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Chandigarh News: लाइसेंस के लिए 8 हजार की रिश्वत, नौ साल बाद क्लर्क दोषी
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चंडीगढ़। सीबीआई की विशेष अदालत ने मंगलवार को भ्रष्टाचार के नौ साल पुराने मामले में बड़ा फैसला सुनाते हुए मनीमाजरा स्थित उप मुख्य विस्फोटक नियंत्रक कार्यालय के क्लर्क श्याम सिंह चौहान को दोषी करार दिया। अदालत अब मामले में 20 अगस्त को सजा सुनाएगी।
लाइसेंस जारी करने के लिए मांगी थी रिश्वत
मामला वर्ष 2017 का है। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के रहने वाले देवेंद्र पाल सिंह ने सीबीआई में शिकायत दी थी। देवेंद्र के पास ब्लास्टर का अनुभव था। उन्हें बताया गया था कि लाइसेंस के लिए किसी इंटरव्यू की जरूरत नहीं होगी और लाइसेंस सीधे उनके घर भेज दिया जाएगा। काफी समय बीतने के बाद भी लाइसेंस घर नहीं पहुंचा तो देवेंद्र ने मनीमाजरा स्थित संबंधित कार्यालय से संपर्क किया। आरोप था कि वहां तैनात क्लर्क श्याम सिंह चौहान ने लाइसेंस जारी करने के बदले 8 हजार रुपये रिश्वत मांगी।
सीबीआई ने बिछाया जाल
रिश्वत देने के बजाय देवेंद्र ने सीबीआई से शिकायत की। शिकायत के आधार पर सीबीआई ने विशेष टीम गठित कर 11 जुलाई 2017 को ट्रैप लगाया। टीम ने श्याम सिंह चौहान को मनीमाजरा कार्यालय के पास ही परिवादी से रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
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दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं
गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और 13 के तहत मामला दर्ज किया। जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट दाखिल की गई और अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए। सुनवाई के दौरान श्याम सिंह चौहान ने खुद को बेकसूर बताते हुए झूठा फंसाने की दलील दी। वहीं, सीबीआई के लोक अभियोजक नरिंदर सिंह ने साक्ष्य पेश करते हुए अभियोजन का मामला साबित होने की बात कही। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया। अब 20 अगस्त को सजा का ऐलान होगा।
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लाइसेंस जारी करने के लिए मांगी थी रिश्वत
मामला वर्ष 2017 का है। हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के रहने वाले देवेंद्र पाल सिंह ने सीबीआई में शिकायत दी थी। देवेंद्र के पास ब्लास्टर का अनुभव था। उन्हें बताया गया था कि लाइसेंस के लिए किसी इंटरव्यू की जरूरत नहीं होगी और लाइसेंस सीधे उनके घर भेज दिया जाएगा। काफी समय बीतने के बाद भी लाइसेंस घर नहीं पहुंचा तो देवेंद्र ने मनीमाजरा स्थित संबंधित कार्यालय से संपर्क किया। आरोप था कि वहां तैनात क्लर्क श्याम सिंह चौहान ने लाइसेंस जारी करने के बदले 8 हजार रुपये रिश्वत मांगी।
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सीबीआई ने बिछाया जाल
रिश्वत देने के बजाय देवेंद्र ने सीबीआई से शिकायत की। शिकायत के आधार पर सीबीआई ने विशेष टीम गठित कर 11 जुलाई 2017 को ट्रैप लगाया। टीम ने श्याम सिंह चौहान को मनीमाजरा कार्यालय के पास ही परिवादी से रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
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दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं
गिरफ्तारी के बाद सीबीआई ने आरोपी के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 7 और 13 के तहत मामला दर्ज किया। जांच पूरी होने के बाद चार्जशीट दाखिल की गई और अदालत ने साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ आरोप तय किए। सुनवाई के दौरान श्याम सिंह चौहान ने खुद को बेकसूर बताते हुए झूठा फंसाने की दलील दी। वहीं, सीबीआई के लोक अभियोजक नरिंदर सिंह ने साक्ष्य पेश करते हुए अभियोजन का मामला साबित होने की बात कही। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अदालत ने आरोपी को दोषी करार दिया। अब 20 अगस्त को सजा का ऐलान होगा।