सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chhattisgarh ›   CG News: Only One Person Lives in tumakhurd Village, dhamtari news

CG News: बिन मूलभूत सुविधा के इस गांव में रहता है सिर्फ एक इंसान; अनोखे शौक और वजह को सुनकर रह जायेंगे हैरान

अमर उजाला नेटवर्क, धमतरी Published by: Lalit Kumar Singh Updated Sat, 04 Apr 2026 04:24 PM IST
विज्ञापन
सार

CG News: छत्तीसगढ़ का हर जिला अपने अनोखे कार्यों की वजह से फेमस है।

CG News: Only One Person Lives in tumakhurd Village, dhamtari news
ग्रॉफिक्स: अमर उजाला डिजिटल - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार

CG News: छत्तीसगढ़ का हर जिला अपने अनोखे कार्यों की वजह से फेमस है। ऐसा ही एक जिला है धमतरी। इस जिले का गांव तुमाखुर्द भी एक अनोखी कहानी के लिये चर्चा में है। यहां के सियाराम कोर्राम कई दशक से गांव में अकेले ही जीवन जी रहे हैं। 64 साल के सियाराम का कहना है कि वे यहां से अब अंतिम यात्रा पर ही निकलेंगे। उनका गांव, जल, जंगल, जमीन चारों से गहरा नाता है, जिसे वो हर हाल में छोड़ना नहीं चाहते। 

Trending Videos



बिना मूलभूत सुविधाओं के ही वो गांव में अपना जीवन बिता रहे हैं। उनका रहन-सहन भी बेहद सरल है। इसके साथ ही उनकी जीवन शैली भी अनोखी है। इस गांव में न तो बिजली है और न ही पानी। ऐसे में वो गंगरेल बांध के डुबान क्षेत्र में संग्रहित पानी का उपयोग पेयजल के रूप में करते हैं। हालांकि सरकार ने यहां तक पाइपलाइन और सौर उर्जा जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई पर पाइपलाइन में पानी नहीं आता और सौर पैनल भी खराब है। 
विज्ञापन
विज्ञापन


 गांव में केवल एक व्यक्ति का बसेरा
बता दें कि जिला मुख्यालय धमतरी से करीब 18 किलोमीटर दूर स्थित इस गांव में कभी सैकड़ों लोगों की जनसंख्या थी, लेकिन आज यहां सिर्फ एक ही व्यक्ति का बसेरा है। वो बताते हैं कि तुमाखुर्द गांव के वीरान होने की कहानी गंगरेल बांध के निर्माण से जुड़ी है। बांध बनने की वजह से जलभराव के कारण गांव के खेत-खलिहान और अधिकांश आबादी क्षेत्र पानी में डूब गया था। इस वजह से वर्ष 1970-80 के दशक में ग्रामीणों को अपना घर छोड़कर दूसरे जगह पलायन करना पड़ा। ऐसे कठिन समय में भी सियाराम ने गांव छोड़ने से मना कर दिया और तब से आज तक वो यहीं पर निवासरत हैं। 

अनोखे शौक और अलग दिनचर्चा
सियाराम की जीवनशैली बेहद अलग है। वे आधुनिक संसाधनों से इतर मोबाइल, टीवी जैसी सुविधाओं को पसंद नहीं करते या यूं कहें कि उन्हें इसकी जरूरत ही नहीं पड़ती है। वे मत्स्याखेट और छोटे-मोटे काम कर अपना गुजारा कर लेते हैं। इतना ही नहीं उनकी जीवनशैली भी बेहद संयमित है। वे दिन में सिर्फ एक बार भोजन करते हैं और बाकी समय चाय पीकर काम चलाते हैं। गर्मी के दिनों में वे पेड़ों पर बने मचान पर सोना पसंद करते हैं, जो उनके अनोखे शौक को बयां करता है। 

जंगली जानवरों से बेखौफ जीवन
चारों ओर जंगल से घिरे इस गांव में जंगली जानवरों का आना-जाना रहता है। ऐसे में सियाराम कहते हैं कि उन्हें कभी किसी जानवर से डर नहीं लगा। भालू, हाथी, तेंदुए जैसे जानवर कई बार उनके आसपास से होकर निकल चुके हैं पर उन्हें भय नहीं लगता। हाथियों ने उनकी कुटियां को उजाड़ भी दिया था, इसके बाद भी उनका डर खत्म नहीं हुआ। वे कहते हैं कि हाथियों का आना उन्हें बेहद अच्छा लगता है।

रामवनगमन पथ से जुड़ी है आस्था
बता दें कि तुमाखुर्द के पास रामटेकरी धार्मिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण स्थान है। ऐसी मान्यता है कि वनगमन के दौरान प्रभु श्रीराम यहां ठहरे थे। यह स्थान रामवनगमन पथ में शामिल है,जहां श्रद्धालु बड़ी संख्या में आते हैं। रामटेकरी से करीब आधा किलोमीटर दूर इस गांव की पहचान अब सियाराम की वजह से भी है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed