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ईसीएचएस घोटाले में बड़ा खुलासा: एक ही बैच नंबर से अलग-अलग मरीजों को लगाए इंजेक्शन, अधिकारी संदेह के घेरे में

संवाद न्यूज एजेंसी, चंडीगढ़ Published by: Nivedita Updated Mon, 06 Apr 2026 10:27 AM IST
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सार

फर्जी मरीज बनाकर उन्हें आईसीयू और वेंटिलेटर पर भर्ती दिखाया गया और उनके नाम पर मोटे बिल तैयार किए गए। अस्पतालों के बिल क्लर्क और कुछ निजी एजेंसियां भी इस पूरे नेटवर्क का हिस्सा बताई जा रही हैं।

Major Revelation in ECHS Scam Injections from Same Batch Administered to Different Patients
इंजेक्शन (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

ईसीएचएस (एक्स-सर्विसमैन कंट्रीब्यूटरी हेल्थ स्कीम) में करीब 100 करोड़ रुपये के घोटाले की जांच में चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं। सीबीआई को जांच के दौरान ऐसे रिकॉर्ड मिले हैं जिनमें अलग-अलग मरीजों को लगाए गए इंजेक्शनों का बैच (बॉयल) नंबर एक ही पाया गया। इससे इलाज के नाम पर बड़े पैमाने पर फर्जी बिलिंग और कागजी इलाज की आशंका बढ गई है।

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सूत्रों के अनुसार, कई मरीजों के मेडिकल रिकॉर्ड में लाखों रुपये के महंगे इंजेक्शन दर्ज किए गए हैं जबकि वास्तविकता संदिग्ध है। जांच के दौरान सीबीआई को फर्जी स्टांप, जाली बिल और संदिग्ध दस्तावेज भी मिले हैं। ट्राइसिटी के कई निजी अस्पतालों से दस्तावेज जब्त किए गए हैं और कुछ एजेंसियों की भूमिका भी सामने आई है जो कमीशन के आधार पर मरीज उपलब्ध कराती थीं।
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सीबीआई यह भी खंगाल रही है कि ईसीएचएस के तहत कितने मरीजों का वास्तव में इलाज हुआ और कितनों के नाम पर केवल कागजी रिकॉर्ड बनाकर भुगतान लिया गया। इस मामले में सेक्टर-38 स्थित मंथन हेल्थ केयर, उसके निदेशक डॉ. विकास शर्मा और डॉ. रिंपल गुप्ता, सेक्टर-19 के केयर पार्टनर हार्ट सेंटर और सेक्टर-15 के धर्म अस्पताल के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। धर्म अस्पताल के मालिक डॉ. अजय कुमार अग्रवाल की भूमिका भी जांच के दायरे में है और उन्हें जल्द पूछताछ के लिए तलब किया जा सकता है।

फर्जी मरीजों को आईसीयू और वेंटिलेटर पर दिखाया

जांच में यह भी सामने आया है कि फर्जी मरीज बनाकर उन्हें आईसीयू और वेंटिलेटर पर भर्ती दिखाया गया और उनके नाम पर मोटे बिल तैयार किए गए। अस्पतालों के बिल क्लर्क और कुछ निजी एजेंसियां भी इस पूरे नेटवर्क का हिस्सा बताई जा रही हैं। वहीं जांच में यह भी सामने आया है कि फर्जीवाड़े में ईसीएचएस के कुछ अधिकारियों की भी मिलीभगत है। महंगी दवाइयों के फर्जी बिल और लैब रिपोर्ट तैयार कर भुगतान लिया गया। सूत्रों के अनुसार, यह पूरा नेटवर्क संगठित तरीके से काम कर रहा था। सीबीआई ने छापे के दौरान डॉक्टरों के घरों और अस्पतालों से अहम सबूत बरामद किए हैं। जांच तेज हो गई है और आने वाले दिनों में इस मामले में बड़ी गिरफ्तारियां संभव हैं।

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