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Hindi News ›   Chhattisgarh ›   Ambikapur News ›   Social boycott during life, loved ones did not come even after death; Mayor conducted last rites in Ambikapur

Ambikapur News: जीते-जी मिला सामाजिक बहिष्कार, मौत के बाद भी नहीं आये अपने; महापौर ने कराया अंतिम संस्कार

Fri, 31 Jul 2026 08:51 PM IST
अंबिकापुर ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, अंबिकापुर
अमर उजाला नेटवर्क, अंबिकापुर Published by: अंबिकापुर ब्यूरो Updated Fri, 31 Jul 2026 08:51 PM IST
सार

सरगुजा जिला में अंबिकापुर शहर के शंकरनगर में मानवता और संवेदनशीलता की मिसाल उस समय देखने को मिली, जब 75 वर्षीय एक वृद्ध महिला के निधन के बाद परिजन और समाज के लोग अंतिम संस्कार के लिए आगे नहीं आए।

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Social boycott during life, loved ones did not come even after death; Mayor conducted last rites in Ambikapur
मृतक महिला का अंतिम संस्कार कराते महापौर। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शंकरनगर में मानवता की मिसाल देखने को मिली, जहां 75 वर्षीय महिला के निधन के बाद जब परिजन और समाज अंतिम संस्कार के लिए आगे नहीं आए, तब महापौर मंजूषा भगत ने स्वयं जिम्मेदारी संभालते हुए नगर निगम के सहयोग से पूरे विधि-विधान और सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कराया।
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सरगुजा जिले के अंबिकापुर शहर स्थित शंकरनगर में एक भावुक कर देने वाला मामला सामने आया है। यहां 75 वर्षीय सावित्री बाई के निधन के बाद उनके अंतिम संस्कार के लिए न तो परिवार का कोई सदस्य पहुंचा और न ही समाज के लोग। ऐसे समय में अंबिकापुर की महापौर मंजूषा भगत ने आगे बढ़कर इंसानियत की मिसाल पेश की।
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जानकारी के अनुसार, सावित्री बाई के पहले पति का कई वर्ष पहले निधन हो गया था। बाद में उन्होंने दूसरे समाज के एक व्यक्ति से प्रेम विवाह कर लिया था। इस फैसले के बाद परिजनों और समाज ने उनसे दूरी बना ली और उनका सामाजिक बहिष्कार कर दिया। यह स्थिति उनके जीवन के अंतिम समय तक बनी रही।
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निधन के बाद भी नहीं पहुंचे परिजन
महिला के निधन की सूचना मिलने के बाद भी कोई रिश्तेदार या समाज का प्रतिनिधि अंतिम संस्कार की व्यवस्था के लिए सामने नहीं आया। बताया गया कि जिनके साथ उन्होंने दूसरा विवाह किया था, वे अंतिम संस्कार करना चाहते थे, लेकिन पारिवारिक परिस्थितियों के कारण ऐसा नहीं कर सके। मृतका की कोई संतान भी नहीं थी।

महापौर ने संभाली जिम्मेदारी
घटना की जानकारी मिलते ही महापौर मंजूषा भगत शंकरनगर पहुंचीं। उन्होंने नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों के सहयोग से अंतिम संस्कार की पूरी व्यवस्था कराई। इतना ही नहीं, वे स्वयं अंतिम संस्कार की प्रक्रिया के दौरान मौजूद रहीं और महिला को पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दिलाई।


महापौर मंजूषा भगत ने कहा कि किसी व्यक्ति की मृत्यु के बाद भी यदि उसे अपनों का साथ न मिले, तो यह समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि अंतिम संस्कार केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रतीक भी है। महापौर की इस संवेदनशील पहल की शहरभर में सराहना हो रही है। लोगों का कहना है कि ऐसे समय में आगे बढ़कर जिम्मेदारी निभाना समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है।

 

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