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अंबिकापुर: हमाम हुसैन ने संघर्ष और मेहनत की पेश की मिसाल, दूध बेचते नहीं छोड़ा सपना, जीता राष्ट्रीय स्वर्ण

अमर उजाला नेटवर्क, अम्बिकापुर Published by: Digvijay Singh Updated Wed, 01 Apr 2026 06:31 PM IST
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सार

जम्मू-कश्मीर के 28 वर्षीय पहलवान हमाम हुसैन ने संघर्ष और मेहनत की मिसाल पेश करते हुए खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में अपने करियर का पहला राष्ट्रीय स्वर्ण पदक हासिल किया है।

Hamam Hussain Sets an Example of Struggle and Hard Work Never Abandoned His Dream While Selling Milk Wins Nat
हमाम हुसैन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

जम्मू-कश्मीर के 28 वर्षीय पहलवान हमाम हुसैन ने संघर्ष और मेहनत की मिसाल पेश करते हुए खेलो इंडिया ट्राइबल गेम्स-2026 में अपने करियर का पहला राष्ट्रीय स्वर्ण पदक हासिल किया है। पुरुषों के 79 किलोग्राम फ्रीस्टाइल वर्ग में उन्होंने हिमाचल प्रदेश के मोहित कुमार को हराकर यह उपलब्धि अपने नाम की।

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जम्मू के जोरावर गांव निवासी हमाम हुसैन का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। पिता के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके और बड़े भाई के कंधों पर आ गई। दोनों भाई घर-घर जाकर दूध बेचकर परिवार का पालन-पोषण करते रहे, लेकिन इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद हमाम ने कुश्ती का अभ्यास नहीं छोड़ा। हमाम बताते हैं कि उनके बड़े भाई भी पहलवान रहे हैं, लेकिन पारिवारिक जिम्मेदारियों के चलते उन्हें कुश्ती छोड़नी पड़ी। इसके बावजूद उन्होंने हमाम को हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया और दंगलों में हिस्सा लेने के लिए प्रोत्साहित किया।
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सीमित संसाधनों के बीच हमाम रोजाना अपने गांव से करीब 20 किलोमीटर दूर मिट्टी के अखाड़े में अभ्यास करने जाते हैं। वहीं मैट ट्रेनिंग के लिए उन्हें लगभग 40 किलोमीटर दूर जम्मू तक का सफर तय करना पड़ता है। सुविधाओं के अभाव में भी उन्होंने अपने जुनून को कायम रखा। उन्होंने बताया कि गांव में बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं और कोचिंग की कमी है, लेकिन वरिष्ठ पहलवानों के मार्गदर्शन से वे अभ्यास जारी रखते हैं। उनका मानना है कि यदि ग्रामीण क्षेत्रों में बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, तो यहां के खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं। हमाम हुसैन के लिए यह स्वर्ण पदक केवल जीत नहीं, बल्कि वर्षों की मेहनत, त्याग और संघर्ष का परिणाम है।

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