सख्त प्रशासकों में होती थी चौटाला की गिनती: डर से अधिकारी रात में डायरी लेकर सोते थे, कभी भी कर लेते थे फोन
उनकी सख्ती से जुड़े कई किस्से हैं। वह इतने सख्त थे कि तीन दिन पहले आई शिकायत के बारे में अधिकारियों से रात में ही पूछ लेते थे कि उस शिकायत का मामला कहां तक पहुंचा। ऐसे कई किस्से अब भी लोगों की जुबां पर चढ़े हैं।
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पूर्व सीएम ओमप्रकाश चौटाला की गिनती कठोर प्रशासकों में होती थी। वह इतने सख्त थे कि तीन दिन पहले आई शिकायत के बारे में अधिकारियों से रात में ही पूछ लेते थे कि उस शिकायत का मामला कहां तक पहुंचा। ऐसे कई किस्से अब भी लोगों की जुबां पर चढ़े हैं। एक बार उन्हें किसी ने कहा कि आपके अफसर देर रात तक पार्टियां करते हैं। इससे प्रदेश की व्यवस्थाएं राम भरोसे हैं। उन्होंने इस बात को गंभीरता से लिया और अगले ही दिन से वह रात में अधिकारियों से अपडेट लेना शुरू कर दिया। वह कभी 11 बजे फोन करते तो कभी 12 बजे फोन कर अधिकारियों से अपडेट लेते रहते थे। बताते हैं कि अधिकारी इतने चौकन्ना हो गए कि वह रात में अपने साथ डायरी लेकर सोते थे।
1978 से ओमप्रकाश चौटाला के साथ जुड़े विधानसभा के पूर्व अतिरिक्त सचिव रामनारायण यादव ने पुराने किस्से को याद करते हुए कहा-एक बार की बात है कि रात में उन्हें किसी ने बताया कि भिवानी नहर में चार दिन से पानी नहीं आया है और इसी नहर से भिवानी की सप्लाई है। चौटाला ने रात में ही एसई को फोन किया और पानी छुड़वाया। यादव बताते हैं कि वह ऐसे नेता थे, जिन्होंने बहुत साधारण परिवारों के सदस्यों को सदन में पहुंचाया है। इनमें बनारसी दास चौसाला, रामकुमार कश्यप जैसे कई नेता शामिल हैं।
कल गुरुग्राम में हुआ था निधन
इंडियन नेशनल लोकदल (इनेलो) के अध्यक्ष और हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला (89) का शुक्रवार को गुरुग्राम में निधन हो गया। हरियाणा सरकार ने पूर्व मुख्यमंत्री के सम्मान में तीन दिवसीय राजकीय शोक और शनिवार को सभी स्कूलों और सरकारी कार्यालयों में सार्वजनिक अवकाश की घोषणा की है।
मेदांता अस्पताल में ली अंतिम सांस
पांच बार हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे और पूर्व उप प्रधानमंत्री देवीलाल के बेटे चौटाला को गुरुग्राम में उनके घर पर दिल का दौरा पड़ा। उन्हें तुरंत अस्पताल ले जाया गया, लेकिन बचाया नहीं जा सका। उन्होंने मेदांता अस्पताल में दोपहर करीब 12 बजे अंतिम सांस ली। हरियाणा के एक प्रमुख राजनीतिक परिवार से ताल्लुक रखने वाले और एक प्रमुख क्षेत्रीय पार्टी का चेहरा रहे चौटाला पिछले कुछ समय से उम्र संबंधी स्वास्थ्य समस्याओं का सामना कर रहे थे।
हरी पगड़ी ओमप्रकाश चौटाला की पहचान बन गई
उनकी गिनती उन नेताओं में होती थी जो जमीनी कार्यकर्ताओं को नाम भी याद रखते थे। कई बार तो कार्यकर्ताओं के घर में रुक जाते थे। हरी पगड़ी ओमप्रकाश चौटाला की पहचान बन गई थी। वे सात बार विधायक बने और एक बार राज्यसभा के सांसद भी रहे। उनसे जुड़े लोग उन्हें हरियाणा की राजनीति का बूढ़ा शेर कहने लगे थे। ओपी चौटाला की पत्नी स्नेह लता का पांच साल पहले निधन हो गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने चौटाला के निधन पर शोक जताते हुए कहा, वह प्रदेश की राजनीति में वर्षों तक सक्रिय रहे और उन्होंने लगातार चौधरी देवी लाल के काम को आगे बढ़ाने का प्रयास किया।
आज दोपहर तीन बजे सिरसा के पैतृक गांव में अंतिम संस्कार
गुरुग्राम के अस्पताल से शाम करीब 4:30 बजे उनके परिजन पार्थिव शरीर लेकर सिरसा के गांव तेजाखेड़ा के लिए रवाना हो गए। शनिवार को उनका अंतिम संस्कार पैतृक गांव में होगा। पार्थिव शरीर शनिवार सुबह आठ बजे से दोपहर दो बजे तक अंतिम दर्शनों के लिए रखा जाएगा। इसके बाद तीन बजे अंतिम संस्कार होगा। अंतिम यात्रा के दौरान उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और सीएम नायब सिंह सैनी शामिल हो सकते हैं।
आज बंद रहेंगे सभी स्कूल
हरियाणा सरकार ने शनिवार को सभी स्कूलों में छुट्टी की घोषणा की है क्योंकि पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला के निधन के मद्देनजर राज्य तीन दिवसीय शोक मना रहा है।
उम्र के आखिरी पड़ाव में पास की 10-12वीं की परीक्षा
2019 में जब वह तिहाड़ जेल में बंद थे तो 84 साल की उम्र में उन्होंने दसवीं की परीक्षा दी, मगर अंग्रेजी का पेपर नहीं दे पाए थे। 86 की उम्र में अगस्त 2021 में उन्होंने अंग्रेजी की सप्लीमेंट्री परीक्षा दी। मई 2022 में परिणाम आया तो उन्हें 88 फीसदी अंक हासिल हुए। हालांकि इस दौरान उनका 12वीं का रुका परिणाम भी जारी कर दिया गया। 12वीं की परीक्षा भी उन्होंने पास कर ली थी।
पिता देवीलाल का रिकॉर्ड तोड़ा, पांच बार सीएम रहे पर
ओमप्रकाश चौटाला को राजनीति की विरासत पिता देवीलाल से मिली थी। हालांकि मुख्यमंत्री बनने के मामलों में उन्होंने अपने पिता का ही रिकॉर्ड तोड़ दिया। ओमप्रकाश चौटाला 5 बार हरियाणा के मुख्यमंत्री रहे, जबकि देवीलाल सिर्फ 2 बार इस कुर्सी पर बैठ पाए। देवीलाल के पास कुल चार साल हरियाणा की बागडोर रही, जबकि चौटाला के पास करीब 6 साल तक। हालांकि पांच बार सीएम रहने के बावजूद केवल एक बार पांच साल का कार्यकाल पूरा कर पाए।
चौटाला के जेल जाने के बाद उबर नहीं पाई इनेलो
ओमप्रकाश चौटाला की जनता में कितनी पकड़ थी, इसका इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि जब से वे जेल गए, तब से इनेलो उबर नहीं पाई। चुनाव दर चुनाव इनेलो का प्रदर्शन लगातार गिरता रहा। पार्टी कार्यकर्ताओं को हर चुनाव में उनकी कमी खलती रही। हालांकि इस उम्र में भी वह रैली करने के लिए तैयार रहते थे। पार्टी के प्रत्येक कार्यक्रम में वह हाजिरी लगाते थे।