चंडीगढ़ कैपिटल कांप्लेक्स: ली कार्बूजिए के डिजाइन पर 48 साल बाद बनेगा शहीदी स्मारक, हेरिटेज कमेटी से मिली मंजूरी
कैपिटल कांप्लेक्स को यूनेस्को से वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा प्राप्त है, इसलिए यहां बनने वाले स्मारक पर विश्वभर की नजर होगी। स्मारक कैपिटल कांप्लेक्स में स्थित रैंप के पास पिंक स्टोन को जोड़कर बनाया जाएगा।
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चंडीगढ़ को बसाने वाले फ्रेंच आर्किटेक्ट ली कार्बूजिए ने कैपिटल कांप्लेक्स में एक शहीदी स्मारक बनाने का सपना देखा था। उन्होंने इसके लिए अपने हाथों से डिजाइन बनाया था। 1965 में उनकी मृत्यु के बाद इस स्मारक को बनाने के लिए वर्ष 1973 में काम शुरू हुआ, लेकिन पूरा नहीं हो पाया। अब करीब 48 साल बाद ली कार्बूजिए के सपने को पूरा किया जाएगा। इसके लिए हेरिटेज कमेटी से मंजूरी मिल चुकी है।
ली कार्बूजिए ने कैपिटल कांप्लेक्स में ओपन हैंड, जिओमेट्रिक हिल, टॉवर ऑफ शैडो और शहीदी स्मारक बनाने का सपना देखा था। यह शहीदी स्मारक वर्ष 1947 की आजादी की जंग में शहीद हुए लोगों की याद में बनाया जाना है। इसमें ब्रिटिश साम्राज्य का पतन और भारत रूपी शेर के उदय को दर्शाया जाएगा। स्मारक में पिलर रूपी ब्रिटिश साम्राज्य को गिरते हुए दिखाया जाएगा। ली कार्बूजिए ने ये भी बताया था कि स्मारक को बनाने में धौलपुर के पत्थरों का इस्तेमाल किया जाए।
कार्बूजिए की मृत्यु के बाद वर्ष 1973 में विश्व विख्यात मूर्तिकार शंखो चौधरी की एक कमेटी बनाई गई। उन्होंने भी इस पर काम किया। इसके बाद विख्यात मूर्तिकार बीएन चुग ने भी काफी प्रयास किए, लेकिन किन्हीं कारणों से यह स्मारक नहीं बन पाया। इसके बाद कई साल तक इस योजना पर काम नहीं हुआ। प्रशासक वीपी सिंह बदनौर और उनके तत्कालीन सलाहकार मनोज परिदा के प्रयासों के बाद दो साल पहले एक कमेटी बनाई गई, जिसमें पीसीएस सौरभ अरोड़ा, आर्किटेक्ट विभाग के राजीव मेहता, ललित कला अकादमी के भीम मल्होत्रा, आर्ट कालेज के प्रोफेसर राजेश शर्मा और विख्यात मूर्तिकार डॉ. विशाल भटनागर को शामिल किया गया। कमेटी के काम के बाद स्मारक बनाने के लिए सभी जरूरतें पूरी कर ली गई हैं। कला व संस्कृति विभाग ने टेंडर दस्तावेज भी तैयार कर लिए हैं।
वर्ल्ड हेरिटेज साइट है कैपिटल कांप्लेक्स, इसलिए स्मारक बेहद अहम
कला व साहित्य विभाग के निदेशक सौरभ अरोड़ा ने बताया कि कैपिटल कांप्लेक्स को यूनेस्को से वर्ल्ड हेरिटेज साइट का दर्जा प्राप्त है, इसलिए यहां बनने वाले स्मारक पर विश्वभर की नजर होगी। कमेटी में शामिल मूर्तिकार विशाल भटनागर ने बनाया कि यह स्मारक कैपिटल कांप्लेक्स में स्थित रैंप के पास पिंक स्टोन को जोड़कर बनाया जाएगा। उन्होंने बताया कि यह एक बड़ा प्रोजेक्ट है, जिस पर कमेटी करीब दो साल से काम कर रही है। उन्होंने ली कार्बूजिए के डिजाइन को समझा और और कैसे इस स्मारक को बनाया जाएगा, इसका स्केल मॉडल तैयार किया, जिसे सब कमेटी ने पास दिया। डॉ. विशाल ने बताया कि टीम सैंपल लेकर बयाना गई थी और पत्थरों को देखा। अब सब कुछ तय कर लिया गया है।
वर्ष 1973 के बाद से यह स्मारक अधूरा है। हेरिटेज कमेटी की मंजूरी मिलने के बाद अब जल्द इसके लिए टेंडर जारी किया जाएगा। यह स्मारक पत्थरों को जोड़कर बनाया जाएगा। इसके लिए टीम के साथ दो बार बयाना जा चुका हूं। यह ली कार्बूजिए का सपना है। इसलिए चाहता हूं कि इसे जल्द पूरा करूं। -सौरभ अरोड़ा, निदेशक, कला व साहित्य विभाग