सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Chandigarh is like Modern Village Resembling Thinking of Mahatma Gandhi

गांधी जयंती पर विशेष: बापू के सपनों का आधुनिक गांव है चंडीगढ़, इमारतों में दिखती है सोच

रिशु राज सिंह, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Sat, 02 Oct 2021 09:00 AM IST
विज्ञापन
सार

गांधी शहरों में ऊंची-ऊंची इमारतों में पक्षधर नही थे। इसी तरह चंडीगढ़ में ऊंची इमारतें नहीं हैं। जितनी भी इमारतें हैं, वो सभी एक समान सामग्री से बनाई गई हैं।

Chandigarh is like Modern Village Resembling Thinking of Mahatma Gandhi
चंडीगढ़ - फोटो : फाइल फोटो
विज्ञापन

विस्तार

महात्मा गांधी आजाद भारत में गांवों को मजबूत होते देखना चाहते थे। गांवों पर उनके विचार सर्वविदित हैं, लेकिन शहरों पर उन्होंने कभी खुलकर बात नहीं की। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर महात्मा गांधी किसी शहर की कल्पना करते तो वह बिल्कुल चंडीगढ़ जैसा होता, क्योंकि गांधी के गांव की सोच से मिलता जुलता चंडीगढ़ एक आधुनिक गांव जैसा है।

Trending Videos


ली कार्बूजिए सेंटर की निदेशक दीपिका गांधी ने कहा कि ली कार्बूजिए और पियरे जोनरे के पत्रों में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का काफी जिक्र है। पंडित नेहरू महात्मा गांधी से काफी प्रभावित थे, इसलिए चंडीगढ़ के इमारतों में गांधी की सोच की झलक दिखती है। हालांकि रिकॉर्ड में ऐसा नही है, लेकिन गांधी जी जिस तरह से गांवों को देखना चाहते थे, चंडीगढ़ को भी ठीक उसी तरह बसाया गया।
विज्ञापन
विज्ञापन


यह भी पढ़ें - कांग्रेस में संकट: सिब्बल के बाद हुड्डा ने की पार्टी में पूर्णकालिक अध्यक्ष की पैरवी, बोले- संभाली जा सकती थी पंजाब की स्थिति 

महात्मा गांधी साधारता में विश्वास रखते थे, इसलिए सादे कपड़े पहनते थे और सादी जिंदगी जीते थे। वह शहरों में ऊंची-ऊंची इमारतों में पक्षधर नही थे। इसी तरह चंडीगढ़ में ऊंची इमारतें नहीं हैं। जितनी भी इमारतें हैं, वो सभी एक समान सामग्री से बनाई गई हैं। चाहे विधानसभा हो, हाईकोर्ट, अफसरों के घर या कर्मचारियों के घर, सभी को सिंपल कंक्रीट से बनाया गया है, वो भी बिना पलस्तर के। साधारण ईंट और पत्थरों का ही इस्तेमाल किया गया है। रंग एक जैसा रखा गया। मार्बल का दूर-दूर तक कहीं इस्तेमाल नहीं हुआ। मार्केट एक समान हैं। 

फर्नीचरों में भी दिखती है गांधी जैसी सादगी
दीपिका गांधी ने कहा कि आर्किटेक्ट पियरे जोनरे की ओर से डिजाइन किए गए फर्नीचरों को देखा जाए तो उसमें भी गांधी जैसी सादगी नजर आती है। पियरे जोनरे ने कुर्सियों का डिजाइन बेहद साधारण रखा। पूरा विश्व उस दौर में स्टील और लैदर की तरफ भाग रहा था, लेकिन पियरे जोनरे ने बैंबू का इस्तेमाल किया। उन्होंने हर जगह के लिए लगभग एक समान डिजाइन के फर्नीचर बनाए। ली कार्बूजिए और पियरे जोनरे एक ऐसे शहर का निर्माण करना चाहते थे, जो अमीर लोगों के साथ गरीबों को भी एक बेहतर जिंदगी जीने का अवसर प्रदान कर सके। गांधी भी यही कल्पना करते थे, इसलिए ये कहना गलत नहीं होगा कि चंडीगढ़ के इमारतों में गांधी की सोच दिखती है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed