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Chandigarh News: ओटीएस से मेट्रो तक बड़े फैसलों की तैयारी
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चंडीगढ़। चंडीगढ़ प्रशासन की एडमिनिस्ट्रेटर एडवाइजरी काउंसिल की बैठक 12 मार्च को होने जा रही है। बैठक की अध्यक्षता प्रशासक गुलाब चंद कटारिया करेंगे। इस दौरान शहर के विकास, व्यापार, आवास और बुनियादी ढांचे से जुड़े कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है।
बैठक में चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के मकानों के लिए वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) पॉलिसी लाने का मुद्दा प्रमुख रूप से उठाया जाएगा। इस पॉलिसी के जरिए उन मकान मालिकों को राहत देने की मांग की जाएगी जिनके मकानों में नियमों के उल्लंघन या तकनीकी कारणों से लंबे समय से मामले लंबित हैं। माना जा रहा है कि ओटीएस पॉलिसी लागू होने से हजारों परिवारों को राहत मिल सकती है। इसके अलावा चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के 50 वर्ष से अधिक पुराने फ्लैटों के पुनर्विकास (री-डेवलपमेंट) का मुद्दा भी बैठक के एजेंडे में रहेगा।
करीब एक वर्ष बाद एडवाइजरी काउंसिल की पूर्ण बैठक होने जा रही है। इससे पहले 17 मार्च 2025 को काउंसिल की बैठक हुई थी। हाल ही में केवल 10 कमेटियों के चेयरमैन की बैठक आयोजित की गई थी। इस बार की बैठक में विभिन्न सामाजिक संगठनों, व्यापारिक संस्थाओं, उद्योग संगठनों और अन्य प्रतिनिधियों सहित करीब 60 सदस्य भाग लेंगे। बैठक में शहर के विकास और प्रशासनिक नीतियों से जुड़े कई प्रस्ताव और सुझाव प्रशासन के समक्ष रखे जाएंगे।
मेट्रो और रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर भी चर्चा
बैठक में शहर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए मेट्रो प्रोजेक्ट और रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर भी चर्चा होगी। क्राफ्ड के चेयरमैन हितेश पुरी के अनुसार शहर में बेहतर सार्वजनिक परिवहन प्रणाली विकसित करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि मेट्रो परियोजना के साथ बस प्रणाली को भी मजबूत किया जाए ताकि मुख्य मार्गों पर बड़ी बसें और आंतरिक सड़कों पर छोटी बसें चलाकर ट्रैफिक समस्या को कम किया जा सके।
लीज टू फ्रीहोल्ड और एफएआर बढ़ाने का प्रस्ताव
बैठक में लीज होल्ड संपत्तियों को फ्रीहोल्ड में बदलने का मुद्दा भी उठेगा। धनास और सेक्टर-39 जैसे क्षेत्रों में कई व्यावसायिक संपत्तियां लंबे समय से बिक्री के लिए रखी गई हैं लेकिन ऊंची लीज कीमतों के कारण उन्हें खरीदार नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में इन्हें फ्री होल्ड में बदलने से बिक्री बढ़ने और प्रशासन को राजस्व मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा फ्लोर एरिया रेश्यो (एफएआर) बढ़ाने की मांग भी रखी जाएगी ताकि छोटे प्लॉट मालिकों और उद्योगों को अतिरिक्त निर्माण की सुविधा मिल सके। वर्ष 2006 की कन्वर्जन पॉलिसी में छोटे प्लॉटों को शामिल नहीं किया गया था जबकि मूल योजना में उन्हें शामिल करने का प्रस्ताव था। छोटे प्लॉटों के लिए पॉलिसी में संशोधन और अतिरिक्त एफएआर के साथ ऊपरी मंजिलों पर सामान रखने की अनुमति देने की मांग भी उठेगी।
लैंड पूलिंग पॉलिसी और उद्योगों के मुद्दे
शहर के सुनियोजित विकास के लिए लैंड पूलिंग पॉलिसी लागू करने का मुद्दा भी बैठक में उठेगा। शहर के गांवों में कई स्थानों पर जमीन अनियमित रूप से विकसित हो रही है। यदि लैंड पूलिंग पॉलिसी लागू होती है तो योजनाबद्ध विकास के साथ प्रशासन को अतिरिक्त राजस्व भी प्राप्त हो सकता है। इसके अलावा लघु उद्योगों को सीधे ग्राहकों को उत्पाद बेचने की अनुमति (बी-टू-सी बिक्री) देने का मुद्दा भी उठाया जाएगा। उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि पहले उन्हें यह अनुमति थी, लेकिन बाद में इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया, जबकि 2023 की एडवाइजरी काउंसिल बैठक में इसे लेकर सिफारिश की गई थी।
स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े प्रस्ताव भी एजेंडे में
बैठक में स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होगी। शहर में प्रस्तावित 2000 बेड के अस्पताल के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार करने की मांग उठेगी। इसके साथ ही सेक्टर-53 में ट्रॉमा सेंटर और एक मेडिकल यूनिवर्सिटी स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा जाएगा।
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बैठक में चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के मकानों के लिए वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) पॉलिसी लाने का मुद्दा प्रमुख रूप से उठाया जाएगा। इस पॉलिसी के जरिए उन मकान मालिकों को राहत देने की मांग की जाएगी जिनके मकानों में नियमों के उल्लंघन या तकनीकी कारणों से लंबे समय से मामले लंबित हैं। माना जा रहा है कि ओटीएस पॉलिसी लागू होने से हजारों परिवारों को राहत मिल सकती है। इसके अलावा चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के 50 वर्ष से अधिक पुराने फ्लैटों के पुनर्विकास (री-डेवलपमेंट) का मुद्दा भी बैठक के एजेंडे में रहेगा।
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करीब एक वर्ष बाद एडवाइजरी काउंसिल की पूर्ण बैठक होने जा रही है। इससे पहले 17 मार्च 2025 को काउंसिल की बैठक हुई थी। हाल ही में केवल 10 कमेटियों के चेयरमैन की बैठक आयोजित की गई थी। इस बार की बैठक में विभिन्न सामाजिक संगठनों, व्यापारिक संस्थाओं, उद्योग संगठनों और अन्य प्रतिनिधियों सहित करीब 60 सदस्य भाग लेंगे। बैठक में शहर के विकास और प्रशासनिक नीतियों से जुड़े कई प्रस्ताव और सुझाव प्रशासन के समक्ष रखे जाएंगे।
मेट्रो और रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर भी चर्चा
बैठक में शहर में बढ़ते ट्रैफिक दबाव को देखते हुए मेट्रो प्रोजेक्ट और रैपिड ट्रांसपोर्ट सिस्टम पर भी चर्चा होगी। क्राफ्ड के चेयरमैन हितेश पुरी के अनुसार शहर में बेहतर सार्वजनिक परिवहन प्रणाली विकसित करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि मेट्रो परियोजना के साथ बस प्रणाली को भी मजबूत किया जाए ताकि मुख्य मार्गों पर बड़ी बसें और आंतरिक सड़कों पर छोटी बसें चलाकर ट्रैफिक समस्या को कम किया जा सके।
लीज टू फ्रीहोल्ड और एफएआर बढ़ाने का प्रस्ताव
बैठक में लीज होल्ड संपत्तियों को फ्रीहोल्ड में बदलने का मुद्दा भी उठेगा। धनास और सेक्टर-39 जैसे क्षेत्रों में कई व्यावसायिक संपत्तियां लंबे समय से बिक्री के लिए रखी गई हैं लेकिन ऊंची लीज कीमतों के कारण उन्हें खरीदार नहीं मिल पा रहे हैं। ऐसे में इन्हें फ्री होल्ड में बदलने से बिक्री बढ़ने और प्रशासन को राजस्व मिलने की उम्मीद है। इसके अलावा फ्लोर एरिया रेश्यो (एफएआर) बढ़ाने की मांग भी रखी जाएगी ताकि छोटे प्लॉट मालिकों और उद्योगों को अतिरिक्त निर्माण की सुविधा मिल सके। वर्ष 2006 की कन्वर्जन पॉलिसी में छोटे प्लॉटों को शामिल नहीं किया गया था जबकि मूल योजना में उन्हें शामिल करने का प्रस्ताव था। छोटे प्लॉटों के लिए पॉलिसी में संशोधन और अतिरिक्त एफएआर के साथ ऊपरी मंजिलों पर सामान रखने की अनुमति देने की मांग भी उठेगी।
लैंड पूलिंग पॉलिसी और उद्योगों के मुद्दे
शहर के सुनियोजित विकास के लिए लैंड पूलिंग पॉलिसी लागू करने का मुद्दा भी बैठक में उठेगा। शहर के गांवों में कई स्थानों पर जमीन अनियमित रूप से विकसित हो रही है। यदि लैंड पूलिंग पॉलिसी लागू होती है तो योजनाबद्ध विकास के साथ प्रशासन को अतिरिक्त राजस्व भी प्राप्त हो सकता है। इसके अलावा लघु उद्योगों को सीधे ग्राहकों को उत्पाद बेचने की अनुमति (बी-टू-सी बिक्री) देने का मुद्दा भी उठाया जाएगा। उद्योग प्रतिनिधियों का कहना है कि पहले उन्हें यह अनुमति थी, लेकिन बाद में इस पर प्रतिबंध लगा दिया गया, जबकि 2023 की एडवाइजरी काउंसिल बैठक में इसे लेकर सिफारिश की गई थी।
स्वास्थ्य और शिक्षा से जुड़े प्रस्ताव भी एजेंडे में
बैठक में स्वास्थ्य और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा होगी। शहर में प्रस्तावित 2000 बेड के अस्पताल के लिए स्पष्ट रोडमैप तैयार करने की मांग उठेगी। इसके साथ ही सेक्टर-53 में ट्रॉमा सेंटर और एक मेडिकल यूनिवर्सिटी स्थापित करने का प्रस्ताव भी रखा जाएगा।