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CG News: स्मार्ट एजुकेशन दावों की खुली पोल, बिना बिजली-पंखा पढ़ने को मजबूर 867 मासूम, मीडिया से जागी अफसरशाही

Sat, 25 Jul 2026 01:39 PM IST
बीजापुर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीजापुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीजापुर Published by: बीजापुर ब्यूरो Updated Sat, 25 Jul 2026 01:39 PM IST
सार

867 विद्यार्थियों वाले डीएवी स्कूल की बदहाल व्यवस्था ने शिक्षा विभाग के निरीक्षण तंत्र पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्कूल में बिजली, पंखे, शौचालय और प्रयोगशाला जैसी सुविधाओं का अभाव है। बड़ी बात ये है कि अधिकारियों को इसकी जानकारी मीडिया के जरिए मिली।

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CG News: Smart Education Claims Exposed; 867 Children Study Without Electricity, Officials Wake Up After Media
डीएवी स्कूल, भोपालपट्टनम - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

जिले के भोपालपट्टनम स्थित डीएवी स्कूल की बदहाल व्यवस्था ने शिक्षा विभाग की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब 867 विद्यार्थियों वाले इस विद्यालय में लंबे समय से बिजली, पंखे, स्वच्छ शौचालय और प्रयोगशाला जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। हैरानी की बात यह है कि विभागीय अधिकारियों को इसकी जानकारी भी मीडिया में खबर प्रकाशित होने के बाद मिली।
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करीब 1200 विद्यार्थियों की क्षमता वाले इस विद्यालय में वर्तमान में 867 छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। नर्सरी से पांचवीं कक्षा तक के बच्चे ऐसे कमरों में पढ़ाई करने को मजबूर हैं, जहां न बिजली की व्यवस्था है और न ही पंखे लगे हैं। गर्मी और उमस के बीच विद्यार्थियों को प्राकृतिक रोशनी के सहारे पढ़ाई करनी पड़ रही है। कई कक्षाओं में आज तक बिजली कनेक्शन भी उपलब्ध नहीं कराया गया है।
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विद्यालय परिसर के शौचालय भी लंबे समय से बदहाल स्थिति में हैं। नियमित साफ-सफाई और रखरखाव के अभाव में अधिकांश शौचालय उपयोग के योग्य नहीं बचे हैं। मजबूरी में छोटे बच्चों को स्कूल परिसर से बाहर जाना पड़ता है, जिससे उनकी सुरक्षा और स्वास्थ्य दोनों पर खतरा बना रहता है।

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विद्यालय में शैक्षणिक संसाधनों की भी कमी है। विज्ञान सहित अन्य विषयों की प्रयोगशालाओं में पर्याप्त उपकरण उपलब्ध नहीं हैं, जिससे विद्यार्थियों को प्रयोगात्मक शिक्षा का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है। दूसरी ओर शिक्षकों की कमी, लगातार हो रहे स्थानांतरण और इस्तीफों के कारण नियमित शिक्षण व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है। हाल ही में नियुक्त आठ शिक्षकों में से कई ने कुछ ही दिनों के भीतर नौकरी छोड़ दी, जिससे स्कूल में पढ़ाई की व्यवस्था और अधिक अस्थिर हो गई है।



इस पूरे मामले में जिला शिक्षा अधिकारी राजेश पाण्डेय ने बताया कि विद्यालय की बदहाल स्थिति की जानकारी उन्हें मीडिया के माध्यम से मिली है। उन्होंने कहा कि संबंधित विद्यालय से विस्तृत प्रतिवेदन और आवश्यक प्रस्ताव मांगा गया है। प्रस्ताव प्राप्त होने के बाद विभागीय प्रक्रिया के तहत शौचालयों की मरम्मत, बिजली व्यवस्था सहित अन्य आवश्यक आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की कार्रवाई की जाएगी।

विद्यालय की मौजूदा स्थिति सरकारी स्तर पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, स्मार्ट स्कूल और बेहतर आधारभूत सुविधाओं के दावों पर सवाल खड़े कर रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि शिक्षा विभाग नियमित निरीक्षण और निगरानी करता तो सैकड़ों विद्यार्थियों को लंबे समय तक ऐसी बदहाल परिस्थितियों में पढ़ाई करने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता।
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