनाट्यम प्रस्तुति से हुई। उन्होंने बाजी प्रेम की गीत पर शानदार प्रस्तुति दी। उन्होंने भरतनाट्यम की पारंपरिक मुद्राओं, भाव-भंगिमाओं और लय के माध्यम से प्रेम की भावनाओं को बेहद खूबसूरती से मंच पर उतारा। उनकी प्रस्तुति में नृत्य के साथ भावों का सुंदर तालमेल देखने को मिला।
अनिशा ओडिसी डांस एकेडमी की ओर से मानसून के आगमन पर ओडिसी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी गई। कलाकारों ने अपनी भाव-भंगिमाओं, पारंपरिक मुद्राओं और लयबद्ध कदमों के जरिए बारिश और प्रकृति के उल्लास को मंच पर जीवंत किया। प्रस्तुति में ओडिसी नृत्य की खूबसूरती के साथ मानसून की खुशी और उमंग भी देखने को मिली।
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कथक कलाकार गौरव भट्टी ने अपनी प्रस्तुति में पैरों की थाप, घूमर और भाव-भंगिमाओं के जरिए दर्शकों को प्रभावित किया। उनकी प्रस्तुति में कथक की पारंपरिक लय और गति का सुंदर समावेश देखने को मिला।
कलाकारों ने अपने नृत्य के जरिए बताया कि प्रकृति के बदलते रंगों को कला के माध्यम से और भी खूबसूरती से महसूस किया जा सकता है। ऐसी प्रस्तुतियां शहर में कला के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ लोगों को भारतीय संस्कृति से जोड़ने का काम करती हैं।
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कार्यक्रम की शुरुआत भरतनाट्यम प्रस्तुति से हुई। उन्होंने बाजी प्रेम की गीत पर शानदार प्रस्तुति दी। उन्होंने भरतनाट्यम की पारंपरिक मुद्राओं, भाव-भंगिमाओं और लय के माध्यम से प्रेम की भावनाओं को बेहद खूबसूरती से मंच पर उतारा। उनकी प्रस्तुति में नृत्य के साथ भावों का सुंदर तालमेल देखने को मिला।
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अनिशा ओडिसी डांस एकेडमी की ओर से मानसून के आगमन पर ओडिसी नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति दी गई। कलाकारों ने अपनी भाव-भंगिमाओं, पारंपरिक मुद्राओं और लयबद्ध कदमों के जरिए बारिश और प्रकृति के उल्लास को मंच पर जीवंत किया। प्रस्तुति में ओडिसी नृत्य की खूबसूरती के साथ मानसून की खुशी और उमंग भी देखने को मिली।
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कथक कलाकार गौरव भट्टी ने अपनी प्रस्तुति में पैरों की थाप, घूमर और भाव-भंगिमाओं के जरिए दर्शकों को प्रभावित किया। उनकी प्रस्तुति में कथक की पारंपरिक लय और गति का सुंदर समावेश देखने को मिला।
कलाकारों ने अपने नृत्य के जरिए बताया कि प्रकृति के बदलते रंगों को कला के माध्यम से और भी खूबसूरती से महसूस किया जा सकता है। ऐसी प्रस्तुतियां शहर में कला के प्रति रुचि बढ़ाने के साथ लोगों को भारतीय संस्कृति से जोड़ने का काम करती हैं।