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Balod News: तांदुला नदी को अतिक्रमण मुक्त कराने के लिए चला बुलडोजर, विरोध कर रहे आंदोलनकारी गिरफ्तार

अमर उजाला नेटवर्क, बालोद Published by: बालोद ब्यूरो Updated Sun, 24 May 2026 01:57 PM IST
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सार

बालोद में तांदुला नदी को पुनर्जीवित करने के लिए प्रशासन ने नदी किनारे अवैध कब्जों पर बुलडोजर कार्रवाई की। विरोध कर रहे किसानों और संगठनों के पदाधिकारियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। कार्रवाई के बाद इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है।

Agitator arrested for using bulldozer to free Tandula river from encroachment in Balod
मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी और अधिकारी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

बालोद के तांदुला नदी के अस्तित्व को बचाने और जलस्रोत को पुनर्जीवित करने के लिए बालोद जिला प्रशासन ने रविवार तड़के एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में नदी किनारे अवैध रूप से खेती कर रहे लगभग 14 किसानों के कब्जों को बुलडोजर चलाकर जमींदोज कर दिया। कार्रवाई का उग्र विरोध कर रहे किसानों, ‘जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी और ‘छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना’ के आला पदाधिकारियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर थाने भेज दिया है। इस कार्रवाई के बाद से पूरे इलाके में तनाव की स्थिति है और प्रभावित क्षेत्र छावनी में तब्दील हो चुका है।

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ग्रामीणों ने लगाया भेदभाव का आरोप
कार्रवाई को लेकर प्रभावित ग्रामीणों और किसानों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन पर दुर्भावनापूर्ण और भेदभावपूर्ण रवैया अपनाने का खुला आरोप लगाया है। किसानों का कहना है कि उन्हें संभलने का मौका भी नहीं दिया गया। दूसरी ओर, मामले की गंभीरता को देखते हुए तहसीलदार ने बताया कि अतिक्रमणकारियों को एक बार पहले भी हिदायत और नोटिस दिया जा चुका था। इस बार पुनः नियमानुसार नोटिस जारी कर 24 घंटे का अंतिम समय दिया गया था, जिसके पूरा होते ही यह वैधानिक कार्रवाई की गई है।

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नेताओं की गिरफ्तारी पर आक्रोश
कार्रवाई की भनक लगते ही ‘जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी’ और ‘छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना’ के पदाधिकारी बड़ी संख्या में किसानों के समर्थन में मौके पर पहुंच गए और बुलडोजर के सामने खड़े होकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। कानून-व्यवस्था बिगड़ती देख पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए आंदोलनकारियों सहित संगठनों के नेताओं को हिरासत में ले लिया। संगठन के पदाधिकारियों ने प्रशासन की इस कार्रवाई को रसूखदारों को बचाने और गरीबों को प्रताड़ित करने वाली दोहरी नीति करार दिया है

बालोद प्रशासन लगातार गरीब और कमजोर वर्ग के लोगों के खिलाफ एकतरफा और अन्यायपूर्ण कार्रवाई कर रहा है। सदर रोड पर रसूखदारों द्वारा बरसों से किए गए बड़े पैमाने के अवैध निर्माण पर प्रशासन ने रहस्यमयी चुप्पी साध रखी है, लेकिन गरीबों के छोटे-छोटे आशियानों और खेतों को उजाड़ने के लिए मात्र 24 घंटे का नोटिस देकर बुलडोजर भेज दिया गया। -दानी साहू, जोहार छत्तीसगढ़ पार्टी एवं छत्तीसगढ़िया क्रांति सेना


चप्पे-चप्पे पर मुस्तैद रही पुलिस और प्रशासनिक टीम
अतिक्रमण विरोधी अभियान के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने पहले से ही घेराबंदी कर रखी थी। मौके पर बालोद थाना प्रभारी के अलावा गुंडरदेही, कंवर और अन्य थानों के प्रभारी भारी पुलिस बल के साथ मोर्चे पर डटे रहे। इसके साथ ही तहसीलदार, नायब तहसीलदार, राजस्व निरीक्षक (RI) और पटवारियों की पूरी संयुक्त टीम पैनी नजर बनाए हुए थी।
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प्रशासन का पक्ष
प्रशासनिक अधिकारियों ने इस कार्रवाई को पूरी तरह नियमसंगत और पर्यावरण के हित में बताया है। राजस्व विभाग की जांच और आधुनिक ड्रोन सर्वे में कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जिसके आधार पर यह कार्रवाई अनिवार्य हो गई थी सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, जो तांदुला नदी मूल रूप से 220 मीटर चौड़ी थी, वह लगातार होते अवैध कब्जों और बेतरतीब खेती के कारण कई हिस्सों में सिकुड़कर मात्र 80 से 90 मीटर ही रह गई थी। इससे नदी का प्राकृतिक प्रवाह पूरी तरह बाधित हो रहा था। जांच में यह भी प्रमाणित हुआ है कि अतिक्रमण करने वाले अधिकांश लोग गरीब या भूमिहीन नहीं हैं। उनकी अन्य स्थानों पर स्वयं की कृषि भूमि है और वे किराना दुकान, सैलून जैसे मुख्य व्यवसायों से अच्छी आजीविका कमा रहे हैं। राजस्व जांच में यह गंभीर बात भी सामने आई है कि कुछ रसूखदार लोगों ने नदी की इस सरकारी जमीन पर कब्जा कर इसे भारी मुनाफे पर दूसरों को 'रेगहा' (बटाई/किराए) पर दे रखा था।

फसल कटने का इंतजार कर रहा था प्रशासन
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि कुछ महीने पहले भी इस क्षेत्र से अवैध कब्जा हटाने की मुहिम शुरू की गई थी। लेकिन उस समय खेतों में ग्रीष्मकालीन धान की फसल खड़ी थी, जिसे देखते हुए मानवीय दृष्टिकोण के आधार पर कार्रवाई को अस्थाई रूप से रोक दिया गया था। अब चूंकि धान की फसल पूरी तरह कट चुकी है, इसलिए बिना कोई वक्त गंवाए नदी को मुक्त कराने के लिए यह कदम उठाया गया है। प्रशासन ने साफ किया है कि तांदुला नदी के अस्तित्व और पर्यावरण से खिलवाड़ किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और यह अभियान आगे भी जारी रहेगा।
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