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Chhattisgarh: बेमेतरा में DAP का अत्यधिक उपयोग, बना देश का नंबर-1 जिला; जागरूकता अभियान शुरू
अमर उजाला नेटवर्क, बेमेतरा
Published by: बेमेतरा ब्यूरो
Updated Wed, 13 May 2026 04:13 PM IST
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सार
बेमेतरा जिला देश के सर्वाधिक डीएपी उर्वरक उपयोग करने वाले 100 जिलों में एकमात्र है। वर्ष 2025 में जिले में 27,381 मीट्रिक टन डीएपी की खपत दर्ज की गई, जो प्रदेश में सबसे अधिक थी। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रजनीश श्रीवास्तव और तोषण कुमार ठाकुर ने किसानों को संतुलित उर्वरक उपयोग और एसएसपी, टीएसपी, एनपीके जैसे वैकल्पिक उर्वरकों की जानकारी दी, ताकि उत्पादन बढ़े और मिट्टी की सेहत सुरक्षित रहे।
किसानों को जागरूक किया जा रहा है
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विस्तार
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी देश के सर्वाधिक डीएपी उर्वरक उपयोग करने वाले 100 जिलों की सूची में छत्तीसगढ़ का बेमेतरा जिला एकमात्र जिला बनकर उभरा है। वर्ष 2025 में जिले में 27 हजार 381 मीट्रिक टन डीएपी उर्वरक की खपत दर्ज की गई, जो प्रदेश में सबसे अधिक रही। लगातार बढ़ते डीएपी उपयोग और मिट्टी की बदलती गुणवत्ता को देखते हुए भारत सरकार ने जिले में 27 जून तक “संतुलित उर्वरक उपयोग विशेष जागरूकता अभियान” शुरू किया है।
कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केन्द्र बेमेतरा द्वारा राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी “विकसित कृषि संकल्प अभियान” के साथ मिलकर गांव-गांव किसानों को वैज्ञानिक खेती और संतुलित उर्वरक उपयोग के लिए जागरूक किया जा रहा है। इसके तहत विभिन्न ग्राम पंचायतों में प्रशिक्षण शिविर, कृषक संगोष्ठी, विधि प्रदर्शन और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
मिट्टी परीक्षण एवं अनुसंधान रिपोर्ट के अनुसार बेमेतरा जिले की कृषि भूमि में फास्फोरस और पोटाश की मात्रा माध्यम से उच्च स्तर पर पाई गई है, जबकि नत्रजन और जैविक कार्बन की उपलब्धता निम्न से मध्यम स्तर की है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार एक ही प्रकार के उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता प्रभावित हो रही है।
कृषि तकनीक अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (अटारी) आईसीएआर जबलपुर से पहुंचे वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रजनीश श्रीवास्तव ने किसानों को फसलों की बेहतर वृद्धि और उत्पादन के लिए आवश्यक प्रमुख एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संतुलित उर्वरक उपयोग से उत्पादन बढ़ाने के साथ मिट्टी की सेहत भी सुरक्षित रखी जा सकती है।
वहीं तोषण कुमार ठाकुर ने किसानों को यूरिया और डीएपी के साथ-साथ एसएसपी, टीएसपी और एनपीके जैसे वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जरूरत से ज्यादा रासायनिक उर्वरक उपयोग से पर्यावरण और मिट्टी दोनों पर दुष्प्रभाव पड़ता है, इसलिए वैज्ञानिक सलाह के अनुसार उर्वरकों का उपयोग जरूरी हैं।
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कृषि विभाग और कृषि विज्ञान केन्द्र बेमेतरा द्वारा राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी “विकसित कृषि संकल्प अभियान” के साथ मिलकर गांव-गांव किसानों को वैज्ञानिक खेती और संतुलित उर्वरक उपयोग के लिए जागरूक किया जा रहा है। इसके तहत विभिन्न ग्राम पंचायतों में प्रशिक्षण शिविर, कृषक संगोष्ठी, विधि प्रदर्शन और जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
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मिट्टी परीक्षण एवं अनुसंधान रिपोर्ट के अनुसार बेमेतरा जिले की कृषि भूमि में फास्फोरस और पोटाश की मात्रा माध्यम से उच्च स्तर पर पाई गई है, जबकि नत्रजन और जैविक कार्बन की उपलब्धता निम्न से मध्यम स्तर की है। विशेषज्ञों का मानना है कि लगातार एक ही प्रकार के उर्वरकों के अत्यधिक उपयोग से मिट्टी की प्राकृतिक उर्वरता प्रभावित हो रही है।
कृषि तकनीक अनुप्रयोग अनुसंधान संस्थान (अटारी) आईसीएआर जबलपुर से पहुंचे वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रजनीश श्रीवास्तव ने किसानों को फसलों की बेहतर वृद्धि और उत्पादन के लिए आवश्यक प्रमुख एवं सूक्ष्म पोषक तत्वों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि संतुलित उर्वरक उपयोग से उत्पादन बढ़ाने के साथ मिट्टी की सेहत भी सुरक्षित रखी जा सकती है।
वहीं तोषण कुमार ठाकुर ने किसानों को यूरिया और डीएपी के साथ-साथ एसएसपी, टीएसपी और एनपीके जैसे वैकल्पिक उर्वरकों के उपयोग की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जरूरत से ज्यादा रासायनिक उर्वरक उपयोग से पर्यावरण और मिट्टी दोनों पर दुष्प्रभाव पड़ता है, इसलिए वैज्ञानिक सलाह के अनुसार उर्वरकों का उपयोग जरूरी हैं।